बुनकरों की मदद करेगा AI: कारीगर को हटाए बिना कपड़ा बनाने की प्रक्रिया को बनाएगा आसान - AI WILL HELP WEAVERS

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बुनकरों की मदद करेगा AI (ETV Bharat)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 19, 2026 at 10:34 PM IST

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रही इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में, पारंपरिक भारतीय बुनाई में हाई-टेक बदलाव देखने को मिल रहा है. समिट में, टीसीएस यानी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने झलक पेश की कि कैसे एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कारीगर को हटाए बिना कपड़ा बनाने की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है.

टीसीएस इंटेलिजेंट डिजाइन प्लेटफॉर्म आवाज के निर्देशों, रेखाचित्रों या छवियों को समझकर तुरंत "बुनाई के लिए तैयार" डिजाइन बनाकर इस समस्या को हल करता है. यह 3डी और एआर यानी ऑगमेंटेड रियलिटी पूर्वावलोकन देता है, जिससे ग्राहक बुनाई शुरू होने से पहले ही देख सकते हैं कि कपड़ा कैसा दिखेगा. यह बनारसी या कांचीपुरम जैसे बुनाई क्लस्टर के हिसाब से डिजाइन एलिमेंट भी बताता है, जिससे कारीगरों को तेजी से और सोच-समझकर रचनात्मक फैसले लेने में मदद मिलती है.

इसके अलावा, स्मार्ट वीवर असिस्ट करघे पर एलईडी मार्गदर्शन का इस्तेमाल करके कम अनुभवी कारीगरों को भी जटिल पैटर्न को आसानी से समझने में मदद करता है. साथ ही ये युवा पीढ़ी को इस कला से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करता है.

उत्पादन समय को कम करके और महंगी पड़ने वाली गलतियों को घटाकर, टीसीएस का नवाचार जटिल हथकरघा उत्पादों को ज्यादा व्यावहारिक बनाने का लक्ष्य रखता है, जिससे पारंपरिक भारतीय शिल्प आज के बाजार में मुकाबला कर सकें और फल-फूल सकें. 

नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रही इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में, पारंपरिक भारतीय बुनाई में हाई-टेक बदलाव देखने को मिल रहा है. समिट में, टीसीएस यानी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने झलक पेश की कि कैसे एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कारीगर को हटाए बिना कपड़ा बनाने की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है.

टीसीएस इंटेलिजेंट डिजाइन प्लेटफॉर्म आवाज के निर्देशों, रेखाचित्रों या छवियों को समझकर तुरंत "बुनाई के लिए तैयार" डिजाइन बनाकर इस समस्या को हल करता है. यह 3डी और एआर यानी ऑगमेंटेड रियलिटी पूर्वावलोकन देता है, जिससे ग्राहक बुनाई शुरू होने से पहले ही देख सकते हैं कि कपड़ा कैसा दिखेगा. यह बनारसी या कांचीपुरम जैसे बुनाई क्लस्टर के हिसाब से डिजाइन एलिमेंट भी बताता है, जिससे कारीगरों को तेजी से और सोच-समझकर रचनात्मक फैसले लेने में मदद मिलती है.

इसके अलावा, स्मार्ट वीवर असिस्ट करघे पर एलईडी मार्गदर्शन का इस्तेमाल करके कम अनुभवी कारीगरों को भी जटिल पैटर्न को आसानी से समझने में मदद करता है. साथ ही ये युवा पीढ़ी को इस कला से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करता है.

उत्पादन समय को कम करके और महंगी पड़ने वाली गलतियों को घटाकर, टीसीएस का नवाचार जटिल हथकरघा उत्पादों को ज्यादा व्यावहारिक बनाने का लक्ष्य रखता है, जिससे पारंपरिक भारतीय शिल्प आज के बाजार में मुकाबला कर सकें और फल-फूल सकें. 

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