टैलेंट में नंबर-1, तो इनोवेशन में पीछे क्यों? जानिए भारत के 'ब्रेन ड्रेन' और यूनिकॉर्न का पूरा सच

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टैलेंट में नंबर-1, तो इनोवेशन में पीछे क्यों? (ETV Bharat)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 31, 2026 at 5:22 PM IST

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जुलाई के महीने में भारत के पांच स्कूली छात्रों ने कोलंबिया में कुछ ऐसा कर दिया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. 56वें इंटरनेशनल फिजिक्स ऑलंपियाड में 85 देशों के 381 प्रतिभाशाली छात्रों को पछाड़कर भारतीय टीम ने 5 गोल्ड मेडल जीत लिए और चीन, रूस, साउथ कोरिया, कजाकिस्तान और ताइवान के साथ दुनिया में टॉप किया.  

ये बात महज गोल्ड मेडल की नहीं है, बल्कि भारत की सबसे बड़ी राष्ट्रीय संपत्ति यानी भारतीय युवाओं की प्रतिभा की है, जिसकी पूरी दुनिया बांहें फैलाए इंतजार करती रहती है. इन छात्रों को इतना बड़ा सम्मान मिलना कोई संयोग नहीं है, बल्कि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के 'होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन' (HBCSE) की तीन दशकों की मेहनत का नतीजा है. पिछले 10 सालों में ओलंपियाड में गया हर भारतीय बच्चा मेडल लेकर लौटा है यानी हर बार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है.

यहां सवाल उठता है कि जब भारत के युवा इतने प्रतिभाशाली हैं, भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है तो दुनिया की 50 सबसे टॉप कंपनियों में एक भी भारतीय क्यों नहीं है?

जुलाई के महीने में भारत के पांच स्कूली छात्रों ने कोलंबिया में कुछ ऐसा कर दिया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. 56वें इंटरनेशनल फिजिक्स ऑलंपियाड में 85 देशों के 381 प्रतिभाशाली छात्रों को पछाड़कर भारतीय टीम ने 5 गोल्ड मेडल जीत लिए और चीन, रूस, साउथ कोरिया, कजाकिस्तान और ताइवान के साथ दुनिया में टॉप किया.  

ये बात महज गोल्ड मेडल की नहीं है, बल्कि भारत की सबसे बड़ी राष्ट्रीय संपत्ति यानी भारतीय युवाओं की प्रतिभा की है, जिसकी पूरी दुनिया बांहें फैलाए इंतजार करती रहती है. इन छात्रों को इतना बड़ा सम्मान मिलना कोई संयोग नहीं है, बल्कि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के 'होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन' (HBCSE) की तीन दशकों की मेहनत का नतीजा है. पिछले 10 सालों में ओलंपियाड में गया हर भारतीय बच्चा मेडल लेकर लौटा है यानी हर बार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है.

यहां सवाल उठता है कि जब भारत के युवा इतने प्रतिभाशाली हैं, भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है तो दुनिया की 50 सबसे टॉप कंपनियों में एक भी भारतीय क्यों नहीं है?