हजारों चमगादड़ों का सुरक्षित आशियाना: पेगु परिवार ने 20 बीघा जमीन में बनाया 'अभ्यारण्य' - SANCTUARY FOR BATS

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हजारों चमगादड़ों का सुरक्षित आशियाना (ETV Bharat)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 8, 2026 at 10:06 PM IST

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असम के जोनाई के अमृतपुर गांव में बांस का जंगल हज़ारों चमगादड़ों का सुरक्षित आवास बन चुका है. यह जंगल सिर्फ जंगली जीवन का घर नहीं है, बल्कि पेगु परिवार की तीन दशकों से चल रही संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा कहानी का प्रतीक भी है.

परिवार के सात सदस्य, लक्षिकांत, नारायण, बोलेन और उनके चार अन्य भाई करीब 20 बीघा जमीन पर इस जंगल की देखभाल करते हैं. उनका जीवन इस जंगल के साथ जुड़ा हुआ है और वे इसे सुरक्षित रखने के लिए हर दिन मेहनत करते हैं .

पेगु परिवार ने जंगल की सुरक्षा के साथ-साथ सतत खेती को अपनाया. नारियल, सुपारी, संतरे, नींबू और सब्ज़ियों की खेती से परिवार अपनी रोजमर्रा की ज़रूरतें पूरी करता है और आय अर्जित करता है. मछली पालन और पशुपालन भी उनकी आमदनी का हिस्सा हैं. नारियल से सालाना लगभग 60,000 रुपये, सुपारी से 2-3 लाख रुपये, पान और मछली पालन से 4-5 लाख रुपये, और संतरे, सब्ज़ियों और जानवरों से एक्स्ट्रा इनकम हो जाता है.

सरकारी नौकरी करने वाले परिवार के सदस्य भी समय-समय पर घर लौटकर खेत और जंगल की देखभाल में मदद करते हैं. इस तरह, जंगल और मानव जीवन के बीच संतुलन कायम है.

असम के जोनाई के अमृतपुर गांव में बांस का जंगल हज़ारों चमगादड़ों का सुरक्षित आवास बन चुका है. यह जंगल सिर्फ जंगली जीवन का घर नहीं है, बल्कि पेगु परिवार की तीन दशकों से चल रही संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा कहानी का प्रतीक भी है.

परिवार के सात सदस्य, लक्षिकांत, नारायण, बोलेन और उनके चार अन्य भाई करीब 20 बीघा जमीन पर इस जंगल की देखभाल करते हैं. उनका जीवन इस जंगल के साथ जुड़ा हुआ है और वे इसे सुरक्षित रखने के लिए हर दिन मेहनत करते हैं .

पेगु परिवार ने जंगल की सुरक्षा के साथ-साथ सतत खेती को अपनाया. नारियल, सुपारी, संतरे, नींबू और सब्ज़ियों की खेती से परिवार अपनी रोजमर्रा की ज़रूरतें पूरी करता है और आय अर्जित करता है. मछली पालन और पशुपालन भी उनकी आमदनी का हिस्सा हैं. नारियल से सालाना लगभग 60,000 रुपये, सुपारी से 2-3 लाख रुपये, पान और मछली पालन से 4-5 लाख रुपये, और संतरे, सब्ज़ियों और जानवरों से एक्स्ट्रा इनकम हो जाता है.

सरकारी नौकरी करने वाले परिवार के सदस्य भी समय-समय पर घर लौटकर खेत और जंगल की देखभाल में मदद करते हैं. इस तरह, जंगल और मानव जीवन के बीच संतुलन कायम है.

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