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मेडिकल कॉलेज के बंद होने से छात्र-छात्राओं में आक्रोश, भूख हड़ताल की दी चेतावनी

छात्र छात्राओं का आरोप है कि सरकार उन्हें अन्य निजी मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर रही है, लेकिन दूसरे कॉलेज प्रशासन ने उनसे 15 से 20 लाख रुपए फीस की मांग कर मेडिकल शिक्षा को नए सिरे से शुरू करने की बात कही है. ऐसे में छात्र-छात्राओं के द्वारा सुभारती मेडिकल कॉलेज में जमा की गई फीस सहित 2 साल बर्बाद होने की बात कही जा रही है.

विरोध करते छात्र- छात्राएं.
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Published : March 9, 2019 at 1:27 PM IST

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देहरादून: प्रेम नगर क्षेत्र स्थित सुभारती मेडिकल कॉलेज के बंद होने से छात्र-छात्राओं के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बदहाल व्यवस्था और अनियमिताओं के चलते सुभारती कॉलेज को बंद करने का आदेश दिया और कॉलेज का संचालन राज्य सरकार को सौंप दिया था. लेकिन, अब सुभारती कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने राज्य सरकार के खिलाफ ही क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है.

विरोध करते छात्र- छात्राएं.

छात्र छात्राओं काआरोप है कि सरकार उन्हें अन्य निजी मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर रही है, लेकिन दूसरे कॉलेज प्रशासन ने उनसे 15 से 20 लाख रुपए फीस की मांग कर मेडिकल शिक्षा को नए सिरे से शुरू करने की बात कही है. ऐसे में छात्र-छात्राओं के द्वारा सुभारती मेडिकल कॉलेज में जमा की गई फीस सहित 2 साल बर्बाद होने की बात कही जा रही है.

क्रमिक अनशन पर बैठे छात्राओं का आरोप है कि अपने साथ इस तरह की ज्यादती को लेकर वह लोग शासन-प्रशासन का दरवाजा खटखटा चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है. ऐसे में अब छात्र-छात्राओं के पास अनशन में बैठने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा. अनशन पर बैठे छात्रों का कहना है कि अगर सरकार उनके संवैधानिक अधिकार नहीं दिला पाई तो वह आने वाले दिनों में भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होंगे.

Intro:देहरादून : प्रेम नगर क्षेत्र के नंदा चौकी स्थित सुभारती मेडिकल कॉलेज बंद होने के बाद वहां मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं का भविष्य में संकट के बादल नजर आ रहे हैं। भारी अनियमितताएं और लंबे समय बदहाल व्यवस्था के चलते हैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुभारती कॉलेज को बंद कर राज्य सरकार के हवाले किया गया है ऐसे में उत्तराखंड सरकार ने भले ही कॉलेज को अपने अधीन ले लिया हो लेकिन उसे व्यवस्थित तरीके से चलाने में असमर्थता जैसे विषय के आगे आने के बाद कॉलेज में पढ़ने वाले सामान्य श्रेणी सहित sc.st.obc जैसे सैकड़ो छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर पर लटक नजर आ रहा है। अपने भविष्य को अंधकार में देखते हुए सुभारती कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करने वाले तमाम छात्र छात्राएं सरकार की उदासीनता के चलते परेड ग्राउंड के बाहर क्रमिक अनशन पर बैठ गए हैं।

छात्र छात्राओं का आरोप है कि सरकार उन्हें अन्य निजी मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरण कर रही है, लेकिन दूसरे कॉलेज प्रशासन उनसे 15 से 20 लाख रुपए फीस की मांग कर मेडिकल शिक्षा को नए सिरे शुरू करने की बात कर रहा है, ऐसे में उनके द्वारा सुभारती मेडिकल कॉलेज में जमा की गई फीस सहित उनके 2 साल की पढ़ाई व्यर्थ हो रही हैं। क्रमिक अनशन पर बैठे छात्राओं का आरोप है कि अपने साथ इस तरह की ज़्यादती को लेकर वह लोग शासन-प्रशासन का दरवाजा खटखटा चुके हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में अब छात्र छात्राओं के पास अनशन में बैठने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। अनशन पर बैठे छात्रों का कहना है कि अगर सरकार उनके संवैधानिक अधिकार नहीं दिला पाई तो वह आने वाले दिनों में भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होंगे।


Body:सुभारती मेडिकल कॉलेज बंद होने से आरक्षण कोटे एससी,एसटी ओबीसी व सामान्य श्रेणी के छात्र छात्राओं का कहना है कि उन्हें उत्तराखंड स्थाई प्रमाण पत्र के आधार पर सुभारती मेडिकल कॉलेज में दो वर्ष पूर्व सरकार द्वारा निर्धारित फीस छूट के आधार पर ऐडमिशन दिया गया था। लेकिन आज बदहाल व्यवस्था के कारण कॉलेज बंद होने से उन्हें दूसरे निजी संस्थानों में सरकार द्वारा स्थानांतरण किया जा रहा है, जहां नए सिरे से मेडिकल की पढ़ाई के साथ लाखों रुपए की फीस संस्थानों द्वारा मांग की जा रही है और इस विषय पर सरकार छात्र-छात्राओं की भविष्य को देखते हुए कोई राहत भरा कदम नहीं उठा रही है।

बाइट आकांक्षा रावत, छात्रा सुभारती मेडिकल कॉलेज

बाईट-कौशलेन्द्र शाह, छात्र सुभारती मेडिकल कॉलेज


Conclusion:बहराल जिस तरह से राज्य सरकार मेडिकल शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के साथ प्रदेश के छात्र- छात्राओं के भविष्य को सुधारने के तमाम दावे कर रही है, ऐसे में सुभारती मेडिकल कॉलेज सरकार के अधीन होने के बावजूद वहां शिक्षा ग्रहण करने वाले प्रदेश के तमाम छात्र-छात्राओं को मेडिकल क्षेत्र में पीछे धकेलने जैसा काम करती नजर आ रही है।