बांधवगढ़ में प्यास बुझाने का देसी आइडिया, भरी गर्मी में जानवर ठंडक में बैठ आनंद से लेंगे पानी की घूंट
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणियों की प्यास बुझाने सौसर बनाने की तैयारी. इसके लिए कुछ विशेष पेड़ों को चिन्हित किया जा रहा है.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 5, 2025 at 7:12 PM IST
उमरिया (अखिलेश शुक्ला): मार्च महीने की शुरूआत के साथ ही गर्मी ने दस्तक देना शुरू कर दिया है. हर दिन थोड़ी-बहुत गर्मी बढ़ने का एहसास हो रहा है. ऐसे में जंगलों में वन्य प्राणियों के लिए पानी की व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती होती है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इस बार गर्मी में कोई भी वन्य प्राणी प्यासा न रह जाए, इसके लिए देसी तकनीक अपनाने की तैयारी चल रही है. जिसमें कुछ ऐसे पेड़ पौधों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां देसी तकनीक अपनाकर वन्य प्राणियों के लिए पानी की व्यवस्था की जाएगी.
बांधवगढ़ में वन्यप्राणियों की ऐसे बुझेगी प्यास
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कोई भी वन्य प्राणी प्यासा न रहे जाए, इसके लिए एक नया प्रयोग किया जा रहा है, जिसके तहत देसी तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उपसंचालक पीके वर्मा बताते हैं कि "कुछ पेड़ ऐसे होते हैं, जिनके आसपास मौजूद नालों में यदि कुछ फिट खुदाई की जाए तो यहां लंबे समय तक के लिए पानी जम जाता है. जिसमें बरगद, जामुन और कहुआ आदि का पेड़ का नाम शामिल है. ऐसे में जल स्रोतों और नाले के पास मौजूद इन पेड़ों को चिन्हित किया जा रहा है."

वन्य प्राणियों के लिए बनाए जाएंगे रैंप
उप संचालक आगे बताते हैं कि "5 से 8 फीट तक गड्ढा बनाने पर 100 परसेंट पानी निकल आता है और इसमें ठंडक भी अच्छी रहती है, क्योंकि यह बड़े-बड़े पेड़ होते हैं, जो ठंडक बनाए रखते हैं. इनमें पानी का भी लेवल बना रहता है. इन पेड़ों के नीचे नाले में गड्डे बनाने के बाद उसमें बकायदे वन्य प्राणियों के उतरने के लिए रैंप भी बनाए जाएंगे, जिसमें वन्य प्राणी आसानी से उतर सकें."
रेंज ऑफिसरों को दिया गया निर्देश
बताया गया कि ये देसी तरीके से सीमेंट के टैंक से कई गुना बेहतर होते हैं. सीमेंट और कंक्रीट के टैंकर में कई चुनौतियां होती हैं. जैसे अगर वहां वाटर का कोई सोर्स नहीं है तो दूर से टैंकर के माध्यम से हर दिन पानी ले जाना पड़ता है. कई बार टैंकर बीच रास्ते पर ही खराब हो गया तो ऐसे में वन्य प्राणियों को पानी आज मिला कल नहीं मिला, जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
लेकिन नेचुरल तरीके से पानी की व्यवस्था करने पर वन्य प्राणी ठंडक में बैठकर आनंद से पानी भी पी सकेंगे. इसके लिए रेंज ऑफिसर को बता दिया है और अपने-अपने एरिया में ऐसी जगह को चिन्हित करने के लिए भी कह दिया है.
कितने किलोमीटर में होगी पानी की व्यवस्था
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा बताते हैं कि "हमारे कुछ तालाब और नदी ऐसे हैं, जिनमें बराबर पानी बना रहता है. इसके आसपास सौसर नहीं बनाया जाएगा. जंगल में 2 से 3 किलोमीटर अंतराल में पानी होना चाहिए. इसलिए सूखे नदी और नाले के आसपास केवल सौसर बनाए जाएंगे."

बांधवगढ़ में कितने हैं नदी, तालाब
बांधवगढ़ का टाइगर रिजर्व 1536 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैला हुआ है. यहां जंगल के अंदर करीब 8 छोटी-बड़ी नदियां हैं. जिसमें चरणगंगा नदी, उमरार नदी, जनाढ नदी, भदार नदी, हलफल नदी व सोन नदी है. इसके अलावा 15 तालाब और 284 के लगभग पोखरनुमा जलकुंड भी हैं. बाघ और अन्य वन्य प्राणी ऐसी जगह के आसपास ही ज्यादा विचरण करते हैं और अपनी प्यास बुझाते हैं.
कितने घंटे में होगा वाटर रिचार्ज
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा बताते हैं कि "बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मार्च की शुरुआत से ही जल स्रोतों का पानी घटने लगता है. 9 रेंज की 139 बीट में गश्ती दल वन्यजीवों के साथ ही पूरी गर्मी जल स्रोतों की निगरानी करेगा. पानी सूखने पर 3 टैंकर के माध्यम से 72 घंटे के अंदर इन्हें रिचार्ज किया जाएगा. इसके अलावा करीब 25 से अधिक सौर ऊर्जा से चलित पंप तालाब व पोखरों में पानी भरते हैं और इन्हीं के माध्यम से वन्य प्राणियों की प्यास बुझाई जाती है."
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बांधवगढ़ में वन्यप्राणियों की भरमार
बांधवगढ़ की पहचान मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश और विदेश में भी है. बाघों के दीदार के लिए यहां दुनियाभर से पर्यटक पहुंचते हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कई वन्य प्राणी पाए जाते हैं, जिसमें प्रमुख तौर पर 200 से ज्यादा बाघ हैं. 60 से 70 के करीब हाथी हैं. इसके अलावा तेंदुआ, भालू, हिरण, बायसन, चीतल सहित कई अलग-अलग प्रकार के पक्षियां भी हैं.
इन वन्य प्राणी के लिए गर्मी के समय में पानी का अरेंजमेंट एक बड़ी चुनौती होती है. उसी के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने अभी से प्रयास करने शुरू कर दिए हैं. जिससे गर्मी के समय में टाइगर रिजर्व का कोई भी वन्य प्राणी प्यासा ना रह जाए.

