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आपके शरीर में अगर दिख रहे ये लक्षण तो हो जाएं सावधान! हीट स्ट्रोक के हो सकते हैं संकेत - symptoms of heat stroke

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By ETV Bharat Hindi Team

Published : May 22, 2024, 6:00 AM IST

Symptoms Of Heat Stroke: गर्मी के मौसम में लंबे समय तक सूरज के संपर्क में रहने से हीटस्ट्रोक की समस्या हो सकती है. लू लगने से मरीज ठीक से बोल नहीं पाता है और उसकी स्किन भी लाल हो जाती है.

symptoms of heat stroke
हीट स्ट्रोक (ANI)

नई दिल्ली: देशभर में लोगों को हीटवेव का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में गर्मी से संबंधित बीमारियों की संभावना बढ़ गई है. गर्म के संपर्क में आने से लोगों में डीहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है और वे बेहोश भी हो सकते हैं. इसके अलावा गर्मी में हीटस्ट्रोक की संभावना भी बढ़ जाती है.

गर्मी के मौसम में लंबे समय तक सूरज के संपर्क में रहने से हीटस्ट्रोक की समस्या हो सकती है. गर्मी में ज्यादा समय तक धूप रहने से शरीर अत्यधिक गर्म हो जाता है और परिणामस्वरूप लू लग जाती है और ऐसे में हीटस्ट्रोक हो सकता है. हालांकि, कुछ लक्षणों से हीट स्ट्रोक को पहचाना जा सकता है और वक्त पर उचिल इलाज करवाया जा सकता है.

हीट स्ट्रोक के लक्षण
हीट स्ट्रोक होने पर शरीर का तापमान 103 से 104 फॉरेनहाइट से अधिक हो जाता है. ना इसे आमतौर पर थर्मामीटर से चेक किया जा सकता है. लू लगने से मरीज ठीक से बोल भी नहीं पाता है और उसकी जुबान लड़खड़ाने लगती है. हीटस्ट्रोक से आपको मतली या उल्टी की आवश्यकता महसूस हो सकती है.

हीट स्ट्रोक होने पर आपकी त्वचा लाल हो जाती है और आपकी सांसें तेज चलती हैं. हीटस्ट्रोक में सिरदर्द भी होने लगता है. साथ ही आपकी मांसपेशियां भी कमजोर महसूस हो सकती हैं. हीटवेव होने पर रक्तचाप में गिरावट आमबात है.

लू लगने का कारण?
लू लगने के दो कारण होते हैं. पहला लंबे समय तक सूरज के संपर्क में रहने से और दूसरा गर्मी में कड़ी मेहनत करने से. लू लगने से शरीर के तापमान में वृद्धि होती है. इससे सबसे ज्यादा वृद्ध लोग प्रभावित होते हैं. अगर कोई गर्मी में कड़ी मेहनत कर रहा है तो अत्यधिक लू लगने की संभावना होती है. यह उन लोगों को प्रभावित करता है जो गर्मी के आदी नहीं हैं.

हीट वेव से कैसे बचें?
जब तापमान अधिक हो तो लू से बचने के लिए घर पर रहे या फिर ऐसी जगह पर जाएं जहां ठंडक हो. अगर किसी काम के लिए गर्मी में बाहर जाना जरूरी हो तो कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए. बाहर जाने से पहले हल्के रंग के कपड़े पहनें और जो ढीले हों, ताकि शरीर को पर्याप्त हवा मिल सके. इसके अलावा बाहर जाते वकत कैप पहनें या फिर छाता लेकर चलें.

खुद को हाइड्रेट रखें
गर्मी के मौसम में खुद को ज्यादा से ज्यादा हाइड्रेट रखें और तरल पदार्थों जैसे पानी या या ओआरएस का इस्तेमाल करें. अत्यधिक गर्मी आपके इलेक्ट्रोलाइट्स को खत्म कर सकती है जिससे निर्जलीकरण हो सकता है और हीटस्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है.अगर आप बाहर काम कर रहे हैं, तो सामान्य मात्रा के मुकाबले 1 से 2 लीटर पानी ज्यादा पिएं. कैफीन और अल्कोहल से बचें क्योंकि ये आपके शरीर से तरल पदार्थ निकाल देते हैं.

लक्षण पहचानने के बाद डॉक्टर से परामर्श लें
जब आप हीटस्ट्रोक के लक्षणों को पहचान लें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें. पैरामेडिक्स के आने तक छायादार क्षेत्र में रहें. बीमार शख्स को पर्याप्त हवा दें. उनकी स्किन को गीला करने के लिए पानी या गीले कपड़े का प्रयोग करें. इसके लिए एक नम कपड़े का उपयोग करें और इसे उनकी गर्दन, कमर, बगल और पीठ पर लगाएं. गौरतलब है कि वृद्ध रोगियों, छोटे बच्चों या पुरानी बीमारी वाले लोगों के लिए बहुत ठंडे पानी या बर्फ का उपयोग न करें.

