पूर्व सैनिक के पक्ष में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र की याचिका की खारिज, बोले- "सेना में सेवा के दौरान बीमारी पर पेंशन का हक"
सेना में सेवा के दौरान हुई बीमारी पर हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक को दिव्यांगता पेंशन का हक दिया. 20 प्रतिशत दिव्यांगता 50 प्रतिशत की.
Published : August 26, 2026 at 10:08 AM IST
पंचकूला: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सेना से 1989 में डिस्चार्ज पूर्व सैनिक भूपिंदर सिंह को दिव्यांगता पेंशन देने के मामले में केंद्र सरकार की चुनौती खारिज कर दी है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सैनिक को भर्ती के समय चिकित्सकीय रूप से फिट पाया गया था और सेवा के दौरान उसे बीमारी हुई तो कानून के तहत बीमारी को सैन्य सेवा से संबंधित मानने का अनुमान उसके पक्ष में जाएगा. कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की बिना ठोस आधार वाली रिपोर्ट पूर्व सैनिक के दिव्यांगता पेंशन के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकती. यह फैसला जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने सुनाया.
मेडिकल परीक्षण में बीमारी से पीड़ित नहीं: दरअसल, पूर्व सैनिक भूपिंदर सिंह को 31 जुलाई 1989 को सेना से डिस्चार्ज किया गया था, जिस दौरान तक उन्होंने 18 वर्ष 215 दिन की सेवा पूरी की थी. जबकि भर्ती के समय 29 दिसंबर 1970 को हुए मेडिकल परीक्षण में वह किसी भी ऐसी बीमारी से पीड़ित नहीं पाए गए थे. लेकिन सेना में सेवा के दौरान उन्हें इस्केमिक हार्ट डिजीज हो गई थी.
दिव्यांगता 50 प्रतिशत राउंड ऑफ का आदेश: सशस्त्र बल न्यायाधिकरण चंडीगढ़ ने छह मई 2024 को भूपिंदर सिंह को दिव्यांगता पेंशन का लाभ देते हुए 20 प्रतिशत दिव्यांगता को 50 प्रतिशत तक राउंड आफ करने का आदेश दिया था. यह लाभ एक अगस्त 1989 से यानिकी सेवा से डिस्चार्ज होने के अगले दिन से दिया गया था. लेकिन केंद्र सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. केंद्र की ओर से दलील दी गई कि मेडिकल परीक्षण में बीमारी को "न तो सैन्य सेवा के कारण और न ही सैन्य सेवा से बढ़ी हुई" माना गया था.
32 वर्ष की देरी के दावे पर आपत्ति:मामले में पेंशन का दावा करीब 32 वर्ष की देरी से किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई. हाईकोर्ट ने एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती के समय सैनिक के फिट पाए जाने और बाद में बीमारी सामने आने की स्थिति में बीमारी के सैन्य सेवा से बढ़ने और उससे संबंधित होने का अनुमान लागू होता है. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि भर्ती के समय बीमारी का कोई रिकॉर्ड नहीं होने पर सैनिक को सेवा में प्रवेश के समय स्वस्थ माना जाएगा और स्वास्थ्य में बाद की गिरावट सेवा के कारण हुई मानी जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला:दिव्यांगता को 20 से 50 प्रतिशत राउंड ऑफ करने के मुद्दे पर कोर्ट ने राम अवतार मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि दिव्यांगता पेंशन के हकदार सशस्त्र बल कर्मी को राउंडिंग ऑफ का लाभ दिया जाना है. खंडपीठ ने कहा कि भर्ती के समय भूपिंदर सिंह फिट थे और बीमारी सेवा अवधि के दौरान सामने आई, नतीजतन उनकी दिव्यांगता को सैन्य सेवा से संबंधित माना जाना होगा. कोर्ट ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार न पाते हुए केंद्र की याचिका खारिज की.