AI बना एग्रीकल्चरल एडवाइजर, Chat GPT ने बदला खेती का तरीका, प्लांटेशन से मार्केटिंग तक हर विषय पर देता है सलाह - DIGITAL AGRICULTURAL ADVISOR AI
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Published : February 10, 2026 at 11:11 PM IST
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर के किसान संजय वाबले अपनी खेती को उन्नत बनाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. चैट GPT उनके लिए एग्रीकल्चरल एडवाइजर बना हुआ है. खेती से जुड़ी जब भी कोई समस्या सामने आती है, वो चैट जीपीटी से उसका समाधान मांगते हैं.
संजय वाबले पिछले बीस सालों से पुणे में रह रहे थे, वो वहां बिजनेस करते थे, लेकिन पुश्तैनी खेती को बचाने के लिए चार साल पहले वो यहां आ गए और 12 एकड़ में खेती शुरू की. यहां उनकी सबसे बड़ी समस्या थी, कि उन्हें खेती का कोई अनुभव नहीं था. डेली बेसिस पर खेती का विशेषज्ञ मिलना भी मुश्किल था, लिहाजा इस काम के लिए उन्होंने चैट जीटीपी की मदद लेनी शुरू की.. फिर से चैट जीपीटी उनका 24 घंटे का सलाहकार बन गया. अब वो एक कुशल किसान की तरह अमरूद, जामुन और नारियल की खेती करने लगे.
चाहे फसलों में कीड़े चलने की समस्या हो या फिर फर्टिलाइजर मैनेजमेंट की. मार्केट में फसल की कीमत जानना हो या फिर फ्यूचर स्ट्रैटजी बनानी हो. हर काम में AI उनकी मदद कर रहा है. संजय वाबले सिर्फ खेती तक ही सीमित रहना नहीं चाहते हैं, बल्कि भविष्य में वो यहां एग्री टूरिज्म विकसित करने का सपना देख रहे हैं. यहां टूरिस्टों को किस प्रकार की सुविधाएं देनी है, एग्री टूरिज्म की ब्रांडिंग कैसे करनी है. इन सबके लिए भी वो चैट जीपीटी की मदद ले रहे हैं.
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर के किसान संजय वाबले अपनी खेती को उन्नत बनाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. चैट GPT उनके लिए एग्रीकल्चरल एडवाइजर बना हुआ है. खेती से जुड़ी जब भी कोई समस्या सामने आती है, वो चैट जीपीटी से उसका समाधान मांगते हैं.
संजय वाबले पिछले बीस सालों से पुणे में रह रहे थे, वो वहां बिजनेस करते थे, लेकिन पुश्तैनी खेती को बचाने के लिए चार साल पहले वो यहां आ गए और 12 एकड़ में खेती शुरू की. यहां उनकी सबसे बड़ी समस्या थी, कि उन्हें खेती का कोई अनुभव नहीं था. डेली बेसिस पर खेती का विशेषज्ञ मिलना भी मुश्किल था, लिहाजा इस काम के लिए उन्होंने चैट जीटीपी की मदद लेनी शुरू की.. फिर से चैट जीपीटी उनका 24 घंटे का सलाहकार बन गया. अब वो एक कुशल किसान की तरह अमरूद, जामुन और नारियल की खेती करने लगे.
चाहे फसलों में कीड़े चलने की समस्या हो या फिर फर्टिलाइजर मैनेजमेंट की. मार्केट में फसल की कीमत जानना हो या फिर फ्यूचर स्ट्रैटजी बनानी हो. हर काम में AI उनकी मदद कर रहा है. संजय वाबले सिर्फ खेती तक ही सीमित रहना नहीं चाहते हैं, बल्कि भविष्य में वो यहां एग्री टूरिज्म विकसित करने का सपना देख रहे हैं. यहां टूरिस्टों को किस प्रकार की सुविधाएं देनी है, एग्री टूरिज्म की ब्रांडिंग कैसे करनी है. इन सबके लिए भी वो चैट जीपीटी की मदद ले रहे हैं.

