टाइगर रिजर्व में खुलेंगे 38 नए रेस्क्यू सेंटर, घायल और बीमार जानवरों को तुरंत मिलेगा इलाज - NTCA
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Published : July 10, 2026 at 10:10 PM IST
बाघों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने देश में 38 अतिरिक्त सुविधा केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है. 'रोडमैप टू रेस्क्यू' नाम से जारी रिपोर्ट में ट्रिपल R यानी रेस्क्यू, रिहैब और रिलीज सुविधा केंद्रों का जिक्र किया गया है.
सरकार की कोशिशों की वजह से हाल के सालों में बाघों की संख्या बढ़ी है, लेकिन जंगलों के कटने और शहरीकरण की वजह से जंगली जानवर अभयारण्य से बाहर निकल रहे हैं. जिसके कारण इंसानों और जानवरों के बीच झड़पें हो रही हैं. कई बार जानवर घायल हो जाते हैं, बीमार पड़ जाते हैं या अनाथ हो जाते हैं.. ऐसे में ज़रूरत है कि जानवरों को तुरंत बचाया जाए, उनका इलाज किया जाए, और फिर वापस जंगल में छोड़ा जाए. इसे ही ट्रिपल आर यानी रेस्क्यू, रिहैब और रिलीज कहा जाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, देश के 58 टाइगर रिजर्व में से 36 रिजर्व में 40 वन्यजीव बचाव सुविधाएं मौजूद हैं. इसके बावजूद इसमें कमी महसूस की जा रही है. लिहाजा NTCA ने 38 अतिरिक्त ट्रांजिट RRR सुविधाएं केंद्र खोलने का प्रस्ताव दिया है. अलग-अलग जगहों पर छोटे-छोटे रेस्क्यू सेंटर खोलने की बात कही गई है, ताकि किसी भी जानवर को संकट में रेस्क्यू में देरी ना हो.
बाघों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने देश में 38 अतिरिक्त सुविधा केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है. 'रोडमैप टू रेस्क्यू' नाम से जारी रिपोर्ट में ट्रिपल R यानी रेस्क्यू, रिहैब और रिलीज सुविधा केंद्रों का जिक्र किया गया है.
सरकार की कोशिशों की वजह से हाल के सालों में बाघों की संख्या बढ़ी है, लेकिन जंगलों के कटने और शहरीकरण की वजह से जंगली जानवर अभयारण्य से बाहर निकल रहे हैं. जिसके कारण इंसानों और जानवरों के बीच झड़पें हो रही हैं. कई बार जानवर घायल हो जाते हैं, बीमार पड़ जाते हैं या अनाथ हो जाते हैं.. ऐसे में ज़रूरत है कि जानवरों को तुरंत बचाया जाए, उनका इलाज किया जाए, और फिर वापस जंगल में छोड़ा जाए. इसे ही ट्रिपल आर यानी रेस्क्यू, रिहैब और रिलीज कहा जाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, देश के 58 टाइगर रिजर्व में से 36 रिजर्व में 40 वन्यजीव बचाव सुविधाएं मौजूद हैं. इसके बावजूद इसमें कमी महसूस की जा रही है. लिहाजा NTCA ने 38 अतिरिक्त ट्रांजिट RRR सुविधाएं केंद्र खोलने का प्रस्ताव दिया है. अलग-अलग जगहों पर छोटे-छोटे रेस्क्यू सेंटर खोलने की बात कही गई है, ताकि किसी भी जानवर को संकट में रेस्क्यू में देरी ना हो.

