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SPECIAL: एक दिन में 27 करोड़ का जाम गटक गए छत्तीसगढ़िया, खूब बिकी शराब

4 मई से शराब दुकानों के खुलने से मदिरा प्रेमियों में खासा उत्साह देखने मिला है. ऐसा लग रहा था जैसे लोग इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. इसके लिए शासन ने अच्छी व्यवस्था करवाई थी. जिसमें लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शराब लेते दिखाई दिए.

crowd seen to get wine
शराब लेने उमड़ी भीड़
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Published : May 5, 2020 at 9:09 PM IST

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Updated : May 6, 2020 at 12:20 PM IST

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रायपुर: किसी शायर ने कहा है कि... कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई ....आओ कहीं शराब पिएं रात हो गई...लेकिन लॉकडाउन की वजह से लगी पाबंदी के बाद शराबियों को जैसे इसी सुबह का बेसब्री से इंतज़ार था.. हर रात की तरह इस बेसब्र रात की भी सुबह हुई..और मयखाने में मय के चाहने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी...शराबी इतने सोशल हो गए कि डिस्टेंसिंग की सीमा लांघ गए...अपना कोटा लेने की होड़ मची... और ऐसी हायतौबा हुई कि एक दिन में ही छत्तीसगढ़ में ... करीब 27 करोड़ की शराब बिक गई...।

खुली शराब की दुकानें

कहां-कितनी बिकी शराब

  • प्रदेश में करीब 27 करोड़ की शराब एक दिन में बिकने का अनुमान है.
  • रायपुर जिले में बिकी 2 करोड़ 25 लाख की शराब.
  • दुर्ग जिले में 3.5 करोड़ की शराब बिकी.
  • बिलासपुर जिले में करीब 3 करोड़ की शराब बिकी.
  • राजनांदगांव में 2 करोड़ 76 लाख रुपए की शराब बिकी.
  • धमतरी में 1 करोड़ 48 लाख की शराब बिकी.
  • बेमेतरा जिले में 1.25 करोड़ की शराब बिकी.
  • बलौदा-बाजार जिले में 1.6 करोड़ रुपए की शराब बिकी.
  • कबीरधाम जिले में करीब एक करोड़ की शराब बिकी.
  • कोरबा जिले में 83 लाख रुपए की शराब बिकी.
  • रायगढ़ में 1 करोड़ से अधिक की शराब बिकी.
  • सरगुजा जिले में 64 लाख से अधिक की शराब खरीदी गई.
  • बस्तर जिले में करीब 40 लाख की शराब खरीदी गई.
  • कांकेर में 34 लाख 18 हजार 520 रु की शराब बिकी.
  • जशपुर जिले में 25 लाख रुपए की शराब बिकी.

चिलचिलाती धूप में भी हलक तर करने के लिए लोग जुटे. कम खुशी तो होम डिलीवरी पर भी नहीं है. कहते हैं अच्छा है घर बैठ शराब मिलेगी और कोरोना भी नहीं होगा. कड़ी धूप में खड़े होने से भी बच जाएंगे.

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इधर इन इकॉनॉमी वॉरियर्स को संभालने वाले कोरोना वॉरियर्स के भी पसीने इन्हें संभालने में छूट गए. पुलिसवालों ने कहा कि संभालने में मुश्किल तो हो रही है लेकिन संभल जाएंगे. हालांकि तस्वीरें भयानक रहीं. ऐसा लगा कोरोना इनकी दिलेरी देखकर ही कहीं भाग न जाए.

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वैसे इस बीच कवि हरिवंश राय बच्चन और उनकी कृति मधुशाला बहुत याद की गई. और उनका ये लिखा कि बजी न मंदिर में घड़ियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्ज़िन देकर मस्जिद में ताला, लुटे ख़जाने नरपतियों के गिरीं गढ़ों की दीवारें, रहें मुबारक पीनेवाले, खुली रहे यह मधुशाला. छत्तीसगढ़ के मदिराप्रेमी भी यही चाहते हैं कि ये मधुशाला खुली रहे.

Last Updated : May 6, 2020 at 12:20 PM IST