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Yearender 2025: सैटेलाइट डॉकिंग से ISS तक, भारत के स्पेस प्रोग्राम ने रचा इतिहास

साल 2025 में इसरो ने तकनीक, मानव मिशन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के दम पर भारत की स्पेस ताकत को नई पहचान दी.

In 2025, ISRO showcased India's space capabilities to the world by satellite docking, NISAR mission and sending Indian astronauts to ISS.
2025 में इसरो ने सैटेलाइट डॉकिंग, NISAR मिशन और ISS तक भारतीय गगनयात्री भेजकर भारत की स्पेस क्षमता दुनिया को दिखाई. (फोटो क्रेडिट: ISRO)
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By ETV Bharat Tech Team

Published : December 20, 2025 at 8:01 AM IST

9 Min Read
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हैदराबाद: भारत पिछले कई सालों से लगातार अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ता जा रहा है. इस मुहीम में साल 2025 भारतीय स्पेस सेक्टर के लिए काफी अहम साल साबित हुआ है. इस साल में भारत ने स्पेस सेक्टर में कई खास उपलब्धियों को हासिल किया है. इस साल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने न सिर्फ तकनीकी स्तर पर बड़े कीर्तिमान हासिल किए, बल्कि दुनिया को यह भी दिखा दिया कि भारत अब स्पेस टेक्नोलॉजी में किसी से पीछे नहीं है. सैटेलाइट डॉकिंग से लेकर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक भारतीय गगनयात्री की मौजूदगी और भविष्य की चंद्र और मानव मिशनों की ठोस तैयारी तक, 2025 में भारत का स्पेस प्रोग्राम पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना. आइए हम आपको बताते हैं कि भारतीय स्पेस प्रोग्राम के लिए साल 2025 इतना खास क्यों रहा?

16 जनवरी 2025 की तारीख भारतीय स्पेस हिस्ट्री में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई. इसी दिन भारत ने लो अर्थ ऑर्बिट में सैटेलाइट डॉकिंग ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. इस कामयाबी के साथ भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया, जिसने स्पेस में डॉकिंग टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वर करने में कामयाबी हासिल कर ली. इस मिशन का नाम SpaDeX यानी Space Docking Experiment था. इसे 30 दिसंबर 2024 को PSLV C60 के ज़रिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था. इस मिशन में दो स्पेसक्राफ्ट्स को बेहद सटीक तरीके से एक दूसरे के पास लाया गया. 15 मीटर की दूरी से लेकर 3 मीटर के होल्ड पॉइंट तक कंट्रोल्ड मूवमेंट, फिर सटीक डॉकिंग, रिट्रैक्शन और रिगिडाइजेशन, हर स्टेप को इसरो ने परफेक्शन के साथ पूरा किया. यह टेक्नोलॉजी भविष्य में स्पेस स्टेशन ऑपरेशन, सैटेलाइट सर्विसिंग और डीप स्पेस मिशनों के लिए बेहद अहम मानी जाती है.

List of ISRO's greatest achievements
इसरो की सबसे बड़ी उपलब्धियों की लिस्ट (फोटो क्रेडिट: ISRO)

100 लॉन्च का माइलस्टोन और GSLV F15 की उड़ान

29 जनवरी 2025 को इसरो ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया. GSLV F15 की लॉन्चिंग के साथ ही श्रीहरिकोटा से होने वाला यह 100वां रॉकेट लॉन्च था. यह मिशन NVS-02 सैटेलाइट के लिए था, जो भारत की रीजनल नेविगेशन कैपेबिलिटी को और मज़बूत करता है.

GSLV F15, भारत का 17वां GSLV मिशन था और इसमें पूरी तरह स्वदेशी क्रायोजेनिक स्टेज का इस्तेमाल किया गया. इस मिशन की खास बात इसका 3.4 मीटर डायमीटर वाला मेटैलिक पेलोड फेयरिंग रहा, जो भविष्य के हेवी पेलोड मिशनों के लिए एक बड़ा कदम है.