यह भी पढ़ें- हीटवेव का प्रकोप जारी, गर्मी और लू को दें मात, इन स्टेप्स को करें फॉलो

नई दिल्ली: देशभर में लोगों को हीटवेव का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में गर्मी से संबंधित बीमारियों की संभावना बढ़ गई है. गर्म के संपर्क में आने से लोगों में डीहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है और वे बेहोश भी हो सकते हैं. इसके अलावा गर्मी में हीटस्ट्रोक की संभावना भी बढ़ जाती है.

गर्मी के मौसम में लंबे समय तक सूरज के संपर्क में रहने से हीटस्ट्रोक की समस्या हो सकती है. गर्मी में ज्यादा समय तक धूप रहने से शरीर अत्यधिक गर्म हो जाता है और परिणामस्वरूप लू लग जाती है और ऐसे में हीटस्ट्रोक हो सकता है. हालांकि, कुछ लक्षणों से हीट स्ट्रोक को पहचाना जा सकता है और वक्त पर उचिल इलाज करवाया जा सकता है.

हीट स्ट्रोक के लक्षण
हीट स्ट्रोक होने पर शरीर का तापमान 103 से 104 फॉरेनहाइट से अधिक हो जाता है. ना इसे आमतौर पर थर्मामीटर से चेक किया जा सकता है. लू लगने से मरीज ठीक से बोल भी नहीं पाता है और उसकी जुबान लड़खड़ाने लगती है. हीटस्ट्रोक से आपको मतली या उल्टी की आवश्यकता महसूस हो सकती है.

हीट स्ट्रोक होने पर आपकी त्वचा लाल हो जाती है और आपकी सांसें तेज चलती हैं. हीटस्ट्रोक में सिरदर्द भी होने लगता है. साथ ही आपकी मांसपेशियां भी कमजोर महसूस हो सकती हैं. हीटवेव होने पर रक्तचाप में गिरावट आमबात है.

लू लगने का कारण?
लू लगने के दो कारण होते हैं. पहला लंबे समय तक सूरज के संपर्क में रहने से और दूसरा गर्मी में कड़ी मेहनत करने से. लू लगने से शरीर के तापमान में वृद्धि होती है. इससे सबसे ज्यादा वृद्ध लोग प्रभावित होते हैं. अगर कोई गर्मी में कड़ी मेहनत कर रहा है तो अत्यधिक लू लगने की संभावना होती है. यह उन लोगों को प्रभावित करता है जो गर्मी के आदी नहीं हैं.

हीट वेव से कैसे बचें?
जब तापमान अधिक हो तो लू से बचने के लिए घर पर रहे या फिर ऐसी जगह पर जाएं जहां ठंडक हो. अगर किसी काम के लिए गर्मी में बाहर जाना जरूरी हो तो कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए. बाहर जाने से पहले हल्के रंग के कपड़े पहनें और जो ढीले हों, ताकि शरीर को पर्याप्त हवा मिल सके. इसके अलावा बाहर जाते वकत कैप पहनें या फिर छाता लेकर चलें.

खुद को हाइड्रेट रखें
गर्मी के मौसम में खुद को ज्यादा से ज्यादा हाइड्रेट रखें और तरल पदार्थों जैसे पानी या या ओआरएस का इस्तेमाल करें. अत्यधिक गर्मी आपके इलेक्ट्रोलाइट्स को खत्म कर सकती है जिससे निर्जलीकरण हो सकता है और हीटस्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है.अगर आप बाहर काम कर रहे हैं, तो सामान्य मात्रा के मुकाबले 1 से 2 लीटर पानी ज्यादा पिएं. कैफीन और अल्कोहल से बचें क्योंकि ये आपके शरीर से तरल पदार्थ निकाल देते हैं.

लक्षण पहचानने के बाद डॉक्टर से परामर्श लें
जब आप हीटस्ट्रोक के लक्षणों को पहचान लें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें. पैरामेडिक्स के आने तक छायादार क्षेत्र में रहें. बीमार शख्स को पर्याप्त हवा दें. उनकी स्किन को गीला करने के लिए पानी या गीले कपड़े का प्रयोग करें. इसके लिए एक नम कपड़े का उपयोग करें और इसे उनकी गर्दन, कमर, बगल और पीठ पर लगाएं. गौरतलब है कि वृद्ध रोगियों, छोटे बच्चों या पुरानी बीमारी वाले लोगों के लिए बहुत ठंडे पानी या बर्फ का उपयोग न करें.

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