सोमनाथ मंदिर पर पहले आक्रमण के 1000 साल, मंदिर में 3 दिवसीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व - SOMNATH SWABHIMAN PARVA
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Published : January 8, 2026 at 10:54 PM IST
देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर में 3 दिवसीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है. यह पर्व 8 जनवरी से शुरू होकर 11 जनवरी तक चलेगा. 11 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे.
साल 2026 सोमनाथ मंदिर के इतिहास में एक खास पड़ाव है, क्योंकि इस साल मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1000 साल पूरे हो रहे हैं. साल 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर हमला किया. ज्योतिर्लिंग को तोड़ दिया और 20 मिलियन दीनार के बराबर संपत्ति लूटकर ले गया. 1169 में कुमारपाल ने दोबारा इसका निर्माण कराया. फिर 1299 में अलाउद्दीन खिलजी ने इसे अपना निशाना बनाया. इसके बाद साल 1308 में मंदिर का पुनर्निर्माण सौराष्ट्र के चूड़ासमा राजा महिपाल प्रथम ने कराया. शिवलिंग की स्थापना उनके बेटे खेंगारा ने की थी. तीसरी बार 1395 में जफर खान ने सोमनाथ पर हमला किया.
लगातार हमलों के बाद सोमनाथ मंदिर की भव्यता तब बढ़ी, जब भारत के लौह पुरुष और तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल 12 नवंबर 1947 को जूनागढ़ गए. उन्होंने सोमनाथ मंदिर के दोबारा बनाने का आदेश दिया. मंदिर के निर्माण की देखरेख और रुपयों की व्यवस्था करने के लिए सोमनाथ ट्रस्ट की स्थापना की. इसके बाद 11 मई 1951 को देश के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में मूर्ति की स्थापना कराई.
देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर में 3 दिवसीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है. यह पर्व 8 जनवरी से शुरू होकर 11 जनवरी तक चलेगा. 11 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे.
साल 2026 सोमनाथ मंदिर के इतिहास में एक खास पड़ाव है, क्योंकि इस साल मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1000 साल पूरे हो रहे हैं. साल 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर हमला किया. ज्योतिर्लिंग को तोड़ दिया और 20 मिलियन दीनार के बराबर संपत्ति लूटकर ले गया. 1169 में कुमारपाल ने दोबारा इसका निर्माण कराया. फिर 1299 में अलाउद्दीन खिलजी ने इसे अपना निशाना बनाया. इसके बाद साल 1308 में मंदिर का पुनर्निर्माण सौराष्ट्र के चूड़ासमा राजा महिपाल प्रथम ने कराया. शिवलिंग की स्थापना उनके बेटे खेंगारा ने की थी. तीसरी बार 1395 में जफर खान ने सोमनाथ पर हमला किया.
लगातार हमलों के बाद सोमनाथ मंदिर की भव्यता तब बढ़ी, जब भारत के लौह पुरुष और तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल 12 नवंबर 1947 को जूनागढ़ गए. उन्होंने सोमनाथ मंदिर के दोबारा बनाने का आदेश दिया. मंदिर के निर्माण की देखरेख और रुपयों की व्यवस्था करने के लिए सोमनाथ ट्रस्ट की स्थापना की. इसके बाद 11 मई 1951 को देश के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में मूर्ति की स्थापना कराई.

