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गफलत में मरीज के अटेंडेंट का हो जाता ऑपरेशन, OT में लगा दिया था चीरा, अब मचा हड़कंप

कोटा में लापरवाही का बड़ा मामला. मरीज के अटेंडेंट का हो जाता ऑपरेशन, लेकिन समय रहते गलती पकड़ में आ गई. जानिए पूरा मामला...

Kota Government Hospital
कोटा का सरकारी अस्पताल (ETV Bharat Kota)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : April 16, 2025 at 5:27 PM IST

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Updated : April 16, 2025 at 9:32 PM IST

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कोटा: मेडिकल कॉलेज कोटा के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में एक मरीज के अटेंडेड को ऑपरेशन थिएटर में ले जाने और चीरा लगा देने का मामला सामने आया है. हालांकि, समय रहते गलती पकड़ में आ गई, जिससे मरीज का ऑपरेशन नहीं हुआ. अब इस घटनाक्रम के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है. इस मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने जांच करने की बात कह रहे हैं, लेकिन फिलहाल कोई जांच कमेटी गठित नहीं हुई है. यह घटनाक्रम 12 अप्रैल को हुआ है. वहीं, इस मामले में कार्यवाहक अधीक्षक डॉ विकास खंडेलिया का कहना है कि मामले की जांच के लिए जल्द जांच कमेटी गठित कर दी जाएगी.

मामले के अनुसार अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी डिपार्टमेंट में एक मरीज के हाथ में डायलिसिस फिस्टुला बनाना था. यह हाथ में चीरा लगाकर नसों को जोड़कर बनाया जाता है, ताकि मरीज की डायलिसिस आसानी से हो सके. इसी नाम का एक अटेंडेंट अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठा हुआ था, जिसके बेटे का ऑपरेशन प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट कर रहा था.

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ऑपरेशन थिएटर के बाहर स्टाफ ने आकर जैसे ही आवाज दी, तब इस जगदीश नाम के अटेंडेंट ने हाथ ऊंचा कर दिया. इसके बाद स्टाफ उसे अंदर ले गया और ऑपरेशन थिएटर पर टेबल पर लेटा दिया. उसके हाथ में फिस्टुला बनाने के लिए चीरा भी लगा दिया गया. इसी दौरान उसके बेटे का इलाज कर रहे डॉक्टर पहुंच गए. उन्होंने देखा कि यह तो उनके मरीज का अटेंडेंट है. इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और हड़कंप मच गया. इस घटना के बाद इस मरीज के वापस टांके लगाए गए. उसे ओटी से वापस उसके बेटे के वार्ड में भेज दिया. बाद में जिस मरीज का डायलिसिस फिस्टुला बना था, उसका फिस्टुला बनाया गया, जिसे 13 तारीख को डिस्चार्ज भी कर दिया गया है.

मरीज की जगह दूसरे मरीज के अटेंडेंट को ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के संबंध की सूचना मिली है. इस मामले में जांच कमेटी जल्द ही गठित कर दी जाएगी. इसके बाद ही मामला सामने आएगा कि क्या पूरा प्रकरण रहा है. - डॉ. विकास खंडेलिया, कार्यवाहक अधीक्षक, सुपर स्पेशयिलिटी ब्लॉक

अटेंडर के पैरालाइज्ड होने से समस्या, ओटी में भी फॉलो नहीं हुआ प्रोसीजर : जिस अटेंडर के साथ यह घटना हुई है, वह पैरालाइज्ड है. वह ठीक से बोल नहीं पाता है. इसीलिए जब उससे पूछा गया तो वह कुछ भी नहीं बोल पाया और डॉक्टर ने भी प्रोसीजर शुरू कर दिया. दूसरी तरफ ऑपरेशन थिएटर में भी प्रोसीजर फॉलो नहीं हुआ है. ओटी में मरीज को ले जाने के पहले उसे ओटी की ड्रेस पहनाई जाती है, लेकिन इस मरीज ने ड्रेस भी नहीं पहनी हुई थी. दूसरी तरफ हाथ में डायलिसिस फिस्टुला बनाने के लिए बाल हटाए जाते हैं और सफाई की जाती है, वह भी नहीं हुई थी. इसके बावजूद भी डॉक्टर ने ध्यान नहीं दिया. हालांकि, यह काफी छोटा प्रोसीजर था, इसलिए डॉक्टर ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया.

Last Updated : April 16, 2025 at 9:32 PM IST