केरल : निपाह संक्रमण से 20 महीने से कोमा में पड़े पुरुष नर्स को मिलेंगे 17 लाख रुपये
केरल सरकार ने निपाह संक्रमण की वजह से कोमा में चल रहे पुरुष नर्स के लिए 17 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं.

Published : August 14, 2025 at 1:36 PM IST
कोझिकोड: ड्यूटी के दौरान निपाह वायरस से संक्रमित हो जाने की वजह से 20 महीने से अधिक समय से कोमा में चल रहे पुरुष स्टाफ नर्स के लिए राज्य सरकार ने 17 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं.
बता दें कि 24 वर्षीय स्टाफ नर्स टीटो थॉमस ड्यूटी के दौरान निपाह वायरस से संक्रमित हो गईं थीं. इसके बाद से वह 20 महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कोमा में है. इसको देखते हुए केरल सरकार ने 17 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है.
यह निर्णय हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. इसके तहत मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष से यह राशि स्वीकृत की गई. मैंगलोर के मरदाला के मूल निवासी टीटो ने बीएससी नर्सिंग की डिग्री पूरी करने के तुरंत बाद अप्रैल 2023 में कोझीकोड के इकरा अस्पताल में नौकरी शुरू की थी.
30 अगस्त 2023 को अस्पताल में भर्ती एक संक्रमित मरीज की देखभाल करते समय उसे निपाह वायरस का संक्रमण हो गया. हालांकि शुरुआत में वो ठीक हो गया था, लेकिन दिसंबर में तेज सिरदर्द के बाद उसकी सेहत बिगड़ गई.
इसके बाद वह 8 दिसंबर को वो कोमा में चला गया. बाद में पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान में किए गए परीक्षणों से पुष्टि हुई कि वे लेटेंट एन्सेफलाइटिस से पीड़ित था, जो एक दुर्लभ तंत्रिका संबंधी जटिलता है जिससे बेहोशी, दौरे और लंबे समय तक कोमा हो सकता है.
तभी से टीटो बिस्तर पर है और गतिहीन हैं, उसे केवल नली के माध्यम से तरल भोजन दिया जा रहा है. इकरा अस्पताल में एक विशेष मेडिकल बोर्ड उनके इलाज की निगरानी कर रहा है, लेकिन डॉक्टरों ने कहा है कि उनके ठीक होने की संभावना बहुत कम है. इसके बावजूद, उनका परिवार उम्मीद पर कायम है.
उनके पिता, टी.सी. थॉमस ने सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे खुशी है कि सरकार ने हमारे अनुरोध पर विचार किया है. इस राशि से हमें अपने बेटे को इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में भेजने में मदद मिलेगी."
टीटो की मां, एलिया, और भाई, शिजो थॉमस, हमेशा उसके साथ रह रहे हैं. शिजो ने टीटो की पूरी तरह से देखभाल करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी और हाल ही में फिर से काम पर लौटे हैं.
यह परिवार, जो पहले रबर टैपिंग करके गुजारा करता था, अब मरदाला स्थित अपना घर बंद करके अस्पताल के पास कोझिकोड में रहने आ गया है. वे अपने लंबे भावनात्मक और आर्थिक संघर्ष के बीच सरकारी सहायता को जीवन रेखा मानते हैं.
इकरा अस्पताल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और टीटो के इलाज का एक बड़ा खर्च उठाया है. टी.सी. थॉमस ने कहा, "हम इसके लिए अस्पताल प्रबंधन के भी विशेष रूप से आभारी हैं." अपनी बीमारी से पहले, टीटो ने अपने मरीजों के प्रति असाधारण समर्पण दिखाया था.
उन्होंने अपने परिवार की मामूली कमाई से अपनी नर्सिंग की शिक्षा का खर्च उठाया था और अपने पेशे के प्रति समर्पित थे. यद्यपि उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, लेकिन सरकार के हस्तक्षेप से परिवार को आगे के उपचार विकल्पों की तलाश करने की उम्मीद फिर से जगी है.
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