नारेबाजी का विवाद: JNU प्रशासन सख्त, छात्रों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की - JNU CHANTING CONTROVERSY
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Published : January 6, 2026 at 7:45 PM IST
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के साबरमती हॉस्टल के बाहर 5 जनवरी 2026 की रात हुए एक कार्यक्रम के दौरान आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी को लेकर विवाद गहरा गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए दिल्ली पुलिस से एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है. इस संबंध में सुरक्षा विभाग ने वसंत कुंज (नॉर्थ) थाने को पत्र भेजा है, जिसमें कुछ छात्र-छात्राओं के नाम भी दर्ज हैं. आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान ऐसे नारे लगाए गए जो उत्तेजक थे और इससे परिसर की शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी. प्रशासन ने इसे जेएनयू की आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए संबंधित धाराओं में कार्रवाई की मांग की है. घटना को लेकर कुछ छात्रों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. नैनो साइंस की पीएचडी छात्रा मनीषा डाबला ने बताया कि यह नारेबाजी सुप्रीम कोर्ट द्वारा शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत न दिए जाने के फैसले के विरोध में की गई. उनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ इस तरह का प्रदर्शन और भाषा संविधान व न्यायपालिका का अपमान है.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के साबरमती हॉस्टल के बाहर 5 जनवरी 2026 की रात हुए एक कार्यक्रम के दौरान आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी को लेकर विवाद गहरा गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए दिल्ली पुलिस से एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है. इस संबंध में सुरक्षा विभाग ने वसंत कुंज (नॉर्थ) थाने को पत्र भेजा है, जिसमें कुछ छात्र-छात्राओं के नाम भी दर्ज हैं. आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान ऐसे नारे लगाए गए जो उत्तेजक थे और इससे परिसर की शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी. प्रशासन ने इसे जेएनयू की आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए संबंधित धाराओं में कार्रवाई की मांग की है. घटना को लेकर कुछ छात्रों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. नैनो साइंस की पीएचडी छात्रा मनीषा डाबला ने बताया कि यह नारेबाजी सुप्रीम कोर्ट द्वारा शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत न दिए जाने के फैसले के विरोध में की गई. उनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ इस तरह का प्रदर्शन और भाषा संविधान व न्यायपालिका का अपमान है.

