तगड़ा जुगाड़ लगाकर बंदे ने बुलेट में सेट कर दिया पैर का गियर हाथ में, गजब की है कलाकारी
आपने बाइक के गियर पैर से बदलते देखें होंगे, लेकिन गया में दिव्यांग हाथों से गियर बदल कर बुलेट चलाने का शौक पूरा किया है.

Published : April 20, 2025 at 6:44 PM IST
गया: कहा जाता है कि हिम्मत और जज्बा रहने से कोई भी काम मुश्किल नहीं होता है. ऐसी ही कुछ कहानी है बिहार के गया के रहने वाले जुगाड़ इंजीनियर किशोरी मिस्त्री की. किशोरी भले ही इंटरमीडियट तक ही पढ़े हैं, पर उनकी ‘जुगाड़’ इंजीनीयरिंग इन दिनों हर किसी को हैरत में डाल रही है.
दिव्यांग के शौक को किया पूरा: दरअसल, किशोरी मिस्त्री शहर के दिग्घी तालाब के पास इलेक्ट्रिक वेल्डिंग लेथ मशीन की दुकान है. किशोरी मिस्त्री ने दिव्यांग राहुल देव के कहने पर बुलेट बाइक में पैर के गियर लिवर में रॉड जोड़ कर उसे हाथ गियर में बदल दिया है और साथ ही बुलेट बाइक के पिछले पहिया के ब्रेक को आगे हाथ ब्रेक लिवर से कनेक्ट कर दाहिनी ओर के हाथ में ब्रेक बनाया है.
गजब की है कलाकारी: हालांकि किशोरी मिस्त्री ने बुलेट को मॉडिफाई करने के लिए इंजन के किसी पार्ट को टच नहीं किया. सारे काम को जुगाड़ विधि से बाहरी हिस्से से जोड़कर तैयार किया है जिस से उसकी स्पीड में भी कोई कमी नहीं आई है. जिस तरह से सहायक चक्के लगते हैं उसी तरह बुलेट में भी लगाया गया है.
मॉडिफाई बुलेट की लागत: मॉडिफाई बुलेट में गियर के लिए हाफ इंच की पाइप, 12 एमएम रॉड लगाया गया है. हाफ इंच के पाइप का फोर बुश का गियर बनाया गया है, जिसकी लंबाई लगभग 22 इंच है, गियर बॉक्स के बाहरी हिस्से के लिवर में फिट किया गया है, पैर ब्रेक को हाथ लिवर से जोड़ा गया है. इस में 25 हजार रुपये का टोटल खर्च हुआ है.

1967 से कर रहे हैं काम: 67 साल के किशोरी मिस्त्री 1967 से वेल्डिंग लेथ मशीन का कार्य कर रहे हैं. स्कूटी बाइक में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए उन्होंने गया में 20 वर्ष पूर्व' सहायक पहिया' लगाया था. यह पहिए बाइक के पीछे या बगल में लगे होते हैं और दिव्यांग व्यक्ति को संतुलन बनाए रखने और बाइक को चलाने में मदद करते हैं.
20 वर्ष पहले किया था डिजाइन: किशोरी मिस्त्री बताते हैं की पहली बार उन्होंने गया में 20 वर्ष पहले एक विकलांग व्यक्ति के लिए सहायक पहिया को खुद से डिजाइन कर बनाया था. अब तो बाइक एजेंसी भी खुद सहायक पहिया लगवा देते हैं लेकिन जब हमने बनाया था उस समय गया में कोई मिस्त्री बाइक में सहायक पहिया नहीं लगाना जनता था.

पहली बार लगा था एक महीना: किशोरी मिस्त्री कहते हैं कि जुगाड़ विधि से कार्य करना यह हमारे दिमाग की उपज होती है. इसके लिए पढ़ा लिखा होना शर्त नहीं है, सिर्फ आपके अंदर काबिलियत होनी चाहिए. जब पहली बार हम सहायक पहिया बना रहे थे तो हमें एक महीने का समय लगा था, अब तो 5 दिनों में बनाकर लगा देते हैं.
"पिछले कई सालों से देसी जुगाड़ से स्कूटी बाइक में कारीगरी कर रहे हैं अब तक 1000 से ज्यादा स्कूटी में सहायक पहिया लगा चुके हैं. पहली बार गियर हाथ से इस्तेमाल के लिए बनाया है." -किशोरी प्रसाद, मिस्त्री

15 दिनों में किया तैयार: किशोरी मिस्त्री इंटर पास हैं. शौक था मैकेनिकल इंजीनियर बनने का लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें समस्या हुई और वो इस काम को करने लगे. उन्होंने अपने काम से आय कर अपने भाई बेटे और भतीजे को इंजीनियर बनाया है.
बुलेट चलाने का शौक किया पूरा: किशोरी मिस्त्री बताते हैं कि जब राहुल देव दिव्यांग है. समय पर अपने कामों को दूसरे स्थान पर जाकर नहीं कर पाते. स्कूटी में सहायक पहिया लगा हुआ है लेकिन वह लंबी दूरी जाने में उन्हें समस्या होती है. बुलेट बाइक चलाने के शौक के बारे में भी बताया और एक बुलेट की वीडियो दिखाएं. लगभग 15 दिनों की मेहनत के बाद हैंड गियर बनाया है.

"बुलेट चलाने का शौक था. पैर से दिव्यांग होने की वजह से शौक पूरा नहीं कर पा रहा था. पहले दूर जाने में समस्या थी लेकिन अब नहीं है क्योंकि हम बाइक चला रहे हैं. एक वीडियो देखा था और उसी वीडियो को किशोरी मिस्त्री को दिखाया और 15 दिनों में बनाकर दिए हैं." -राहुल देव, दिव्यांग
गाइड का काम करते हैं राहुल देव : बोधगया के राहुल देव भले ही शरीर से दिव्यांग हैं. लेकिन हौसले बुलंद हैं. तभी तो पैर से 70 प्रतिशत विकलांग होने के बावजूद बुलेट बाइक चलाने के अपने शौक धूम स्टाइल में पूरा कर रहे हैं. राहुल देव बोधगया में गाइड का काम करते है और साथ ही टूर एंड ट्रेवल्स की दुकान भी है.
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