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बीड़ी पत्ता से नक्सली और ठेकेदार हो गए मालामाल, पर नहीं बदले केंदु पत्ता मजदूरों के हालात

बीड़ी पत्ता का कारोबार काफी बड़ा है. झारखंड का बीड़ी पत्ता, जिसकी मांग ज्यादा है और पलामू इसका बड़ा केंद्र रहा है. इस कारोबार से नक्सली संगठन और ठेकेदार मालामाल हो गए हैं. लेकिन केंदु पत्ता मजदूर बदहाल हैं, जीतोड़ मेहनत करने वाले लोगों को मुट्ठीभर रुपये ही नसीब होते हैं. बीड़ी पत्ता का काला कारोबार और मजदूरों की बदहाली बयां करती ईटीवी भारत की ये स्पेशल रिपोर्ट.

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बीड़ी पत्ता का कारोबार

Published : February 18, 2022 at 8:53 PM IST

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Updated : February 18, 2022 at 9:19 PM IST

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पलामूः बीड़ी पत्ता जिसे हम केंदु पता भी कहते हैं, झारखंड में नक्सली संगठन का बड़ा पोषक तत्व है. बीड़ी पत्ता से नक्सली संगठन और ठेकेदार मालामाल हो गए हैं. लेकिन बीड़ी पत्ता तोड़ने वाले मजदूरों के हालात नहीं बदले हैं. झारखंड सिर्फ कोयला अन्य खनिज पदार्थों के लिए ही नहीं जाना जाता बल्कि यहां की वन संपदा भी करोड़ों रुपये का राजस्व देती है. पूरे देश में झारखंड का बीड़ी पत्ता की सबसे अधिक मांग है. इस बीड़ी पत्ता से नक्सली संगठन करोड़ों की लेवी वसूलते है जबकि इसके ठेकेदार भी करोड़पति हो गए हैं. पलामू का इलाका बीड़ी पत्ता का बड़ा केंद्र रहा है. मार्च से जून के दूसरे सप्ताह तक बीड़ी पत्ता तोड़ी जाती है. इसके बाद पत्तों को सुखाकर उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में बेचा जाता है. नक्सली संगठन बीड़ी पत्ता के प्रति बैग से लेवी वसूलते हैं.

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पलामू में बीड़ी पत्ता का कारोबार से नक्सली संगठन और ठेकेदार पैसा कमा रहे हैं. लेकिन जहां के केंदु पत्ता मजदूर बदहाल हैं. लेकिन बीड़ी पत्ता से होने वाले लेवी के कारोबार पर पुलिस की पैनी नजर है. पिछले एक दशक में पलामू का माहौल बदल गया है. पुलिस और सुरक्षा बलों के पहुंच हर एक इलाके तक हो गयी है. पलामू रेंज के डीआईजी राजकुमार लकड़ा बताते हैं कि नक्सली संगठनों तक लेवी नहीं पहुंचे इसके लिए पुलिस कार्रवाई कर रही है. उन्होंने बताया कि पुलिस सभी से अपील करती है कि वो नक्सली संगठनों को लेवी नहीं दें, हर इलाके में पुलिस बल मौजूद है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने एक कार्य योजना तैयार किया है जिसके तहत लेवी वसूलने वाले के साथ देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. पलामू, लातेहार और चतरा सीमावर्ती इलाके से करीब 30 से 35 लाख बैग बीड़ी पत्ता की तुड़ाई होती है. नक्सल संगठनों में माओवादी 70 से 80, टीएसपीसी 60 से 70 और अन्य संगठन 35 से 40 रुपये प्रति बैग रुपये वसूलते हैं. पलामू में इलाके के नक्सली संगठन 25 से 30 करोड़ रुपये की लेवी वसूलते हैं.

देखें स्पेशल रिपोर्ट
मजदूरों के हालात नहीं बदलेः बीड़ी पत्ता का कारोबार करने वाले ठेकेदार करोड़पति हो गए हैं लेकिन मजदूरों के हालात नहीं बदले हैं. मजदूरों को बीड़ी पत्ता के प्रति बैग मजदूरी 105 से 120 मिलती है. मजदूरों को काम के अनुसार पैसा नहीं मिला पाता है. पलामू के जंगलों में बीड़ी पत्ता के पेड़ों की सफाई जमकर हो रही है. अगले एक सप्ताह में पत्ता निकलने के बाद उसे तोड़ा जाएगा. पूर्व वामपंथी नेता सह आजसू नेता सतीश कुमार बताते हैं कई संगठनों के आंदोलन के बाद बीड़ी पत्ता मजदूरों को मजदूरी मिलना शुरू हुई है. लेकिन आज भी उन्हें उतनी मजदूरी नहीं मिल रही है जितना उन्हें मिलना चाहिए. बीड़ी पत्ता की तुड़ाई करने वाले मजदूर बताते हैं कि वो करीब 50 वर्ष से बीड़ी पत्ता की तुड़ाई कर रहे हैं लेकिन उनके हालात नहीं बदले हैं. उन्हें मेहनत के अनुसार मजदूरी नहीं मिलती है.
Last Updated : February 18, 2022 at 9:19 PM IST