गीता महोत्सव में धान से बनी मूर्तियां आकर्षण का केंद्र, देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे हैं शिल्पकार - SCULPTURES MADE OF PADDY
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Published : November 18, 2025 at 11:07 PM IST
|Updated : November 19, 2025 at 12:10 PM IST
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव में धान से बनी मां दुर्गा की प्रतिमाएं लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं. इस महोत्सव में देश के अलग हिस्सों से शिल्पकार पहुंचे हैं. ऐसे ही एक शिल्पकार कृष्णा सिंह पश्चिम बंगाल से इन मूर्तियों को लेकर आए हैं. इन्होंने धान के दाने से मां दुर्गा की अद्भुत मूर्तियां बनाईं हैं.
दुर्गा पूजा में धान काफी शुभ माना जाता है. धान से बनी मां दुर्गा की मूर्ति का विशेष महत्व है. एक मूर्ति को पूरा करने में 6 से 7 दिन लगते हैं. अगर 20–25 मूर्तियाँ तैयार करनी हों तो पूरा परिवार दिन-रात एक कर देता है. इनके लिए ये सिर्फ काम नहीं. बल्कि विरासत हैं. जो इनके परिवारों को सांसों में रचा बसा है. बंगाल के बोलपुर में शांति निकेतन में इस काम से इनके परिवार की पहचान है.
कृष्णा सिंह गीता महोत्सव में पिछले 18 साल से आ रहे हैं. इसके अलावा तमिलनाडु, पंजाब, राजस्थान सहित देश में कई जगहों पर स्टाल लगा चुके हैं.इनको डर है ये कला कहीं लुप्त न हो जाए. क्योंकि नई पीढ़ी इस काम को करना नहीं चाहती.
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव में धान से बनी मां दुर्गा की प्रतिमाएं लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं. इस महोत्सव में देश के अलग हिस्सों से शिल्पकार पहुंचे हैं. ऐसे ही एक शिल्पकार कृष्णा सिंह पश्चिम बंगाल से इन मूर्तियों को लेकर आए हैं. इन्होंने धान के दाने से मां दुर्गा की अद्भुत मूर्तियां बनाईं हैं.
दुर्गा पूजा में धान काफी शुभ माना जाता है. धान से बनी मां दुर्गा की मूर्ति का विशेष महत्व है. एक मूर्ति को पूरा करने में 6 से 7 दिन लगते हैं. अगर 20–25 मूर्तियाँ तैयार करनी हों तो पूरा परिवार दिन-रात एक कर देता है. इनके लिए ये सिर्फ काम नहीं. बल्कि विरासत हैं. जो इनके परिवारों को सांसों में रचा बसा है. बंगाल के बोलपुर में शांति निकेतन में इस काम से इनके परिवार की पहचान है.
कृष्णा सिंह गीता महोत्सव में पिछले 18 साल से आ रहे हैं. इसके अलावा तमिलनाडु, पंजाब, राजस्थान सहित देश में कई जगहों पर स्टाल लगा चुके हैं.इनको डर है ये कला कहीं लुप्त न हो जाए. क्योंकि नई पीढ़ी इस काम को करना नहीं चाहती.

