छठ पूजा को यूनेस्को की कल्चरल हेरिटेज लिस्ट में लाने की कोशिश, INTACH ने तैयार किए दस्तावेज - लोक आस्था का पर्व छठ
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Published : July 5, 2026 at 9:30 PM IST
लोक आस्था के महापर्व छठ को यूनेस्को इनटेंजिबल कल्चरल हेरिटेड की लिस्ट में शामिल कराने के लिए कोशिशें तेज हो गई हैं. द इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज यानी इनटाक ने करीब दो साल के गहन रिसर्च के बाद इसके लिए दस्तावेज तैयार कर लिए हैं और इसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय को भेज दिया गया है. भारत सरकार मूल्यांकन के लिए दस्तावेजों को यूनेस्को को भेजेगी और इस पर 2027 तक फैसला हो जाएगा.
छठ मुख्य रूप से बिहार का पर्व है. लेकिन यह पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, बंगाल, नेपाल और दुनिया से उन सभी जगहों पर मनाया जाता है, जहां बिहार के लोग रहते हैं.
इनटाक ने बिहार में छठ पूजा के इतिहास, इसके ज्योतिषीय और खगोलीय, मेडिसिनल और पर्यावरण के महत्व से जुड़े पक्षों पर व्यापक दस्तावेज तैयार किए. इसके लिए पटना में एक सेमिनार का आयोजन किया है, जिसमें कई विद्वानों ने अपने रिसर्च पेपर पेश किए, जिनमें से तेरह को एक किताब के रूप में प्रकाशित किया गया. इस किताब में छठ पर्व के जुड़े अलग-अलग भाषाओं के लोकगीतों को भी संकलित किया गया है.
लोक आस्था के महापर्व छठ को यूनेस्को इनटेंजिबल कल्चरल हेरिटेड की लिस्ट में शामिल कराने के लिए कोशिशें तेज हो गई हैं. द इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज यानी इनटाक ने करीब दो साल के गहन रिसर्च के बाद इसके लिए दस्तावेज तैयार कर लिए हैं और इसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय को भेज दिया गया है. भारत सरकार मूल्यांकन के लिए दस्तावेजों को यूनेस्को को भेजेगी और इस पर 2027 तक फैसला हो जाएगा.
छठ मुख्य रूप से बिहार का पर्व है. लेकिन यह पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, बंगाल, नेपाल और दुनिया से उन सभी जगहों पर मनाया जाता है, जहां बिहार के लोग रहते हैं.
इनटाक ने बिहार में छठ पूजा के इतिहास, इसके ज्योतिषीय और खगोलीय, मेडिसिनल और पर्यावरण के महत्व से जुड़े पक्षों पर व्यापक दस्तावेज तैयार किए. इसके लिए पटना में एक सेमिनार का आयोजन किया है, जिसमें कई विद्वानों ने अपने रिसर्च पेपर पेश किए, जिनमें से तेरह को एक किताब के रूप में प्रकाशित किया गया. इस किताब में छठ पर्व के जुड़े अलग-अलग भाषाओं के लोकगीतों को भी संकलित किया गया है.

