जोधपुर के विशाल का अनूठा खजाना, 380 प्रकार के सिक्कों से लेकर इन नोटों का है कलेक्शन
जोधपुर के विशाल चटवानी के पास भारतीय नोटों और सिक्कों का नायाब संग्रह है. उनके कलेक्शन में (Vishal Chatwani Indian currency collection) आजादी से पहले से लेकर अब तक के जारी हुए करेंसी और विशेष दिवष पर जारी होने वाले सिक्के भी मौजूद हैं. पढ़िए विशाल के इस अनोखे शौक के बारे में...
जोधपुर. कई लोगों को पुरानी वस्तुएं या यूनिक चीजें एकत्रित करने का शौक होता है. कोई स्टैम्प का कलेक्शन करता है तो कोई स्टोन्स का. किसी के पास घड़ियों का कलेक्शन है तो किसी के पास किताबों का. ऐसा ही शौक रखते हैं जोधपुर के विशाल चटवानी, जिनके पास पुराने-नए नोट और सिक्कों का नायाब कलेक्शन है. विशाल के संग्रह में आजादी के पहले से लेकर अभी तक के नोट और जोधपुर रियासत के 350 से ज्यादा तरह के सिक्के मौजूद हैं.
भारतीय नोटों में समय के साथ लगातार बदलाव होते रहे हैं. कुछ नोट चलन से बाहर भी हो गए हैं. इनमें खास तौर से 1 और 2 रुपए के नोट तो अब नजर भी नहीं आते हैं. जोधपुर के विशाल चटवानी के पास भारतीय नोटों का खास कलेक्शन है. उन्होंने बताया कि उनके संग्रह में आजादी के पहले से लेकर अभी तक के 1 रुपए के 59 तरह के नोट, 2 रुपए के 36 तरह के नोट, 5 रुपए के 20 तरह के नोट, 10 रुपए के 16 तरह के नोट, 20 रुपए के 8 तरह के नोट, 50 रुपए के 9 तरह के नोट और 12 तरह के 100 रुपए के नोट हैं.
विशाल का कहना है कि उनके पिताजी का एंटीक ज्वेलरी का काम है. ऐसे में बचपन से ही उन्हें इस तरह की चीजों को एकत्र करने का शौक था. विशाल के अनुसार वो करीब 20 साल से लगातार संग्रहण कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि जब काफी कलेक्शन हो गया तो विचार आया अपनी एक गैलेरी बनाने का. उनका कहना है कि ये भारत का इतिहास है, जिसकी जानकारी आज की युवा पीढ़ी और बच्चों तक पहुंचनी चाहिए.
जोधपुर रियासत के 350 से ज्यादा तरह के सिक्के : विशाल के पास जोधपुर रियासत की ओर से आजादी से पहले तक जारी किए गए 350 से अधिक प्रकार के सिक्कों का संग्रहण है. यह सिक्के तांबे और चांदी के बने हुए हैं. उन्होंने बताया कि आजादी से पहले जोधपुर रेलवे ने 1936 में अपना विशेष कॉइन जारी किया था, इनमें से एक पर महाराजा हनवंत सिंह और दूसरे में महाराजा उमेद सिंह का चित्र उकेरा गया था. ये भी उनके कलेक्शन में शामिल हैं.

सबसे रोचक एक रुपए के नोट का संग्रह : विशाल के बताया कि सबसे पहले 1949 में भारत सरकार ने एक रुपए का नोट छापा था. इसके बाद लगातार यह नोट छपते रहे. इसका रूप भी बदला. एक रुपए के नोट पर भारत के वित सचिव के हस्ताक्षर होते हैं. आज एक रुपए के नोट के बंडल की कीमत 15 हजार रुपए है. इसे बहुत रेअर नोट माना जाता है. अब तक 59 तरह के नोट छापे गए हैं, जो विशाल के संग्रह में मौजूद हैं. 1994 में एक रुपए के नोट की छपाई पूरी तरह से बंद हो गई थी. 2015 में सरकार ने फिर छापने की घोषणा की थी. 2020 में फिर नया एक रुपए जारी करने का गजट जारी हुआ था, लेकिन बाजार में अभी भी एक रुपए का नोट नजर नहीं आता है.
380 तरह के भारतीय सिक्के : देश में किसी जमाने में एक आना, दो आना जैसे सिक्कों का चलन हुआ करता था. इसके बाद पांच पैसे, दस पैसे, बीस पैसे, चवन्नी, अठन्नी, एक रुपए व दो रुपए, पांच रुपए व दस रुपए के सिक्के उतारे गए. विशाल के पास ऐसे अब तक के 380 तरह के सिक्के हैं. इसके अलावा विशेष दिवस पर जारी होने वाले सिक्के भी उनके संग्रह में हैं.
विशाल का कहना है कि उन्होंने दुनिया में सबसे ज्यादा विविधता हमारे देश में है, इसलिए अपने संग्रह में भारतीय करेंसी को ही महत्व दिया है. वे बताते हैं कि उनके पास 500 तरह के तांबे के सिक्के भी हैं, जिनका कभी चलन हुआ करता था. विदेशी संग्रहण में अमेरिका में एक बार सभी स्टेट के सिक्कों का विशेष कलेक्शन जारी हुआ, जो उन्होंने सहेज कर रखा है. इसके अलावा स्व प्रिंसेस डायना की याद में जारी कॉइन भी उनके पास हैं.
स्टार सीरीज नोट भी संग्रह में : नोटों की छपाई के दौरान जब कोई मिस प्रिंटिंग होती है तो उस बंडल को दुबारा छापना रिजर्व बैंक के लिए बहुत महंगा पड़ता है. ऐसे में स्टार सीरीज का उपयोग होता है. नोट के नंबर के आगे स्टार लगा होता है, जो किसी बंडल का मिसप्रिंट नोट की जगह लेता है. कई बार जानकारी के अभाव में उसे नकली समझा जाता है, लेकिन रिजर्व बैंक ने इसे चलन में उपयोगी माना है. विशाल के पास ऐसे कई मिसप्रिंट नोट व स्टार सीरीज के भी नोट हैं.

कभी खादी के लिए हुंडी लेनी पड़ती थी : विशाल के मुताबिक आजादी के बाद खादी का भी संकट था, इसलिए खादी ग्रामोद्योग कमीशन ने खादी की खरीद सीधे करने के बजाय हुंडी की अनिवार्यता लागू की थी. इसके लिए कमीशन ने दो रुपए, पांच रुपए, दस रुपए और बीस रुपए की हुंडी जारी की थी. हुंडी बिलकुल किसी नोट की तरह होती थी, जो हैंड मेड पेपर की बनती थी.


