जबलपुर होगा टीबी मुक्त! 5 लाख हाई रिस्क पेशेंट की हुई स्क्रीनिंग, मृत्यु दर 6% से 1% पर पहुंची
जबलपुर टीबी उन्मूलन की दिशा में कर रहा काम, 3 साल में 22 हजार मरीज हुए डिटेक्ट, निक्षय मित्रों ने बचाई मरीजों की जान

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 24, 2026 at 9:58 PM IST
जबलपुर: टीबी की बीमारी खत्म करने के लिए 5 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है. जबलपुर में मरीजों की सही देखरेख और फूड बास्केट की मदद से पिछले साल केवल 1 प्रतिशत लोग इस बीमारी से मौत का शिकार हुए, जबकि मध्य प्रदेश में अभी भी 3 से 4 प्रतिशत लोग टीबी की वजह से मृत्यु का शिकार हो रहे हैं. इसमें टीबी मरीजों को जीवनदान देने में निक्षय मित्रों का भी अहम योगदान रहा. उनके दान की वजह से सैकड़ों टीबी मरीजों की जान बच गई.
5 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग
भारत सरकार ने 2023 में टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा था. बाद में इस लक्ष्य की समयसीमा बढ़ाकर 2025 की गई और अब इसे 2030 कर दिया गया है. इसी के तहत जबलपुर में 6 लाख लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया था. जबलपुर टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के प्रभारी डॉक्टर संतोष ठाकुर ने बताया, "अब तक 5 लाख 28 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है.''
हाई रिस्क पेशेंट की स्क्रीनिंग हुई
टीबी उन्मूलन अधिकारी डॉ संतोष ठाकुर ने कहा, "हमने हाई रिस्क मरीजों की स्क्रीनिंग की है. इसमें सबसे पहले टीबी के पुराने मरीज फिर उनके कांटेक्ट में आने वाले और उनके परिजन की स्क्रीनिंग की गई. इसके साथ ही शराब पीने वाले, स्मोकिंग करने वाले, 60 साल से अधिक उम्र के लोग, अस्थमा की बीमारी से पीड़ित लोग, कैंसर, डायबिटीज, किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजो की स्क्रीनिंग की गई."

समूह में रहने वाले लोगों में टीबी की संभावना
डॉ. संतोष ठाकुर ने आगे कहा, '' जो लोग एक साथ समूह में रहते हैं. हमने उनकी भी स्क्रीनिंग की है. इसके तहत जबलपुर जिले के तमाम हॉस्टल, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले, फैक्टरीज में काम करने वाली, गर्भवती महिलाओं, वृद्ध आश्रम और मूकबधिर आश्रम इन सभी जगह पर लोगों की स्क्रीनिंग की गई."
80 हजार लोगों के किए गए एक्स-रे
डॉ संतोष ठाकुर ने बताया कि "टीबी की स्क्रीनिंग 3 स्तर पर की गई है. पहले स्तर पर लोगों से 10 किस्म के सवाल पूछे गए, जिनमें खांसी, खांसी में खून, वजन घटना, भूख घटना, सांस फूलना, सीने में दर्द होना जैसे लक्षणों के बारे में पूछताछ की गई. यदि किसी व्यक्ति ने इन लक्षणों में हां का जवाब दिया, तो ऐसे मरीजों को हमने एक्स-रे के जरिए चेक किया. इसके लिए हमने हैंड हेलिक्स मशीन का भी इस्तेमाल किया. जिसे उस स्थान पर ले जाया जा सकता है जहां मरीज रहता है. लगभग 80 हजार लोगों का एक्सरे निकले गए. वहीं, तीसरे स्तर में कफ की जांच होती है, जिसमें यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई मरीज टीबी की बीमारी से पीड़ित है या नहीं है. जबलपुर में 82 हजार लोगों का कफ टेस्ट किया गया."

