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Jharkhand Politics: 2024 विधानसभा चुनाव की तैयारी झारखंड में शुरू, पार्टी गिले-शिकवे भुलाकर नेताओं की घर वापसी कराने में जुटी

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Published : Apr 13, 2023, 4:36 PM IST

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा और झामुमो दोनों अपने रूठे हुए नेताओं को मनाने में लगे हुए हैं. झामुमो ने सिदो-कान्हू जयंती के दिन हेमलाल मुर्मू की घर वापसी करवाई थी.

Godda MP Nishikant Dubey
गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे

गोड्डा:चुनाव पूर्व जो राजनीतिक हलचल होती है, उसका नजारा देखने को मिलने लगा है. हर दल अपने कुनबा को ठीक करने में लग गया है. एक तरफ झामुमो ने संथाल परगना में अपने दो नेता पूर्व मंत्री रहे हेमलाल मुर्मू और गोड्डा के प्रेम नंदन मंडल की झामुमो में घर वापसी करवाई. बीजेपी भी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर खुद को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है.

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रूठे हुए नेताओं को मनाने में जुटी भाजपा:झामुमो जैसे ही अपने नेताओं की घर वापसी कराने में जुट गया है. बीजेपी भी अपने रूठे हुए नेताओं को मनाने में लग गई है. ऐसा ही कुछ नजारा गुरुवार (13 अप्रैल) को देखने को मिला. पार्टी से निष्कासत नेताओं को मनाना शुरू कर दी है. नेताओं को निलंबन मुक्त करते हुए फिर से पार्टी में बुला लिया गया है. बीजेपी के वैसे नेता जो लगातार अपनी ही पार्टी के नेता और नीति के खिलाफ आग उगल रहे थे, उन्हें मना लिया गया है. इन नेताओं ने एक बेरोजगार मोर्चा गठित कर अपनी ही पार्टी नेताओं पर कई सवाल खड़े किये थे. इनमें ज्यादातर नेता युवा मोर्चा व युवा ब्रिगेड के थे. जिनकी स्थानीय स्तर पर अच्छी पहचान थी. ऐसे में पार्टी ने संभवतः आगामी चुनावी वर्ष के मद्देनजर सारे गीले सिकवे भुला कर इन्हें निलम्बन मुक्त कर दिया है.

इन्हें किया गया निलंबन मुक्त:भाजपा के शुभम मंडल, पूर्व प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी किशान मोर्चा, संतोष कुमार मंडल पूर्व जिला अध्यक्ष युवा मोर्चा गोड्डा, दीपक साह पूर्व प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी ओबीसी मोर्चा, संतोष भगत पूर्व मंडल अध्यक्ष पोड़ैयाहाट, बीपी आर्या पूर्व कार्यकर्ता, प्रणव कु सिंह पूर्व जिला कार्यसमिति सदस्य गोड्डा का नाम शामिल है.
इन्हें प्रदेश महामंत्री व कार्यलय प्रभारी डॉ प्रदीप वर्मा ने पत्र जारी कर निलंबन मुक्त किया है. ऐसे में हर दल में ये खेल शुरू हो गया है. अगर नेता रूठे हुए है तो उनको मनाया जा रहा है. वहीं निष्कासित नेताओं को फिर से पार्टी में शामिल करने की परिपाटी चलन में आ गई है.

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