शिव भक्त सन्नमल्लप्पा की अनोखी कहानी: 22 लाख खर्च कर स्थापित किए एक लाख शिवलिंग - 1 LAKH SHIVA LINGAS IN A VILLAGE

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शिव भक्त सन्नमल्लप्पा की अनोखी कहानी (ETV Bharat)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 14, 2026 at 10:46 PM IST

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कर्नाटक के दावणगेरे के सन्नमल्लप्पा ने 22 लाख रुपये खर्च कर एक लाख शिवलिंग स्थापित किए हैं. यहां कुल 20 शिवलिंग पीठ हैं और हर पीठ में पांच हजार शिवलिंग उकेरे गए हैं. आखिर सन्नमल्लप्पा ने इन शिवलिंगों की स्थापना क्यों की. इसके पीछे एक कहानी है. दरअसल, सन्नमल्लपा कई मुश्किलों का सामना कर रहे थे. तभी सपने में उन्हें शिवलिंग दिखाई दिए. उन्होंने गुरुओं से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने उन्हें शिवलिंग स्थापित करने को कहा.  

ये शिवलिंग आंध्रप्रदेश के अलागड्डा में बनाए गए और वहां से लाकर यहां स्थापित किए गए. सन्नमल्लप्पा कहते हैं कि जब से यहां शिवलिंग स्थापित किए गए, तब से उनकी परेशानी खत्म हो गई.  

ये इलाका पहले महेश्वर तोटा यानी महेश्वर का बगीचा के नाम से जाना जाता था. यहां एक मेला भी लगता था, लेकिन धीरे-धीरे वहां खेत बन गए और मेला बंद हो गया. हालांकि अब भी ये जगह महेश्वर तोटा के नाम से ही जाना जाता है. सन्नमल्लप्पा ने अपने खेत में इस मंदिर का निर्माण कराया है. यहां चारों ओर खेत और जंगल हैं. यहां तक पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं है, जिससे यहां आने वाले लोगों को परेशानी होती है.

कर्नाटक के दावणगेरे के सन्नमल्लप्पा ने 22 लाख रुपये खर्च कर एक लाख शिवलिंग स्थापित किए हैं. यहां कुल 20 शिवलिंग पीठ हैं और हर पीठ में पांच हजार शिवलिंग उकेरे गए हैं. आखिर सन्नमल्लप्पा ने इन शिवलिंगों की स्थापना क्यों की. इसके पीछे एक कहानी है. दरअसल, सन्नमल्लपा कई मुश्किलों का सामना कर रहे थे. तभी सपने में उन्हें शिवलिंग दिखाई दिए. उन्होंने गुरुओं से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने उन्हें शिवलिंग स्थापित करने को कहा.  

ये शिवलिंग आंध्रप्रदेश के अलागड्डा में बनाए गए और वहां से लाकर यहां स्थापित किए गए. सन्नमल्लप्पा कहते हैं कि जब से यहां शिवलिंग स्थापित किए गए, तब से उनकी परेशानी खत्म हो गई.  

ये इलाका पहले महेश्वर तोटा यानी महेश्वर का बगीचा के नाम से जाना जाता था. यहां एक मेला भी लगता था, लेकिन धीरे-धीरे वहां खेत बन गए और मेला बंद हो गया. हालांकि अब भी ये जगह महेश्वर तोटा के नाम से ही जाना जाता है. सन्नमल्लप्पा ने अपने खेत में इस मंदिर का निर्माण कराया है. यहां चारों ओर खेत और जंगल हैं. यहां तक पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं है, जिससे यहां आने वाले लोगों को परेशानी होती है.

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