3 साल में 22 हजार मरीज डिटेक्ट हुए
डॉ संतोष ठाकुर का कहना है कि इन टेस्ट के जरिए 2023 में जबलपुर में 7657 मरीज सामने आए थे. 2024 में 7612 मरीज सामने आए और 2025 में 7480 मरीज चिन्हित किए गए. इस तरह बीते 3 सालों में लगभग 22 हजार मरीज डिटेक्ट किए गए हैं.
मृत्यु दर 6% से 1% पर पहुंची
डॉक्टर ने कहा, "2023 में मृत्यु दर लगभग 5 से 6% थी और 2023 में 337 लोगों की मृत्यु हुई थी. इसी तरह 2024 में 140 लोगों की मौत हुई, लेकिन पिछले साल का आंकड़ा बहुत संतोषजनक था. पिछले साल जबलपुर में टीबी से मौत होने वाले लोगों की संख्या मात्र 68 थी, जो कुल प्राप्त मरीजों में से मात्र 1 प्रतिशत है.
जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. संजय मिश्रा ने कहा, "मध्य प्रदेश में टीबी से मरने वाले लोगों की संख्या 3 से 4% है, लेकिन जबलपुर में केवल 1 प्रतिशत लोग ही टीबी की वजह से मृत्यु का शिकार हो रहे हैं. हमने बहुत हद तक टीबी पर नियंत्रण पा लिया है.
निक्षय मित्रों ने बचाई टीबी मरीजों की जान
डॉ संजय मिश्रा ने बताया, "टीबी पर नियंत्रण पाने में हमें सबसे ज्यादा मदद निक्षय मित्रों से मिली है. टीबी एक संक्रामक बीमारी है और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीज इसका शिकार हो जाते हैं. टीबी के मरीज के लिए दवा का इंतजाम सरकार करती है. दवाइयां बहुत गर्म होती हैं, इसलिए मरीज को बहुत अधिक भूख लगती है. ऐसे में कई गरीब मरीजों के पास भोजन नहीं होता है, तो जबलपुर में लोगों ने जागरूकता दिखाई और गरीब मरीजों के लिए प्रोटीनयुक्त भोजन दान दिया. इन्हें शासन ने निक्षय मित्र नाम दिया था. एक मरीज को लगभग 500 रुपए का फूड बास्केट लोगों की तरफ से दान दिया गया. यह पौष्टिक भोजन खाने की वजह से मरीजों में गजब का सुधार नजर आया. इसी वजह से जबलपुर में टीबी के मरीजों में मृत्यु दर 1 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
'भीडभाड़ वाले इलाकों से बचें'
डॉ. संतोष ठाकुर का कहना है कि "सामान्य तौर पर लोगों को भीड़भाड़ में जाने के दौरान मुंह पर मास्क जरूर लगाना चाहिए. इसके साथ ही यदि किसी टीबी से पीड़ित मरीज के पास लोग जा रहे हैं, तो उन्हें मास्क का प्रयोग करना जरूरी है, क्योंकि यह संक्रामक बीमारी है और हवा के जरिए भी फैलती है."
टीबी मरीज के संपर्क में आने के बाद कराएं इगरा टेस्ट
संतोष ठाकुर ने बताया, "ऐसे लोग जो टीबी मरीज के संपर्क में आते हैं, वे चाहें तो अपना टेस्ट करवा सकते हैं. क्योंकि टीबी मरीज के संपर्क में रहने वाले लोगों के शरीर में टीबी का बैक्टीरिया पहुंच जाता है और वह सुस्त अवस्था में पड़ा रहता है. इगरा टेस्ट में इस बात का पता चल जाता है और यदि यह टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो उसे 6 माह तक आसान इलाज देकर ठीक किया जा सकता है."
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संतोष ठाकुर कहते हैं, "जबलपुर की 527 पंचायत में से 226 पंचायत टीबी मुक्त हो गई हैं. भारत सरकार के टीबी मुक्त अभियान में जबलपुर की हालत बाकी प्रदेश से काफी अच्छी है. जबलपुर में ज्यादातर मरीज चिन्हित हो चुके हैं, यदि इन लोगों ने अंत तक सही इलाज लिया, तो 2030 के पहले ही जबलपुर टीबी मुक्त हो सकता है."

