फिर पटरी पर लौटी अंग्रेजों के जमाने की टॉय ट्रेन, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की बड़ी पहल - TOY TRAIN BACK ON TRACK
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Published : January 22, 2026 at 10:57 PM IST
अंग्रेजों के जमाने की टॉय ट्रेन एक बार फिर से पटरी पर दौड़ने लगी है. सिलिगुड़ी से घायाबाड़ी तक 34 किलोमीटर की ऐतिहासिक संकरी ट्रैक पर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे सप्ताह में एक बार टॉय ट्रेन चला रहा है. इस पर सवार होकर आप दार्जिलिंग की पहाड़ियों की खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं. टेढ़े-मेढ़े रास्तों से होकर आप वहां के चाय बगानों की हरियाली को करीब से निहार सकते हैं.
पुराने जमाने के स्टीम इंजन की जगह डीजल इंजन ने ले ली है. पुराने हिल्स स्टेशनों की मरम्मत और रेनोवेशन कर उन्हें नया लुक दिया गया है. DHR ने सिलीगुड़ी की एक प्राइवेट एजेंसी के साथ मिलकर सर्विस की शुरुआत की है. इसका मकसद पर्यावरण संरक्षण से साथ साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था का विकास है. टॉय ट्रेन पर जंगल सफारी शुरू होने को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यटकों में जबर्दस्त उत्साह है. DHR लगातार सर्विस को बेहतर करने में जुटा है.
पिछले साल ही बैंगलोर से दो हेरिटेज टॉय ट्रेन इंजन सड़क के रास्ते दार्जिलिंग लाए गए थे. फिर एक और हेरिटेज इंजन को तिनधारिया वर्कशॉप में रिपेयर और रेनोवेट कर ट्रैक पर उतारा गया. यूनेस्को ने इस साइट को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित कर रखा है, जहां एक बार फिर आकर पर्यटक पहाड़ों की पुरानी यादों को ताजा कर सकेंगे.
अंग्रेजों के जमाने की टॉय ट्रेन एक बार फिर से पटरी पर दौड़ने लगी है. सिलिगुड़ी से घायाबाड़ी तक 34 किलोमीटर की ऐतिहासिक संकरी ट्रैक पर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे सप्ताह में एक बार टॉय ट्रेन चला रहा है. इस पर सवार होकर आप दार्जिलिंग की पहाड़ियों की खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं. टेढ़े-मेढ़े रास्तों से होकर आप वहां के चाय बगानों की हरियाली को करीब से निहार सकते हैं.
पुराने जमाने के स्टीम इंजन की जगह डीजल इंजन ने ले ली है. पुराने हिल्स स्टेशनों की मरम्मत और रेनोवेशन कर उन्हें नया लुक दिया गया है. DHR ने सिलीगुड़ी की एक प्राइवेट एजेंसी के साथ मिलकर सर्विस की शुरुआत की है. इसका मकसद पर्यावरण संरक्षण से साथ साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था का विकास है. टॉय ट्रेन पर जंगल सफारी शुरू होने को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यटकों में जबर्दस्त उत्साह है. DHR लगातार सर्विस को बेहतर करने में जुटा है.
पिछले साल ही बैंगलोर से दो हेरिटेज टॉय ट्रेन इंजन सड़क के रास्ते दार्जिलिंग लाए गए थे. फिर एक और हेरिटेज इंजन को तिनधारिया वर्कशॉप में रिपेयर और रेनोवेट कर ट्रैक पर उतारा गया. यूनेस्को ने इस साइट को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित कर रखा है, जहां एक बार फिर आकर पर्यटक पहाड़ों की पुरानी यादों को ताजा कर सकेंगे.

