लद्दाख में हजारों लोग सड़कों पर, राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग तेज - PROTESTS IN LADAKH

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लद्दाख में हजारों लोग सड़कों पर (ETV Bharat)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 17, 2026 at 3:02 PM IST

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लद्दाख में राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं…लेह और कारगिल में निकाली गई विरोध रैली में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने किया. प्रदर्शनकारियों ने बैनर और तख्तियां लेकर इंसाफ दो…लद्दाख को छठी अनुसूची देनी होगी और अफसरशाही नामंजूर जैसे नारे लगाए.

कारगिल में रैली को संबोधित करते हुए सांसद हनीफा जान ने कहा कि बातचीत की तमाम कोशिशों के बावजूद लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ा है…उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों के सब्र को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए. प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद लद्दाख से उसका लोकतांत्रिक और संवैधानिक सुरक्षा कवच कमजोर हुआ है और यह मुद्दा पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा है.  

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में रिहा किए गए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में भी आवाज उठाई और अन्य बंदियों की रिहाई के साथ मामलों को वापस लेने की मांग की. 

लद्दाख में राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं…लेह और कारगिल में निकाली गई विरोध रैली में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने किया. प्रदर्शनकारियों ने बैनर और तख्तियां लेकर इंसाफ दो…लद्दाख को छठी अनुसूची देनी होगी और अफसरशाही नामंजूर जैसे नारे लगाए.

कारगिल में रैली को संबोधित करते हुए सांसद हनीफा जान ने कहा कि बातचीत की तमाम कोशिशों के बावजूद लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ा है…उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों के सब्र को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए. प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद लद्दाख से उसका लोकतांत्रिक और संवैधानिक सुरक्षा कवच कमजोर हुआ है और यह मुद्दा पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा है.  

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में रिहा किए गए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में भी आवाज उठाई और अन्य बंदियों की रिहाई के साथ मामलों को वापस लेने की मांग की. 

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