इस मंदिर में नहीं चढ़ता पैसे और सोने-चांदी का चढ़ावा, यहां गौसेवा के लिए चढ़ाई जाती है घास

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मंदिर में चढ़ावे के तौर पर घास चढ़ाते हैं लोग (ETV Bharat)

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 24, 2026 at 5:15 PM IST

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बिलासपुर: घुमारवीं के भगेड़ में स्थित श्रद्धालु दान पात्र में पैसे या अनाज नहीं, बल्कि घास चढ़ाते हैं. यहां भगवान शिव को सोना-चांदी या नकदी नहीं, बल्कि घास का पुल्ला (घास का गट्ठर) और पशुओं के लिए चारा चढ़ाया जाता है. यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ गौसेवा और मानवता का भी एक अनूठा केंद्र बन गया है. मंदिर में शिवलिंग और भगवान शिव परिवार की मूर्तियां स्थापित हैं. इसके अलावा राधा-कृष्ण, शनि देव और हनुमान जी की प्रतिमाएं भी यहां श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां चढ़ाया गया चढ़ावा सीधे घायल और बेसहारा गौवंश के भरण-पोषण में उपयोग किया जाता है. पूजा-अर्चना के बाद यही घास मंदिर परिसर से जुड़े गौवंश सेवा केंद्र में रह रहे पशुओं को खिलाई जाती है.

बिलासपुर: घुमारवीं के भगेड़ में स्थित श्रद्धालु दान पात्र में पैसे या अनाज नहीं, बल्कि घास चढ़ाते हैं. यहां भगवान शिव को सोना-चांदी या नकदी नहीं, बल्कि घास का पुल्ला (घास का गट्ठर) और पशुओं के लिए चारा चढ़ाया जाता है. यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ गौसेवा और मानवता का भी एक अनूठा केंद्र बन गया है. मंदिर में शिवलिंग और भगवान शिव परिवार की मूर्तियां स्थापित हैं. इसके अलावा राधा-कृष्ण, शनि देव और हनुमान जी की प्रतिमाएं भी यहां श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां चढ़ाया गया चढ़ावा सीधे घायल और बेसहारा गौवंश के भरण-पोषण में उपयोग किया जाता है. पूजा-अर्चना के बाद यही घास मंदिर परिसर से जुड़े गौवंश सेवा केंद्र में रह रहे पशुओं को खिलाई जाती है.