मधुमेह रोगियों के लिए इंजेक्टेबल ग्लूकोज मॉनिटर बनाने पर काम कर रहे हैं शोधकर्ता

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By IANS

Published : Nov 19, 2023, 4:05 PM IST

Updated : Nov 21, 2023, 6:12 AM IST

Researchers are working on creating injectable glucose monitors for diabetic patients

अमेरिका में Texas A&M University के शोधकर्ता इंजेक्टेबल कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटर बनाने पर लगातार काम कर रहे हैं. आपको बता दें सीजीएम चावल के दाने जितना छोटा है. पढ़ें पूरी खबर...(Researchers are working on creating injectable glucose monitors for diabetic patients, creating injectable glucose monitors)

न्यूयॉर्क : अमेरिका में टेक्सास एएंडएम विश्वविद्यालय के शोधकर्ता पूरी तरह से इंजेक्टेबल निरंतर ग्लूकोज मॉनिटर (सीजीएम) बनाने पर काम कर रहे हैं. Continuous glucose monitor इतना छोटा है कि यह चावल के एक दाने को टक्कर दे सकता है. शुगर के स्‍तर को मापने के लिए बाहरी ऑप्टिकल रीडर के साथ इसका उपयोग किया जा सकता है. विश्वविद्यालय में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के दो फैकल्टी मेंबर को एक इंजेक्शन, चावल के दाने के आकार के ग्लूकोज बायोसेंसर और पहनने योग्य उपकरण विकसित करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (एनएसएफ) अनुदान प्राप्त हुआ है. सह प्रमुख अन्वेषक और रीजेंट्स प्रोफेसर डॉ. जेरार्ड कोटे ने कहा कि सतत ग्लूकोज मॉनिटर व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर अंतर्निहित हैं, जिसका अर्थ है कि बांह पर एक पैच से जुड़ी त्वचा में एक सुई होती है.

उन्होंने कहा कि एक सीजीएम है जो पूरी तरह से प्रत्यारोपित किया जा सकता है. इसे चीरा लगाकर शल्य चिकित्सा द्वारा प्रत्यारोपित करने के लिए डॉक्टर की आवश्यकता होती है. कोटे और उनकी लैब इंजेक्टेड सेंसर की केमिस्ट्री डिजाइन कर रहे हैं और वॉच-टाइप रीडर डिवाइस विकसित कर रहे हैं. सेंसर को त्वचा के नीचे लगाया जाता है और ग्लूकोज एकाग्रता निर्धारित करने के लिए घड़ी जैसी डिवाइस से प्रकाश का उपयोग करके विश्लेषण किया जाता है. रीडर सेल फोन पर सिग्नल भेजता है और मरीज अपने स्वास्थ्य प्रदाता के साथ परिणाम साझा कर सकता है.

कोटे ने समझाया कि इंजेक्टेबल सेंसर में रासायनिक परख का उपयोग टिश्यू के भीतर ग्लूकोज की एकाग्रता को निर्धारित करने के लिए किया जाता है, जहां घड़ी उपकरण प्रकाश भेजती है. सेंसर और पहनने योग्य रीडर एक ऑप्टिकल सेंसिंग तकनीक का उपयोग करते हैं, जो गहरे रंग की त्वचा वाली आबादी के लिए बायोसेंसिंग से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करती है. कोटे ने कहा कि हम ऐसे रसायन का उपयोग करते हैं, जिसमें एक फ्लोरोसेंट रंग होता है जो हरी रोशनी के बजाय लाल और अवरक्त रेंज में उत्सर्जित होता है, जो गहरे रंग की त्वचा के लिए बेहतर काम करता है.

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Last Updated :Nov 21, 2023, 6:12 AM IST
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