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बच्चे के दिल में छेद, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मिला उपचार

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Published : May 16, 2021, 7:13 PM IST

भरतपुर के डीग में दिल में छेद की बीमारी से जूझ रहे राजीव का केंद्र सरकार की योजना राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत निशुल्क ऑपरेशन किया गया है. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत हार्ट की बीमारी से ग्रसित इन बच्चों की अलग-अलग प्राइवेट हॉस्पिटलों में निशुल्क सर्जरी की जा चुकी है.

भरतपुर हिंदी न्यूज, Bharatpur Hindi News
राजीव का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हुआ निशुल्क ऑपरेशन

डीग (भरतपुर). दिल में छेद की बीमारी से जूझ रहे राजीव के लिए केंद्र सरकार की योजना राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) वरदान साबित हुई है. गरीब परिवार के बच्चों में हो रही जन्मजात बीमारी के चलते सालों से परेशान हो रहे पीड़ित बच्चों को अब योजना में राहत मिल रही है.

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत हार्ट की बीमारी से ग्रसित इन बच्चों की अलग-अलग प्राइवेट हॉस्पिटलों में निशुल्क सर्जरी की गई है. डीग अंतर्गत गांव नाहरौली के रहने वाले राजीव (7) पैदाइशी दिल में छेद की बीमारी का शिकार था. इस बीमारी को वीएसडी (वेंट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट) कहते हैं. उसे बचपन से ही सांस की समस्या रहती थी, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से परिवार वाले उसका इलाज नहीं करा पा रहे थे.

नाहरौली के आंगनबाडी सैकंड में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बीमारी से ग्रसित मिलने पर आरबीएसके में पंजीयन होने के बाद जयपुर के संतोबका दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पीटल में उसका ऑपरेशन किया गया. बच्चा अब स्वस्थ है.

आंगनबाड़ी, मदरसा या स्कूल में पंजीकृत ऐसे बच्चों की होती है निशुल्क सर्जरी

आरबीएसके चिकित्सक डॉ. सुरेश लवानियां ने बताया कि राजीव जन्मजात दिल में छेद की बीमारी से ग्रसित था. उसके पिता महंगा इलाज कराने में असमर्थ थे. आरबीएसके के तहत अब उसका निशुल्क ऑपरेशन हुआ है. इस योजना में वे सभी बच्चे कवर होते हैं, जो किसी आंगनबाड़ी, मदरसा या स्कूल में पंजीकृत हैं. सरकार ने सभी बड़े हॉस्पिटलों से इसके लिए अनुबंध किया हुआ है, जहां ऐसे बच्चों की निशुल्क सर्जरी की जाती है. पूर्व में अब तक आरबीएसके के अंतर्गत करीब आधा दर्जन बच्चों की निःशुल्क सर्जरी की जा चुकी है. अब वे आम बच्चों की तरह खेलकूद सकते हैं और अब वह सामान्य जीवन जी पा रहे हैं.

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डॉक्टर्स ने जयपुर की कहा, तो आड़े आई धन की कमी

नाहरौली निवासी राजीव के पिता राकेश कपड़ा सिलाई का कार्य कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं. राकेश बताते हैं कि एक दिन उन्हें लगा कि बच्चे की सांसे फूल रही हैं. जिसके बाद वो बच्चे को भरतपुर एक निजी हॉस्पिटल में ले गए. स्वास्थ्य परीक्षण के बाद चिकित्सकों ने जांच के लिए उसे जयपुर ले जाने को कहा. ऐसे में बच्चे के उपचार में परिवार के लिए धन की कमी आड़े आ गई. बच्चे के गांव के ही आंगनबाडी केन्द्र में रजिस्टर्ड होने से आरबीएसके में पंजीयन होने के बाद जयपुर के संतोबका दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल में उसका निःशुल्क ऑपरेशन किया गया है.

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