गांव की जिंदगी को आसान बनाता "लोकल बॉयज", गांवों में एक क्लिक पर खाना और दवा - ANDHRA PRADESH LOCAL BOYS

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गांव की जिंदगी को आसान बनाता "लोकल बॉयज" (ETV Bharat)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 9, 2026 at 8:02 PM IST

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भूख लगी हो, खाना खाना है, मोबाइल में एक क्लिक पर 10 मिनट में खाना हाजिर .कहीं जाना हो, दूसरे क्लिक पर कैब आ गई..शहर की जिंदगी मोबाइल ऐप्स के इर्द-गिर्द घुमती है.लेकिन गांवों को जिंदगी इतनी आसान नहीं. आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के एक लड़के ने गांव के लोगों की जिदंगी को आसान बनाने की कोशिश की है. रामू ने एक मोबाइल ऐप "लोकल बॉयज" बनाया है और एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी जरुरी सेवाएं दे रहे.

रामू नाम के लोकल लड़के ने लोकल बॉयज एप को 2019 में लॉन्च किया था. इन्होंने स्थानीय व्यापारियों के साथ मिलकर एक ऐसा सिस्टम बनाया है. जो बेरोजगार युवाओं को रोजगार दे रहा है. शुरूआत में ये ऐप कंदकुरु और सिंगरायकोंडा में अपनी सर्विसेज देता था. लेकिन अब ये आध्र प्रदेश के कई जिलों में साथ ही तेलंगाना और कर्नाटक में तक फैल गया है. इसके साथ वर्तमान में 101 फ्रेंचाइजी और 16 सौ काम करने वाले डिलिवरी बॉयज जुड़े हुए हैं. लेकिन रामू की ये यात्रा इतनी आसान नहीं थी. माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे. आर्थिक तंगी के बीच ये अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाए. रोजी रोटी के लिए हैदराबाद और विशाखापत्तनम जाना पड़ा. छोटे-मोटे काम किए. लेकिन कमाई ज्यादा नहीं हो पाती थी . फिर वापस गांव लौट आए. लोकल बॉयज ऐप लॉन्च किया और जिंदगी चल पड़ी.

भूख लगी हो, खाना खाना है, मोबाइल में एक क्लिक पर 10 मिनट में खाना हाजिर .कहीं जाना हो, दूसरे क्लिक पर कैब आ गई..शहर की जिंदगी मोबाइल ऐप्स के इर्द-गिर्द घुमती है.लेकिन गांवों को जिंदगी इतनी आसान नहीं. आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के एक लड़के ने गांव के लोगों की जिदंगी को आसान बनाने की कोशिश की है. रामू ने एक मोबाइल ऐप "लोकल बॉयज" बनाया है और एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी जरुरी सेवाएं दे रहे.

रामू नाम के लोकल लड़के ने लोकल बॉयज एप को 2019 में लॉन्च किया था. इन्होंने स्थानीय व्यापारियों के साथ मिलकर एक ऐसा सिस्टम बनाया है. जो बेरोजगार युवाओं को रोजगार दे रहा है. शुरूआत में ये ऐप कंदकुरु और सिंगरायकोंडा में अपनी सर्विसेज देता था. लेकिन अब ये आध्र प्रदेश के कई जिलों में साथ ही तेलंगाना और कर्नाटक में तक फैल गया है. इसके साथ वर्तमान में 101 फ्रेंचाइजी और 16 सौ काम करने वाले डिलिवरी बॉयज जुड़े हुए हैं. लेकिन रामू की ये यात्रा इतनी आसान नहीं थी. माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे. आर्थिक तंगी के बीच ये अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाए. रोजी रोटी के लिए हैदराबाद और विशाखापत्तनम जाना पड़ा. छोटे-मोटे काम किए. लेकिन कमाई ज्यादा नहीं हो पाती थी . फिर वापस गांव लौट आए. लोकल बॉयज ऐप लॉन्च किया और जिंदगी चल पड़ी.

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