वोटर लिस्ट से नाम कटने पर नहीं छिनेगी नागरिकता, सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी - SUPREME COURT CITIZENSHIP RULING

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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी (ETV Bharat)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 17, 2026 at 10:52 PM IST

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि मतदाता सूची से नाम हटा दिए जाने से किसी व्यक्ति की नागरिकता नहीं छिन जाती. इसके साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि हालांकि मतदाता सूची पर चुनाव आयोग का पूरा नियंत्रण है, लेकिन वह नागरिकता का दर्जा तय नहीं कर सकता. अदालत, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की एसआईआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने चुनाव आयोग, पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य चुनाव पैनल से याचिका पर जवाब मांगा है. अधिवक्ता नेहा राठी के माध्यम से दायर इस याचिका में पश्चिम बंगाल विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़े मांगे गए हैं. इसमें दाखिल, स्वीकार और खारिज किए गए फॉर्म 6 और 7 की संख्या के साथ-साथ अपीलीय न्यायाधिकरणों के पास लंबित पड़े मामलों और अपीलों के निपटारे का विवरण भी शामिल है. पीठ ने कहा कि उसने बिहार एसआईआर मामले के फैसले में यह साफ कर दिया था कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है, और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने मात्र से किसी की नागरिकता नहीं छीनी जा सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि मतदाता सूची से नाम हटा दिए जाने से किसी व्यक्ति की नागरिकता नहीं छिन जाती. इसके साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि हालांकि मतदाता सूची पर चुनाव आयोग का पूरा नियंत्रण है, लेकिन वह नागरिकता का दर्जा तय नहीं कर सकता. अदालत, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की एसआईआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने चुनाव आयोग, पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य चुनाव पैनल से याचिका पर जवाब मांगा है. अधिवक्ता नेहा राठी के माध्यम से दायर इस याचिका में पश्चिम बंगाल विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़े मांगे गए हैं. इसमें दाखिल, स्वीकार और खारिज किए गए फॉर्म 6 और 7 की संख्या के साथ-साथ अपीलीय न्यायाधिकरणों के पास लंबित पड़े मामलों और अपीलों के निपटारे का विवरण भी शामिल है. पीठ ने कहा कि उसने बिहार एसआईआर मामले के फैसले में यह साफ कर दिया था कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है, और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने मात्र से किसी की नागरिकता नहीं छीनी जा सकती.