13 साल बेहोश रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लिया ऐतिहासिक पहला फैसला ! - HARISH RANA CASE

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (ETV Bharat)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 11, 2026 at 3:51 PM IST

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एक इंसान, 13 साल से बिस्तर पर. अब सुप्रीम कोर्ट ने लिया ऐसा फैसला, जो पहले कभी नहीं हुआ. इलाज बंद किया जा जाए. मरीज के सम्मान और आराम के लिए.सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.  32 साल के हरिश राणा, जो पिछले 13 साल से वेजेटेटिव स्टेट में हैं, उनके लिए पैसिव युथनेशिया की अनुमति दी गई. वेजेटेटिव स्टेट का मतलब है कि व्यक्ति की दिमाग की गतिविधि बहुत कम हो गई है, वो होश में नहीं हैं और अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरों पर पूरी तरह निर्भर हैं. हरिश भी इस स्थिति में हैं, यानी वे खुद से कुछ नहीं कर सकते. पैसिव युथनेशिया का मतलब है कि किसी मरीज की दगी बचाने वाला उपचार, जैसे खाना और दवाई, बंद कर दिया जाए, ताकि उनका जीवन सम्मान और आराम के साथ खत्म हो सके. यानी इस फैसले का उद्देश्य हरिश राणा की गरिमा और आराम बनाए रखना है.सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला उनके परिवार की इच्छा और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर लिया. कोर्ट ने कहा कि अब हरिश का इलाज धीरे-धीरे रोका जाएगा, लेकिन उनका आराम और सम्मान पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. ये फैसला भारत में गरिमा के साथ मृत्यु के अधिकार को नया कानूनी मान्यता देता है और दिखाता है कि प्यार और संवेदना के साथ कठिन फैसले कैसे लिए जा सकते हैं.

एक इंसान, 13 साल से बिस्तर पर. अब सुप्रीम कोर्ट ने लिया ऐसा फैसला, जो पहले कभी नहीं हुआ. इलाज बंद किया जा जाए. मरीज के सम्मान और आराम के लिए.सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.  32 साल के हरिश राणा, जो पिछले 13 साल से वेजेटेटिव स्टेट में हैं, उनके लिए पैसिव युथनेशिया की अनुमति दी गई. वेजेटेटिव स्टेट का मतलब है कि व्यक्ति की दिमाग की गतिविधि बहुत कम हो गई है, वो होश में नहीं हैं और अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरों पर पूरी तरह निर्भर हैं. हरिश भी इस स्थिति में हैं, यानी वे खुद से कुछ नहीं कर सकते. पैसिव युथनेशिया का मतलब है कि किसी मरीज की दगी बचाने वाला उपचार, जैसे खाना और दवाई, बंद कर दिया जाए, ताकि उनका जीवन सम्मान और आराम के साथ खत्म हो सके. यानी इस फैसले का उद्देश्य हरिश राणा की गरिमा और आराम बनाए रखना है.सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला उनके परिवार की इच्छा और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर लिया. कोर्ट ने कहा कि अब हरिश का इलाज धीरे-धीरे रोका जाएगा, लेकिन उनका आराम और सम्मान पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. ये फैसला भारत में गरिमा के साथ मृत्यु के अधिकार को नया कानूनी मान्यता देता है और दिखाता है कि प्यार और संवेदना के साथ कठिन फैसले कैसे लिए जा सकते हैं.

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