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हरियाणा में स्कूल, फिर भी हिमाचल में पढ़ाई, 150 से ज्यादा बच्चे हर दिन 5 किलोमीटर पैदल चलकर जाते हैं स्कूल

यमुनानगर के 5-6 गांवों के तकरीबन 150 से ज्यादा बच्चे शिक्षकों की कमी और नदी पर पुल नहीं होने से रोज हिमाचल जाकर पढ़ते हैं.

Haryana students studying in Himachal
हरियाणा में स्कूल, फिर भी हिमाचल में पढ़ाई (ETV Bharat)

By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 27, 2026 at 5:37 PM IST

यमुनानगर:यमुनानगर से शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां हरियाणा में स्कूल होने के बावजूद कई गांवों के 150 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई के लिए हिमाचल प्रदेश पहुंच रहे हैं. ये बच्चे रोजाना करीब 5 किलोमीटर पैदल सफर तय कर पलोहड़ी स्थित सरकारी स्कूल पहुंचते हैं. इसका कारण आसपास के हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी बताई जा रही है.

पढ़ाई के लिए कठिन सफर: यमुनानगर के इब्राहीमपुर, महियुद्दीनपुर, नगला, जैतपुर गांव के बच्चे हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती जिले सिरमौर में पढ़ने जाते हैं. अगर हम भौगोलिक दूरी की बारे में बात करें तो इब्राहीमपुर से सिरमौर के स्कूल की दूरी दो किलोमीटर है और बच्चे सड़क मार्ग से चले जाते हैं. लेकिन महियुद्दीनपुर, नगला और जैतपुर के बच्चों को तो नदी पार कर के स्कूल जाना पड़ता है. बरसात के दिनों में तो बोली नदी पार करना और मुश्किल हो जाता है. महियुद्दीनपुर से बच्चों को करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है तो नगल के बच्चों को चार से पांच किलोमीटर और जैतपुर के बच्चों को तो छह से सात किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है.

हरियाणा में स्कूल, फिर भी हिमाचल में पढ़ाई (ETV Bharat)

बच्चों ने बताई अपनी परेशानी:ईटीवी भारत से स्कूल जा रही छात्रा मनप्रीत ने कहा कि, "स्कूल तक पहुंचने के लिए हमें रोज लंबा रास्ता तय करना पड़ता है." वहीं, छात्रा अक्सा और छात्र मोनिश ने भी बताया कि दूरी के बावजूद पढ़ाई जारी रखने के लिए वे हिमाचल के स्कूल जाते हैं. बच्चों के मुताबिक बारिश के दिनों में उनका सफर और मुश्किल हो जाता है.

ये बच्चे रोज हिमाचल जाकर पढ़ते हैं (ETV Bharat)

बारिश आते ही नदी बन जाती है बड़ी बाधा:इन बच्चों की परेशानी सिर्फ दूरी तक सीमित नहीं है. बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर रास्ता बंद हो जाता है. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है. कई बार नदी के रास्ते को पार करने के लिए ग्रामीणों और बच्चों को ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा लेना पड़ता है. इससे अभिभावकों की चिंता भी बढ़ जाती है.

पानी पार कर स्कूल जा रहे बच्चे (ETV Bharat)

स्कूलों में शिक्षकों की कमी:इन बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि सरकार ने गांवों में स्कूलों की इमारतें तो बना दीं, लेकिन पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए. ग्रामीणों के अनुसार आसपास के करीब तीन सरकारी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं. इसी वजह से बच्चों को अपने राज्य से बाहर जाकर शिक्षा हासिल करनी पड़ रही है.अगर इन गांवों के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या के बारे में बात करें तो नगला में सरकारी स्कूल नहीं है. महियुद्दीनपुर, इब्राहीमपुर और जैतपुर में स्कूल है लेकिन तीनों स्कूल में शिक्षकों की कमी है.महियुद्दीनपुर में 1 शिक्षक हैं तो इब्राहीमपुर में 2 और जैतपुर में 4 अध्यापक हैं.

हरियाणा में स्कूल, हिमाचल में पढ़ाई (ETV Bharat)

अभिभावकों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल:अभिभावक इसरान खान ने कहा कि, "अगर हरियाणा के स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक हों तो बच्चों को दूसरे राज्य में पढ़ने जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी." वहीं, हसनदीन ने कहा कि, "नदी पर पुल की व्यवस्था हो जाए तो बारिश के दिनों में बच्चों की परेशानी काफी कम हो सकती है."

ट्रैक्टर से स्कूल जा रहे बच्चे (ETV Bharat)

शिक्षा विभाग ने तबादला नीति को बताया वजह:मामले पर शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षकों की तैनाती में तबादला नीति के कारण कुछ परेशानी आ रही है. शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि, "शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. जल्द स्थिति में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं."

150 से ज्यादा बच्चे हर दिन 5 किमी पैदल चलकर जाते हैं स्कूल (ETV Bharat)

इस पूरे मामले ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. बच्चों में पढ़ने की इच्छा है, स्कूल की इमारतें भी मौजूद हैं, लेकिन शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी उन्हें दूसरे राज्य तक जाने को मजबूर कर रही है.

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