अमेरिका और ईरान का एक-दूसरे पर हमला, युद्धविराम को लेकर फिर बढ़ीं चिंताएं - CONCERNS OVER US IRAN CEASEFIRE
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Published : June 6, 2026 at 7:10 PM IST
अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने शुक्रवार को ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी के अरब देशों की ओर छोड़ी गईं मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया और इसके जवाब में इस्लामी गणराज्य के कुछ तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर हमला किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से छह को अमेरिकी सेना ने रोक लिया, जबकि सातवीं मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई. अमेरिका द्वारा पहले होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर छोड़े गए चार ईरानी ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं.
इन हमलों ने नाजुक संघर्षविराम को लेकर चिताएं बढ़ा दी हैं. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि, ईरान के साथ स्थिति काफी अच्छी लग रही है और अमेरिका बहुत जल्द ईरान मुद्दे से बाहर निकलेगा और किसी भी सूरत में नतीजा अच्छा होगा, चाहे वो किसी समझौते के जरिए हो या फिर कठोर तरीके से. यह घटनाक्रम एक-दूसरे पर किए गए हमलों के उस सिलसिले की ताजा कड़ी है, जिसने नाजुक युद्धविराम पर दबाव डाला है और स्थायी शांति समझौते तक पहुंचने की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है.
अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने शुक्रवार को ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी के अरब देशों की ओर छोड़ी गईं मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया और इसके जवाब में इस्लामी गणराज्य के कुछ तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर हमला किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से छह को अमेरिकी सेना ने रोक लिया, जबकि सातवीं मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई. अमेरिका द्वारा पहले होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर छोड़े गए चार ईरानी ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं.
इन हमलों ने नाजुक संघर्षविराम को लेकर चिताएं बढ़ा दी हैं. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि, ईरान के साथ स्थिति काफी अच्छी लग रही है और अमेरिका बहुत जल्द ईरान मुद्दे से बाहर निकलेगा और किसी भी सूरत में नतीजा अच्छा होगा, चाहे वो किसी समझौते के जरिए हो या फिर कठोर तरीके से. यह घटनाक्रम एक-दूसरे पर किए गए हमलों के उस सिलसिले की ताजा कड़ी है, जिसने नाजुक युद्धविराम पर दबाव डाला है और स्थायी शांति समझौते तक पहुंचने की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है.

