पांच लाख के इनामी नक्सली समेत तीन का सरेंडर, बीजापुर में  पुनर्वास नीति से हुए प्रभावित

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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : Feb 9, 2024, 7:11 PM IST

Rewarded Naxalite Surrenders

Rewarded Naxalite Surrenders बीजापुर में नक्सल उन्मूलन अभियान और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 5 लाख के इनामी नक्सली ने सरेंडर किया है. इनामी नक्सली से साथ दो अन्य सदस्यों ने भी पुलिस के सामने अपने हथियार डाले.Naxalite Surrender

बीजापुर : नक्सल उन्मूलन अभियान के दौरान डीआरजी, बस्तर फाइटर और कोबरा बटालियन के जवानों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 5 लाख के इनामी नक्सली समेत 3 नक्सलियों ने सरेंडर किया है.सरेंडर करने वाले नक्सलियों में मद्देड़ एरिया कमेटी सदस्य सोमारू ऊर्फ सीनू, जगरगुण्डा एरिया कमेटी सिलगेर आरपीसी सीएनएम सदस्य सुक्का ओयाम ऊर्फ कार्तिक और सरिता ओयाम हैं.

5 लाख के इनामी नक्सली का सरेंडर : सोमारू कड़ती ऊर्फ सीनू 2004 में भैरमगढ़ एरिया कमेटी अन्तर्गत पीटेपाल बाल संघम सदस्य के पद पर संगठन में भर्ती हुआ. साल 2006 में सीएनएम सदस्य, 2008 में मद्देड़ एरिया कमेटी अन्तर्गत आवापल्ली एलओएस सदस्य, 2010 में ईलमिड़ी क्षेत्र में जनमिलिशिया का काम किया. 2012 में आवापल्ली डिप्टी कमाण्डर, 2015 से 2018 तक आवाल्ली एलओएस डिप्टी कमाण्डर का काम किया. 2018 में मद्देड़ एरिया कमेटी का सदस्य बनी.

किन घटनाओं में सोमारू रहा शामिल ?

  • वर्ष 2014 में मुरकीनार कैम्प से निकली पुलिस पार्टी पर घात लगाकर हमला किया ,जिसमें 04 जवान शहीद हुए.
  • वर्ष 2010 में मद्देड मोदकपाल मार्ग का कटाव किया.
  • वर्ष 2020 में ग्राम आईपेंटा के ग्रामीण धरमू यालम की जन अदालत लगाकर हत्या की.
  • वर्ष 2022 में थाना मोदकपाल क्षेत्रान्तर्गत पंगुड के जंगल में पुलिस पार्टी पर हमला.

सुक्का ओयाम ऊर्फ कार्तिक : 2015 में सिलगेर आरपीसी अंतर्गत बाल संघम सदस्य के रूप में संगठन में भर्ती हुआ. 2017 में सीएनएम सदस्य के पद की जवाबदारी मिली. 2019 में सिलगेर आरपीसी अन्तर्गत आर्थिक शाखा अध्यक्ष पद की जवाबदारी मिली. 2020 में जगरगुण्डा से चिंतलनार मार्ग पर जगह-जगह गड्ढा खोदकर रास्ता रोकने की घटना में शामिल था.


सरिता ओयाम पति सुक्का ओयाम : 2019 में सिलगेर आरपीसी में बाल संघम सदस्य के रूप में भर्ती हुई. 2020 में सिलगेर आरपीसी में सीएनएम सदस्या का काम मिला. 2020 से 2021 तक सीएनएम सदस्य के पद काम किया.

क्यों छोड़ा नक्सली संगठन ?: तीनों नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग शासन की नीतियों के कारण छोड़ा है. नक्सलियों की माने तो उन्हें संगठन में भेदभाव और उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा था.इसलिए हथियार डालकर समाज की मुख्य धारा में लौटाने का निर्णय लिया गया. सरेंडर करने पर नक्सलियों को आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत पच्चीस हजार रूपये नकद प्रोत्साहन राशि दी गई.

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