डीजीपी ने बूढ़ा पहाड़ पर फहराया तिरंगा, जवानों का बढ़ाया हौसला
सुरक्षाबलों द्वारा पिछले 15 दिनों से चलाए जा रहे 'मिशन बूढ़ा पहाड़'(Mission Boodha Pahad ) को आज सफलता मिल गई. झारखंड पुलिस ने अपने अदम्य शौर्य और साहस के बल पर बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त करवा लिया है. इस मौके पर डीजीपी नीरज सिन्हा ने वहां खुद तिरंगा फहराया और सीआरपीएफ के जवानों से मिलें.

रांची: कई दशकों से झारखंड पुलिस के लिए चुनौती बने बूढ़ा पहाड़ को आखिरकार झारखंड पुलिस ने अपने अदम्य शौर्य और साहस के बल पर नक्सलियों से मुक्त करवा लिया है (Boodha Pahad is Free From Naxalite). बूढ़ा पहाड़ से नक्सलियों को खदेड़ने वाले अपने वीर जवानों से मुलाकात करने स्वयं डीजीपी नीरज सिन्हा रविवार को बूढ़ा पहाड़ पहुंच गए. यह पहली बार है जब राज्य का कोई डीजीपी बूढ़ा पहाड़ पहुंचा और वहां शान से तिरंगा भी फहराया. डीजी नीरज सिन्हा के साथ बूढ़ा पहाड़ से नक्सलियों को खदेड़ने की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले एडीजी संजय आनंद लाटकर और आईजी अमोल वेणुकान्त होमकर भी बूढ़ा पहाड़ पहुंचे.
यह भी पढ़ें: मिशन बूढ़ा पहाड़: कैम्प और कम्युनिकेशन को मजबूत कर रहे सुरक्षाबल, टॉप पर फहराया तिरंगा
डीजीपी ने फहराया तिरंगा: झारखंड पुलिस के वीर जवानों ने बूढ़ा पहाड़ पर चल रहे 'आपरेशन ऑक्टोपस' को सफल बनाते हुए नक्सलियों के लिए सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले बूढ़ा पहाड़ से ही उन्हें खदेड़ दिया है. झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने बेहतरीन कार्रवाई करते हुए बूढ़ा पहाड़ पर पुलिस के कब्जे के सपने को पूरा कर दिया. अपने जवानों के इस अदम्य साहस से गदगद डीजीपी अपने प्रमुख रणनीतिकार एडीजी अभियान और आईजी अभियान के साथ रविवार को बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. बूढ़ा पहाड़ पर पहुंचने के बाद डीजीपी नीरज सिन्हा ने अभियान में शामिल जवानों से मुलाकात की और फिर उनके साथ बूढ़ा पहाड़ की सबसे ऊंची पहाड़ी पर तिरंगा फहराया. डीजीपी अपने साथ जवानों के लिए फल और ड्राई फ्रूट्स भी ले गए थे. उन्होंने अभियान में शामिल जवानों के बीच उसे बांटा.
ग्रामीणों से मिले डीजीपी: जवानों का हौसला बढ़ाने के बाद डीजीपी सिन्हा, एडीजी लाटकर और आईजी होमकर ने बूढ़ा पहाड़ के घने जंगलों में बसे ग्रामीणों से भी मुलाकात की. इस दौरान डीजीपी अपने साथ ग्रामीणों के लिए भी कई सौगातें लेकर गए थे जो उन्होंने उनके बीच बांटा.
नक्सलियों का सबसे सुरक्षित गढ़ था बूढ़ा पहाड़: झारखंड समेत तीन राज्यों में माओवादियों के मुख्यालय के तौर पर बूढ़ापहाड़ का इस्तेमाल पिछले तीन दशक से हो रहा था. 1990 से ही घोर नक्सल प्रभाव वाला इलाका रहा बूढ़ापहाड़ झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के माओवादियों के लिए बड़ा आश्रय स्थल था. केंद्रीय गृह मंत्रालय के टास्क पर काम करते हुए झारखंड पुलिस ने 32 साल से माओवादी गतिविधियों के केंद्र रहे बूढ़ापहाड़ को नक्सल मुक्त करा लिया है.
ऑपरेशन बूढ़ापहाड़ को नक्सलमुक्त कराने के लिए अंतिम चरण में पुलिस और सीआरपीएफ ने ऑपरेशन ऑक्टोपस चलाया था. इस ऑपरेशन को पूरी सफलता शुक्रवार को मिली, जब पहली बार बूढ़ा पहाड़ पर मिग हेलीकॉप्टर उतारा गया. अब बूढ़ापहाड़ पर आधे दर्जन से अधिक कैंप बना दिए गए हैं. नदी, नालों पर पुल बांध दिए गए हैं. बूढ़ा पहाड़ फिलहाल नक्सलियों से मुक्त है. जवानों की यह कोशिश है कि अब दोबारा इस पहाड़ पर नक्सलियों को न आने दिया जाए.

