एक्सप्लेनर: क्या पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये सैन्य ताकत के जरिए बना रहे हैं 'इस्लामिक नाटो'?
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Published : August 16, 2026 at 9:46 PM IST
मक्का में सात अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' ने इन देशों को आपस में जोड़ दिया है. इनमें केवल पाकिस्तान ही एकमात्र परमाणु हथियारों वाला मुस्लिम देश है, वहीं सऊदी अरब इस्लाम के सबसे पवित्र जगहों का केंद्र और दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है, जबकि तुर्किये नाटो का सदस्य देश है. इन तीनों देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 14 लाख सक्रिय सैनिक और करीब 3,415 सैन्य विमान हैं. ग्लोबल फायरपावर 2026 इंडेक्स में तुर्किये नौवें, पाकिस्तान 14वें और सऊदी अरब 25वें पायदान पर है. उनका संयुक्त रक्षा खर्च लगभग 124.4 अरब अमेरिकी डॉलर सालाना के होने अनुमान है. पाकिस्तान परमाणु क्षमता और मजबूत सैन्यशक्ति वाला देश है, वहीं तुर्किये एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी में महारथ रखता है और नाटो का सदस्य देश है, जबकि सऊदी अरब आर्थिक ताकत, इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के हिसाब से मजबूत मुल्क है. तीनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक इस समझौते का मकसद किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है और इसमें ये प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी होने वाले किसी भी सशस्त्र हमले को उन सभी मुल्कों पर हमला माना जाएगा.
मक्का में सात अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' ने इन देशों को आपस में जोड़ दिया है. इनमें केवल पाकिस्तान ही एकमात्र परमाणु हथियारों वाला मुस्लिम देश है, वहीं सऊदी अरब इस्लाम के सबसे पवित्र जगहों का केंद्र और दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है, जबकि तुर्किये नाटो का सदस्य देश है. इन तीनों देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 14 लाख सक्रिय सैनिक और करीब 3,415 सैन्य विमान हैं. ग्लोबल फायरपावर 2026 इंडेक्स में तुर्किये नौवें, पाकिस्तान 14वें और सऊदी अरब 25वें पायदान पर है. उनका संयुक्त रक्षा खर्च लगभग 124.4 अरब अमेरिकी डॉलर सालाना के होने अनुमान है. पाकिस्तान परमाणु क्षमता और मजबूत सैन्यशक्ति वाला देश है, वहीं तुर्किये एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी में महारथ रखता है और नाटो का सदस्य देश है, जबकि सऊदी अरब आर्थिक ताकत, इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के हिसाब से मजबूत मुल्क है. तीनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक इस समझौते का मकसद किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है और इसमें ये प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी होने वाले किसी भी सशस्त्र हमले को उन सभी मुल्कों पर हमला माना जाएगा.

