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सुभारती कॉलेज के छात्रों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, लगाया भेदभाव का आरोप

छात्रों ने बताया कि सरकारी कोटे पर उनका सुभारती मेडिकल कॉलेज में दाखिला हुआ था. उनकी मांग है कि राज्य कोटे के अनुसार किसी अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिया जाए. नहीं तो वह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.

सुभारती कॉलेज का मामला
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Published : March 2, 2019 at 8:02 PM IST

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देहरादून: राजधानी स्थित सुभारती मेडिकल कॉलेज का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब छात्रों और अभिभावकों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उनकी मांग है कि एमसीआई के निर्धारित मानकों के मुताबिक, सुभारती मेडिकल कॉलेज के छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटे के तहत दाखिला दिया जाए.

सुभारती मेडिकल कॉलेज के छात्रों के भविष्य पर गहराया संकट.

बता दें कि 2 साल पहले एमसीआई ने सुभारती मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था. इस दौरान एमसीआई टीम ने कॉलेज में तमाम खामियां पाई थी और सुभारती मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी. जिसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज को सील करने के आदेश के साथ ही राज्य सरकार को कॉलेज का अधिग्रहण कर खुद संचालन करने को कहा था.

शनिवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए कॉलेज के छात्रों ने बताया कि सरकारी कोटे पर उनका सुभारती मेडिकल कॉलेज में दाखिला हुआ था. उनकी मांग है कि राज्य कोटे के अनुसार किसी अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिया जाए. नहीं तो वह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.

वहीं, अभिभावकों का कहना है कि पिछले 4 महीने से उनके बच्चे घर पर बैठे हुए हैं. इस मामले में उन्हें बस हर जगह से कोरा आश्वासन ही मिल रहा है. मैनेजमेंट कोटे वाले छात्रों को सरकारी कॉलेज में एडजस्ट करने के बाद अब राज्य कोटे वाले छात्रों को प्राइवेट कॉलेज दिया जा रहा है. जबकि, नियमानुसार पहले राज्य कोटे के छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलना चाहिए. उन्होंने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है.

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Intro:सुभारती मेडिकल कॉलेज का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुभारती मेडिकल कॉलेज के छात्रों और अभिभावको ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्रों और अभिभावकों की मांगे है कि एमसीआई के निर्धारित मानकों के अनुसार सुभारती मेडिकल कॉलेज के छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटे के तहत दाखिला दी जाए। इसके साथ ही दूसरे साल के छात्रों को दोबारा से पहले साल की परीक्षा ना कराई जाए।


Body:आपको बता दे कि 2 साल पहले एमसीआई ने सुभारती मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। और उस दौरान सुभारती मेडिकल कॉलेज की तमाम खामियां पाई गई थी। जिसके बाद इन खामियों के आधार पर एमसीआई ने सुभारती मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी। मान्यता रद्द होने के बाद सुभारती मेडिकल कॉलेज का प्रबंधक सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। और सटे ले लिया था। जिसके बाद पिछले साल याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुभारती मेडिकल कॉलेज को सील करने के आदेश दिए थे और राज्य सरकार को सुभारती मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण कर खुद संचालन करने को कहा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एमबीबीएस छात्रों को अन्य कार्यों में शिफ्ट करने को निर्देश दिया है।

शनिवार को देहरादून स्थित प्रेस क्लब में सुभारती मेडिकल कॉलेज के तमाम छात्र व अभिभावक पहुचे। जहां छात्रों ने बताया कि इन तमाम छात्रों का सरकारी कोटे पर सुभारती मेडिकल कॉलेज में दाखिला हुआ था। और हमारा पूरा हक है कि हमे राज्य कोटे के अनुसार किसी अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिया जाए। और अगर नही दिया गया तो वो उच्च न्यायालय की मदद लेंगे, और हर तरीके से इसका बहिष्कार करेंगे। साथ ही बताया कि अगर किसी बच्चे के साथ कोई भी दुर्घटना होती है तो उसका पूरा जिम्मेदार राज्य सरकार होगी।

बाइट - छात्र (सुभारती मेडिकल कॉलेज)

वहीं छात्रों के अभिभावकों ने बताया कि सारे छात्र पिछले 4 महीने से घर बैठे हुए हैं ऐसे में बच्चे और अभिभावक दोनों परेशान हैं। और इस मामले को लेकर सभी जगह चले गए है लेकिन कही से कोई आश्वासन नहीं मिला। इस मामले को अधिवक्ता तोड़- मरोड़ रहे है। मैनेजमेंट कोटे वाले छात्रों को सरकारी कॉलेज में अर्जेस्ट कर अब राज्य कोटे के छात्रों को प्राइवेट कॉलेज में अर्जेस्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन राज्य के संवैधानिक अधिकार के अनुसार पहले राज्य कोटे के छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलना चाहिए। साथ ही सरकार से निवेदन किया कि हमारी बातो को सुनकर गौर करे और छात्रों के हित में निर्णय ले।

बाइट - भागवत कंसवाल (अभिभावक)

पीटीसी - रोहित सोनी






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