केजरीवाल की गाड़ियों पर 1.43 करोड़ खर्च, अब तक के कार्यकाल में कुल चार बार बदले वाहन
सादगी की दुहाई देने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 2014 से लेकर अबतक एक करोड़ 43 लाख 35 हजार 145 रुपये सिर्फ गाड़ियों पर खर्च कर चुके हैं. इसका खुलासा RTI के जरिए हुआ है.
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 2014 में दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक अपनी गाड़ियों की खरीद पर कुल एक करोड़ 43 लाख 35 हजार 145 रुपये खर्च कर चुके हैं. इस पूरी जानकारी का खुलासा विवेक पूनिया द्वारा 30 मई को आरटीआई के माध्यम से पूछे गए सवाल के बाद दिल्ली सरकार के अधिकारी भास्कर प्रियदर्शिनी के द्वारा दिया गया है. मुख्यमंत्री के द्वारा अब तक कुल 4 बार अपनी गाड़ियों को बदला जा चुका है. आरटीआई के माध्यम से जानकारी सामने आने के बाद से ही और बीजेपी के द्वारा अरविंद केजरीवाल पर सवाल उठाते जा रहे है.
राजधानी दिल्ली के अंदर गरमाए सियासी माहौल के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की गाड़ियों पर खर्च की गई राशि की जानकारी आरटीआई के माध्यम से मिलने के बाद से इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है. पहले भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने पूरे मामले पर जानकारी सामने आने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा और अब दिल्ली में बीजेपी की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता हरीश खुराना ने वीडियो बाइट जारी करके दिल्ली के मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली की सत्ता में आए थे तो उन्होंने दिल्ली की जनता से वादा किया था कि ना मैं बंगला लूंगा ना मैं गाड़ी लूंगा लेकिन बीते दिनों लगाई गई आरटीआई का जो जवाब सामने आया उसे स्पष्ट हो गया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के द्वारा गाड़ियों के ऊपर दिल्ली की जनता की गाढ़ी कमाई को पानी की तरह बहाया गया है. मुख्यमंत्री ने अब तक एक करोड़ 43 लाख 35 हजार 135 रुपये अपनी गाड़ियों में फूंके है. जबकि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपनी गाड़ियों को खरीदने के लिए 44 लाख 29 हजार 515 रुपये खर्चे हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आम आदमी पार्टी के वही लोग हैं जो दिल्ली की राजनीति बदलने का दम भरते थे और बड़े-बड़े वादे जनता से करते थे लेकिन आज अपने सभी विवादों को निजी हितों के लिए इन लोगों ने ताक पर रखा हुआ है. यह वहीं लोग हैं जो दूसरे राज्यों की सरकारों पर बेवजह पैसा खर्च कर गाड़ियां खरीदने जाने को लेकर सवाल उठाया करते थे.आज जब इस आरटीआई का जवाब है तो दिल्ली के मुख्यमंत्री चुप क्यों है दिल्ली की जनता जवाब मांग रही है.
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