डायनासोर की एक प्रजाति में जन्म से ही उड़ने की क्षमता थी, ऐसा कोई दूसरा जीव नहीं

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Published : Jun 16, 2019, 6:24 PM IST

Updated : Jun 16, 2019, 7:37 PM IST

वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पाया है कि डायनासोर की एक प्रजाति में जन्म लेने के साथ ही उड़ने की क्षमता थी. इस अध्ययनमें यह तथ्य भी उजागर किया है कि वर्तमान में किसी जीवित या मृत प्राणी में यह क्षमता नहीं पाई गई है. पढ़ें इस डायनासोर के बारे में...

लंदन: वैज्ञानिकों ने उड़ने वाले सरीसृप के बारे में एक खोज की है. वैज्ञानिकों ने खोज में पाया है कि विलुप्त हो चुके टेरोडेक्टाइलस (Pterodactylus) डायनासोर में जन्म से उड़ान भरने की एक अद्भुत क्षमता थी. जीवाश्म रिकॉर्ड के आधार पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि इतिहास में भी किसी भी जीव में ऐसी क्षमता नहीं थी.

वहीं, चीन में इन जीवों के जीवाश्म भ्रूण पर आधारित एक शोध में यहा बात सामने आई कि टेरोडेक्टाइलस डायनासोर के पंख कमजोर हुआ करते थे. शोध में यह भी कहा गया है कि जब उनके पंख पूर्ण रूप से विकसित होते थे तभी वे उड़ान भर पाते थे. हालांकि, ब्रिटेन में लीसेस्टर विश्वविद्यालय और लिंकन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस परिकल्पना को खारिज किया है.

उन्होंने टेरोडेक्टाइलस डायनासोर के भ्रूण की अन्य पक्षियों और मगरमच्छों के भ्रूण के आंकड़ों के साथ तुलना की. जिसमें पाया कि जब अन्य जीवों के भ्रूण विकास के प्रारंभिक चरण में थे तब टेरोडेक्टाइलस के पंख निकल आए थे. चीन और अर्जेंटीना में उच्च भ्रूणों की खोज से इस बात के प्रमाण उपलब्ध कराए गए कि टेरोडेक्टाइलस डायनासोर में जन्म से उड़ान भरने की क्षमता थी.

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टेरोडेक्टाइलस डायनासोर. सौ. Getty Images

लीसेस्टर विश्वविद्यालय के एक जीवाश्म विज्ञानी डेविड अनविन ने कहा कि टेरोडेक्टाइलस डायनासोर के जन्म के बाद उसके माता-पिता उसकी देखभाल नहीं करते थे, उसे खुद ही खाना खोजना पड़ता था. इसलिए ये जन्म से ही उड़ने लगते थे. इसके साथ ही उड़ने की उनकी क्षमता से मांसाहारी डायनासोरों से बचने के लिए भी इस्तेमाल करते थे. हालांकि, जन्म के तुरंत बाद उड़ने की इस खतरनाक प्रक्रिया के कारण बहुत से टेरोडेक्टाइलस को कम उम्र में ही अपनी जान गंवानी पड़ी.

शोध ने वर्तमान दृष्टिकोण को भी चुनौती दी है कि टेरोडेक्टाइलस का पक्षियों और चमगादड़ों के समान ही व्यवहार था. चूंकि ये जन्म से ही उड़ान भरने और बढ़ने दोनों में सक्षम थे, इसलिए इनके पंख अन्य जीवों से कहीं अधिक बड़े और आकार भी विशाल होता था.

लिंकन विश्वविद्यालय के चार्ल्स डीमिंग ने बताया कि यह अन्य पक्षी और चमगादड़ से अलग थे इसलिए हम इनकी तुलनात्मक शरीर रचना से विलुप्त प्रजातियों में विकास के तरीकों की खोज कर सकते हैं.

Baby pterodactyls could fly from birth
         London, Jun 14 (PTI) Pterodactyls - extinct flying reptiles - had a remarkable ability to fly from birth, scientists have discovered.
         The importance of this discovery is highlighted by the fact that no other living vertebrates today, or those in the history of the fossil record, had this ability.
         This revelation has a profound impact on our understanding of how pterodactyls lived, which is critical to understanding how the dinosaur world worked as a whole.
         Previously, pterodactyls were thought only to be able to take to the air once they had grown to nearly full size, like birds or bats.
         This assumption was based on fossilized embryos of the creatures found in China that had poorly developed wings.
         Researchers from University of Leicester and University of Lincoln in the UK disproved this hypothesis.
         They compared these embryos with data on prenatal growth in birds and crocodiles, finding that they were still at an early stage of development and a long way from hatching.
         The discovery of more advanced embryos in China and Argentina that died just before they hatched provided the evidence that pterodactyls had the ability to fly from birth.
         "Theoretically, what pterosaurs did, growing and flying, is impossible, but they didn't know this, so they did it anyway," said David Unwin, a palaeobiologist at University of Leicester.
         Another fundamental difference between baby pterodactyls, also known as flaplings, and baby birds or bats, is that they had no parental care and had to feed and look after themselves from birth.
         Their ability to fly gave them a lifesaving survival mechanism which they used to evade carnivorous dinosaurs.
         This ability also proved to be one of their biggest killers, as the demanding and dangerous process of flight led to many of them dying at a very early age.
         The research has also challenged the current view that pterodactyls behaved in a similar way to birds and bats and has provided possible answers to some key questions surrounding these animals.
         Since flaplings were able to both fly and grow from birth, this provides a possible explanation as to why they were able to reach enormous wingspans, far larger than any historic or current species of bird or bat.
         How they were able to carry out this process will require further research, but it is a question that would not have been posed without these recent developments in our understanding.
         "Our technique shows that pterosaurs were different from birds and bats and so comparative anatomy can reveal novel developmental modes in extinct species," said Charles Deeming, from the University of Lincoln. PTI MHN
Last Updated :Jun 16, 2019, 7:37 PM IST
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