65 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ भाखड़ा विस्थापितों दर्द, अब भी प्लॉट के इंतजार में 270 विस्थापित परिवार

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65 साल बाद भी भाखड़ा विस्थापितों को नहीं मिला न्याय (ETV Bharat)

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 27, 2026 at 4:54 PM IST

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Updated : August 27, 2026 at 5:00 PM IST

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बिलासपुर: देश को रोशन करने की खातिर अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले भाखड़ा विस्थापित परिवार के सदस्य आज 65 साल बाद भी जल समाधि लेते पुराने ऐतिहासिक शहर के उन पलों को नहीं भूला पाए हैं. "चल मेरी जिंदे नवीं दुनियां बसाणी, डूबी गए घरबार आई गया पाणी…." बिलासपुर के बुजुर्ग आज भी कभी न मिटने वाली उस जख्म को याद कर इन्हीं पंक्तियों को गाते हैं. इस पंक्ति को सुनने के बाद शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसकी आंखें नम न हों. ऐतिहासिक बिलासपुर शहर को भाखड़ा बांध की भेंट चढ़े 6 दशक से अधिक हो गए, लेकिन विस्थापन का दर्द आज भी नहीं मिट पाया है. आज पुराने बिलासपुर शहर को जलमग्न हुए पूरे 65 साल हो गए हैं. 9 अगस्त 1961 का वह दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया जब देश को रोशन करने के लिए बनाए गए भाखड़ा बांध की कीमत पर बिलासपुर का ऐतिहासिक शहर और 354 गांव झील में समा गए.र्तमान में, विस्थापितों की सबसे बड़ी समस्या है. प्लॉट और पुनर्वास, 118 विस्थापितों को अब तक प्लॉट मिल चुके हैं, लेकिन बाकी 270 लोग अभी भी इंतजार में हैं. इस सूची में हाल ही में 25 और नाम जुड़ने के बाद आंकड़ा 270 तक पहुंच गया है. राज्य सरकार ने अब एक नया प्रस्ताव तैयार किया है जिसके तहत निजी जमीन खरीदकर विस्थापितों को प्लॉट देने की योजना बनाई गई है. पहले एम्स के समीप चंगर पलासीं की 256 बीघा जमीन का चयन किया गया था, लेकिन वह उपयुक्त नहीं पाई गई. 

बिलासपुर: देश को रोशन करने की खातिर अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले भाखड़ा विस्थापित परिवार के सदस्य आज 65 साल बाद भी जल समाधि लेते पुराने ऐतिहासिक शहर के उन पलों को नहीं भूला पाए हैं. "चल मेरी जिंदे नवीं दुनियां बसाणी, डूबी गए घरबार आई गया पाणी…." बिलासपुर के बुजुर्ग आज भी कभी न मिटने वाली उस जख्म को याद कर इन्हीं पंक्तियों को गाते हैं. इस पंक्ति को सुनने के बाद शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसकी आंखें नम न हों. ऐतिहासिक बिलासपुर शहर को भाखड़ा बांध की भेंट चढ़े 6 दशक से अधिक हो गए, लेकिन विस्थापन का दर्द आज भी नहीं मिट पाया है. आज पुराने बिलासपुर शहर को जलमग्न हुए पूरे 65 साल हो गए हैं. 9 अगस्त 1961 का वह दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया जब देश को रोशन करने के लिए बनाए गए भाखड़ा बांध की कीमत पर बिलासपुर का ऐतिहासिक शहर और 354 गांव झील में समा गए.र्तमान में, विस्थापितों की सबसे बड़ी समस्या है. प्लॉट और पुनर्वास, 118 विस्थापितों को अब तक प्लॉट मिल चुके हैं, लेकिन बाकी 270 लोग अभी भी इंतजार में हैं. इस सूची में हाल ही में 25 और नाम जुड़ने के बाद आंकड़ा 270 तक पहुंच गया है. राज्य सरकार ने अब एक नया प्रस्ताव तैयार किया है जिसके तहत निजी जमीन खरीदकर विस्थापितों को प्लॉट देने की योजना बनाई गई है. पहले एम्स के समीप चंगर पलासीं की 256 बीघा जमीन का चयन किया गया था, लेकिन वह उपयुक्त नहीं पाई गई. 

Last Updated : August 27, 2026 at 5:00 PM IST