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बराक ओबामा ट्रंप का तख्तापलट करना चाहते थे...मिलकर साजिश रची, तुलसी गबार्ड ने लगाए आरोप

तुलसी गबॉर्ड ने ओबामा और उनके प्रशासन के सीनियर अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मांग की.

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तुलसी गबार्ड और बराक ओबामा (डिजाइन इमेज) (AFP)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 19, 2025 at 5:35 PM IST

6 Min Read
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वाशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके प्रशासन के सीनियर अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मांग की. तुलसी गबार्ड ने बराक ओबामा पर साल 2016 के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत को नुकसान पहुंचाने और बाद में उनके राष्ट्रपति पद के कार्यकाल को कमजोर करने के लिए मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया है.

गबार्ड ने एक बयान में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें पूर्व डीएनआई जेम्स क्लैपर, सीआईए निदेशक जॉन ब्रेनन, एफबीआई निदेशक जेम्स कॉमी और अन्य शामिल हैं, पर 2016 के चुनाव को डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में प्रभावित करने के लिए रूस को झूठा फंसाने के लिए खुफिया जानकारी गढ़ने का आरोप लगाया.

गबार्ड ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में दावा किया, अमेरिकी आखिरकार इस सच्चाई से अवगत होंगे कि कैसे 2016 में ओबामा प्रशासन के सबसे शक्तिशाली लोगों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ सालों तक चलने वाले तख्तापलट की नींव रखने के लिए खुफिया जानकारी का राजनीतिकरण और हथियारीकरण किया. उन्होंने कहा कि, ऐसा करके अमेरिकी लोगों की इच्छाशक्ति को कुचला गया और हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य को कमजोर किया गया.

डीएनआई कार्यालय (ओडीएनआई) ने 114 पृष्ठों का एक दस्तावेज जारी किया है जिसमें इस बात के प्रमाण दिए गए हैं कि नवंबर 2016 के चुनाव से पहले, खुफिया समुदाय (आईसी) ने लगातार यह आकलन किया था कि रूस शायद साइबर माध्यमों का उपयोग करके चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश नहीं कर रहा था.

दस्तावेज में आगे कहा गया है कि 8 दिसंबर, 2016 को राष्ट्रपति के दैनिक संक्षिप्त विवरण (पीडीबी) के एक मसौदे में कहा गया था कि रूस ने अमेरिकी चुनाव ढांचे के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियां चलाकर हालिया अमेरिकी चुनाव परिणामों को प्रभावित नहीं किया.

हालांकि, इस आकलन को नए दिशानिर्देशों के आधार पर अचानक वापस ले लिया गया और कभी प्रकाशित नहीं किया गया. गबार्ड के निष्कर्षों के मुताबिक, 9 दिसंबर, 2016 को ओबामा द्वारा बुलाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक, जिसमें क्लैपर, ब्रेनन और अन्य उच्च-स्तरीय अधिकारी शामिल थे, ने कथित तौर पर आईसी को रूसी हस्तक्षेप का दावा करते हुए एक नया आकलन तैयार करने का निर्देश दिया. जबकि पिछले निष्कर्षों में विराधोभास था.

गबार्ड ने अपने बयान में कहा, अगले दिन (9 दिसंबर, 2016), एफबीआई निदेशक जेम्स कॉमी, सीआईए निदेशक जॉन ब्रेनन और डीएनआई जेम्स क्लैपर सहित शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी रूस पर चर्चा करने के लिए ओबामा व्हाइट हाउस में एकत्र हुए. ओबामा ने आईसी को एक नया खुफिया आकलन तैयार करने का निर्देश दिया, जिसमें रूसी चुनाव में हस्तक्षेप का विवरण हो, हालांकि यह पिछले कई महीनों में जारी किए गए कई खुफिया आकलनों का खंडन करता है,"

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि क्लैपर के कार्यकारी सहायक के एक ईमेल ने सीआईए, एफबीआई, एनएसए और डीएचएस को "राष्ट्रपति के अनुरोध के अनुसार" यह नया नैरेटिव तैयार करने का काम सौंपा. गबार्ड ने आगे आरोप लगाया कि ओबामा अधिकारियों ने वाशिंगटन पोस्ट सहित मीडिया संस्थानों को झूठे दावे लीक किए, जिनमें साइबर हमलों के माध्यम से रूस के हस्तक्षेप का दावा किया गया.

उनके बयान में कहा गया है, "ओबामा के अधिकारियों ने अपने झूठ को आगे बढ़ाने के लिए मीडिया में अपने सहयोगियों पर तुरंत दबाव डाला. अज्ञात आईसी सूत्रों ने वाशिंगटन पोस्ट और अन्य को वर्गीकृत जानकारी लीक कर दी कि रूस ने ट्रंप के पक्ष में चुनाव को हैक करने के लिए हस्तक्षेप किया था." गबार्ड के मुताबिक, 6 जनवरी, 2017 को क्लैपर ने एक इंटेलिजेंस कम्युनिटी असेसमेंट (ICA) जारी किया, जिसके बारे में उनका दावा है कि यह बदनाम स्टील डोजियर पर आधारित था, जिसने मुलर जांच, कांग्रेस द्वारा महाभियोग और अमेरिका-रूस के बीच बढ़ते तनाव की नींव रखी.

ODNI के बयान में कहा गया है, "6 जनवरी, 2017 को एक नया इंटेलिजेंस कम्युनिटी असेसमेंट जारी किया गया, जो पिछले छह महीनों में किए गए IC के आकलनों का सीधा खंडन करता था. इस मामले की महीनों की जांच के बाद, तथ्य यह उजागर करते हैं कि यह नया आकलन उस जानकारी पर आधारित था जिसके बारे में संबंधित लोगों को पता था कि वह स्टील डोजियर गढ़ा हुआ है या जिसे अविश्वसनीय माना जाता है."

ODNI के बयान में कहा गया है, "यह राजनीतिकरण की गई खुफिया जानकारी थी जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति ट्रंप की जीत, सालों से चली आ रही मुलर जांच, दो कांग्रेसी महाभियोग, उच्च-स्तरीय अधिकारियों की जांच, गिरफ्तारी और जेल में डाले जाने, अमेरिका-रूस के बीच बढ़ते तनाव और अन्य कई घटनाओं को बदनाम करने के लिए अनगिनत बदनामी के आधार के रूप में किया गया."

गबार्ड ने अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) के तहत इसमें शामिल लोगों की जांच और अभियोजन का आह्वान करते हुए निष्कर्ष निकाला, "चाहे वे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, इस साजिश में शामिल हर व्यक्ति की जांच होनी चाहिए और कानून की पूरी सीमा तक उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसा दोबारा न हो.

उन्होंने घोषणा की कि सभी संबंधित दस्तावेज आपराधिक संदर्भ के लिए डीओजे को भेज दिए गए हैं. उन्होंने कहा, "अमेरिकी लोगों का हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य में विश्वास और भरोसा, और इसलिए हमारे राष्ट्र का भविष्य, इस पर निर्भर करता है. इसलिए, मैं राष्ट्रपति ट्रंप, उनके परिवार और अमेरिकी लोगों को मिलने वाली जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए न्याय विभाग को सभी दस्तावेज उपलब्ध करा रही हूं."

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