'मजिस्ट्रेट ऐसा करने की हिम्मत कैसे कर सकता है ?', सीजेपी प्रदर्शनकारी को नोटिस भेजे जाने पर भड़के CJI सूर्यकांत
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Published : September 9, 2026 at 10:04 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट से उस छात्र को नोटिस जारी करने के मामले में स्पष्टीकरण मांगेगा, जिसने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की अगुवाई में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर हिस्सा लिया था. सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि शीर्ष अदालत पहले ही निर्देश दे चुकी है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. सीजेआई सूर्यकांत की अगुआई वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष एक वकील ने इस मामले का उल्लेख किया. वकील ने कहा कि छात्रों पर ‘‘प्रयोग’’ किया जा रहा है और यह नोटिस भी उच्चतम न्यायालय के आदेश के विपरीत था. हालांकि, नोटिस बाद में वापस ले लिया गया. अधिकारियों ने मंगलवार को बताया था कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के एक छात्र को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था. नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए छात्र से पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था. हालांकि, बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया.
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट से उस छात्र को नोटिस जारी करने के मामले में स्पष्टीकरण मांगेगा, जिसने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की अगुवाई में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर हिस्सा लिया था. सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि शीर्ष अदालत पहले ही निर्देश दे चुकी है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. सीजेआई सूर्यकांत की अगुआई वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष एक वकील ने इस मामले का उल्लेख किया. वकील ने कहा कि छात्रों पर ‘‘प्रयोग’’ किया जा रहा है और यह नोटिस भी उच्चतम न्यायालय के आदेश के विपरीत था. हालांकि, नोटिस बाद में वापस ले लिया गया. अधिकारियों ने मंगलवार को बताया था कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के एक छात्र को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था. नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए छात्र से पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था. हालांकि, बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया.

