विकास बनाम हरा-भरा क्षेत्र: उत्तराखंड हाइवे के लिए पेड़ों की कटाई पर जनता का विरोध - जनता का विरोध

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पेड़ों की कटाई पर जनता का विरोध (ETV Bharat)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 12, 2026 at 11:00 PM IST

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जैसे-जैसे विकास की गति बढ़ रही है, उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है. सात मोद आरक्षित वन में 743 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे चार लेन के राजमार्ग परियोजना के लिए लगभग 4,369 पेड़ काटे जा रहे हैं, जो भानियावाला, जॉली ग्रांट हवाई अड्डे और ऋषिकेश को जोड़ेगा. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कार्यान्वित की जा रही इस परियोजना का उद्देश्य कनेक्टिविटी में सुधार करना, यातायात जाम को कम करना और चार धाम यात्रा के दौरान आवागमन को सुगम बनाना है, साथ ही आसपास के जंगलों पर इसके प्रभाव को कम करना है. हालांकि, बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की वजह से विरोध प्रदर्शनों शुरू हुए हैं। स्थानीय निवासी और पर्यावरणविद मौजूदा सड़क को चौड़ा करने की जरूरत पर ही सवाल उठा रहे हैं. उनकी दलील है कि बेहतर यातायात प्रबंधन और वैकल्पिक मार्ग अपनाने से क्षेत्र की हरियाली को संरक्षित और पर्यावरणीय नुकसान को कम किया जा सकता था. 

जैसे-जैसे विकास की गति बढ़ रही है, उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है. सात मोद आरक्षित वन में 743 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे चार लेन के राजमार्ग परियोजना के लिए लगभग 4,369 पेड़ काटे जा रहे हैं, जो भानियावाला, जॉली ग्रांट हवाई अड्डे और ऋषिकेश को जोड़ेगा. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कार्यान्वित की जा रही इस परियोजना का उद्देश्य कनेक्टिविटी में सुधार करना, यातायात जाम को कम करना और चार धाम यात्रा के दौरान आवागमन को सुगम बनाना है, साथ ही आसपास के जंगलों पर इसके प्रभाव को कम करना है. हालांकि, बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की वजह से विरोध प्रदर्शनों शुरू हुए हैं। स्थानीय निवासी और पर्यावरणविद मौजूदा सड़क को चौड़ा करने की जरूरत पर ही सवाल उठा रहे हैं. उनकी दलील है कि बेहतर यातायात प्रबंधन और वैकल्पिक मार्ग अपनाने से क्षेत्र की हरियाली को संरक्षित और पर्यावरणीय नुकसान को कम किया जा सकता था.