क्या ISRO का निजीकरण होगा ?, इसरो चीफ वी. नारायणन ने क्या दिया जवाब ?
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Published : September 7, 2026 at 10:24 PM IST
|Updated : September 7, 2026 at 11:09 PM IST
भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने मीडिया में चल रही कुछ ख़बरों पर अपनी सफाई दी है. भारतीय स्पेस एजेंसी ने कहा है कि उसका प्राइवेटाइजेशन यानी निजीकरण नहीं होगा या किसी तरह की कोई भूमिका भी कम नहीं होगी. मीडिया में पिछले कुछ दिनों से इसरो के निजीकरण का लोकर काफी ख़बरें चल रही थीं. कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा कहा जा रहा था कि सरकार इसरो के मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल काम निजी कंपनियों या पीएसयू को सौंप सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स में IN-SPACe चेयरमैन पवन गोयनका के एक बयान का भी जिक्र हो रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि आगे चलकर लॉन्च व्हीकल बनाने का काम प्राइवेट सेक्टर या पीएसयू करेंगे. 4 सितंबर 2026 यानी कुछ ही दिन पहले इसरो ने करीब आठ महीनों के एक लंबे गैप के बाद GSLV-F17 नाम के अपने एक महत्वपूर्ण रॉकेट के जरिए EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक ऑर्बिट में पहुंचाया. इस लॉन्च के बाद इसरो चीफ वी. नारायणन ने कहा कि देश की स्पेस इकोनॉमी और इकोसिस्टम को बढ़ना होगा क्योंकि अकेले इसरो देश की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता. उन्होंने बताया कि अभी 56 सैटेलाइट हैं लेकिन जरूरत सैकड़ों की है. उन्होंने ये भी कहा था कि सरकार के स्पेस सुधारों का मकसद उद्योग की भागीदारी बढ़ाना है और इसरो इसमें सहयोग दे रहा है.
भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने मीडिया में चल रही कुछ ख़बरों पर अपनी सफाई दी है. भारतीय स्पेस एजेंसी ने कहा है कि उसका प्राइवेटाइजेशन यानी निजीकरण नहीं होगा या किसी तरह की कोई भूमिका भी कम नहीं होगी. मीडिया में पिछले कुछ दिनों से इसरो के निजीकरण का लोकर काफी ख़बरें चल रही थीं. कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा कहा जा रहा था कि सरकार इसरो के मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल काम निजी कंपनियों या पीएसयू को सौंप सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स में IN-SPACe चेयरमैन पवन गोयनका के एक बयान का भी जिक्र हो रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि आगे चलकर लॉन्च व्हीकल बनाने का काम प्राइवेट सेक्टर या पीएसयू करेंगे. 4 सितंबर 2026 यानी कुछ ही दिन पहले इसरो ने करीब आठ महीनों के एक लंबे गैप के बाद GSLV-F17 नाम के अपने एक महत्वपूर्ण रॉकेट के जरिए EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक ऑर्बिट में पहुंचाया. इस लॉन्च के बाद इसरो चीफ वी. नारायणन ने कहा कि देश की स्पेस इकोनॉमी और इकोसिस्टम को बढ़ना होगा क्योंकि अकेले इसरो देश की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता. उन्होंने बताया कि अभी 56 सैटेलाइट हैं लेकिन जरूरत सैकड़ों की है. उन्होंने ये भी कहा था कि सरकार के स्पेस सुधारों का मकसद उद्योग की भागीदारी बढ़ाना है और इसरो इसमें सहयोग दे रहा है.

