कृषि कानून की वापसी, यूपी में बहुमत खो चुकी भाजपा का नया दांवः टीएस सिंहदेव
केंद्र सरकार के द्वारा तीनों कृषि कानूनों (agricultural law) को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद कांग्रेस (Congress) की ओर से काफी तीखे हमले शुरू हो गए हैं. कृषि मंत्री रविद्र चौबे (Agriculture Minister Ravindra Choubey) के बाद अब स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव (Health Minister TS Singh dew) ने केंद्र की मोदी सरकार (Modi government at the center) को निशाने पर लिया है.
रायपुरः केंद्र सरकार के द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद कांग्रेस की ओर से काफी तीखे और हमलावर बयानबाजी शुरू हो गई है. कुछ ही देर पहले कृषि मंत्री रविद्र चौबे के बाद अब स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव (Health Minister TS Singh dev) ने केंद्र की मोदी सरकार को लताड़ने में पीछे नहीं रहे. उन्होंने कहा कि यह किसानों के आंदोलन की जीत है और यह जीत आंदोलन के दौरान शहादत देने वाले किसानों को समर्पित है.
उन्होंने कहा कि किसानों का कठोर तपस्या और संघर्ष के बाद सरकार को तीनों काले कानून वापस लेना पड़ा. इतने लोगों की शहादत के बाद सरकार को घुटना टेकना लाजिमी था. उन्होंने कहा कि बिल को बनाने वालों की नीयत साफ नहीं (The intention of those who made the bill is not clear) थी. अगर उनकी नीयत साफ होती, बिल में किसानों का हित होता तो सरकार इसे कतई वापस नहीं लेती.
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चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की थी कोशिश
लेकिन सरकार को यह पता था कि बिल सिर्फ चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ (Benefit to select capitalists) पहुंचाने वाली है. इससे चहेते लोग लाभान्वित होंगे. देश के किसान इसे स्वीकार नहीं करेंगे (will not accept). अंततः कृषि कानून (agricultural law) वापस लेना पड़ा. इसी फैसले को यूपी चुनाव (UP elections) के साथ जोड़ कर देखने के सवाल के जवाब में टीएस सिंहदेव ने बिना नाम लिए कहा कि पंजाब में स्थिति नगण्य है.
हरियाणा बाई इलेक्शन में जमानत जब्त हो गई. उत्तराखंड में आज के दिन हार रहे हैं. यूपी में बड़ा बहुमत खो चुके (Lost big majority in UP) हैं. सरकार ने अपनी एक आखिरी दांव (last bet) खेलने की कोशिश की है. शायत स्थिति कुछ संभल जाए. किसान संगठित हुए, तब कहीं जाकर उन्हें यह सफलता मिली है. कहा कि यह प्रजातंत्र की जीत है. कारण की जबतक सत्ता बदलती नहीं, गलत बिल वापस नहीं लिया जाता, किसानों की समस्या जस की तस बनी रहती.