2025 में लॉन्च हुए प्रमुख सैटेलाइट्स

साल 2025 में इसरो ने कई अहम सैटेलाइट्स लॉन्च किए, जिनका इस्तेमाल कम्युनिकेशन, नेविगेशन, अर्थ ऑब्जर्वेशन और साइंटिफिक रिसर्च में किया जा रहा है.

सैटेलाइटलॉन्च डेटलॉन्च व्हीकलऑर्बिट उपयोग
NVS 0229 जनवरी 2025GSLV F15GTO नेविगेशन
EOS 0918 मई 2025PSLV C61सन सिंक्रोनस पोलर एग्रीकल्चर, डिजास्टर मैनेजमेंट
NISAR30 जुलाई 2025GSLV F16सन सिंक्रोनस पोलर लैंड और ओशन स्टडी
CMS 032 नवंबर 2025LVM3 M5GTO कम्युनिकेशन

CMS 03 सैटेलाइट इसरो के लिए खास रहा क्योंकि यह भारत से GTO में भेजा गया, अब तक का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट है. इसका वजन करीब 4400 किलोग्राम है और यह मल्टी बैंड कम्युनिकेशन सर्विस देगा, जिसमें समुद्री क्षेत्र भी शामिल हैं .

NISAR मिशन, NASA और ISRO की ऐतिहासिक साझेदारी

30 जुलाई 2025 को NISAR मिशन लॉन्च किया गया था. यह भारत और अमेरिका के बीच पहला जॉइंट अर्थ ऑब्जर्वेशन मिशन है. इसे ISRO और NASA ने मिलकर डेवलप किया है. यह एक L और S बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार सैटेलाइट है, जो दिन, रात और हर मौसम में धरती की हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग कर सकता है. NISAR का मकसद लैंड डिफॉर्मेशन, ग्लेशियर मूवमेंट, इकोसिस्टम चेंज और ओशनिक स्टडी करना है. यह मिशन क्लाइमेट चेंज रिसर्च में भी बड़ी भूमिका निभाएगा.

PSLV C61 और EOS-09 मिशन का अनुभव

18 मई 2025 को PSLV C61 के ज़रिए EOS 09 को लॉन्च करने की कोशिश की गई. यह इसरो का 101वां लॉन्च प्रयास था. हालांकि रॉकेट का परफॉर्मेंस दूसरे स्टेज तक नॉर्मल रहा, लेकिन तीसरे स्टेज में आई तकनीकी गड़बड़ी की वजह से मिशन पूरा नहीं हो सका. इसरो ने इस अनुभव से सीख लेकर आगे के मिशनों के लिए सिस्टम को और मज़बूत किया.

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक भारत की मौजूदगी

2025 में इसरो के लिए एक और ऐतिहासिक और गर्व वाला मूमेंट तब आया, जब भारतीय गगनयात्री शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) Axiom 04 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे. यह मिशन 25 जून 2025 को SpaceX Dragon स्पेसक्राफ्ट से लॉन्च हुआ था और इसमें NASA, Axiom Space और ESA की भी भागीदारी रही थी. इस मिशन के तहत अंतरिक्ष में जाने वाले शुभांशु शुक्ला भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बने. उनसे पहले 1984 में राकेश शर्मा भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बने थे.

हालांकि, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में जाने वाले पहले भारतीय एस्ट्रोनॉट का रिकॉर्ड शुभांशु शुक्ला के नाम पर ही हो चुका है. शुभांशु शुक्ला के साथ, अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के एस्ट्रोनॉट्स भी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन गए थे. ये सभी एस्ट्रोनॉट्स करीब 18 दिनों तक अंतरिक्ष में रहे. इस दौरान शुभांशु शुक्ला ने माइक्रोग्रैविटी में सात अहम साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट किए. इनमें मसल रीजेनेरेशन, एल्गी ग्रोथ, फसल की व्यवहारिकता, माइक्रोब्स का सर्वाइवल और स्पेस में मानव मानसिक प्रदर्शन जैसे विषय शामिल थे. यह मिशन भारत के ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम के लिए बेहद अहम माना जा रहा है .

Aditya-L1 से सूरज की नई तस्वीर

फरवरी 2025 में आदित्य L1 मिशन के तहत SUIT यानी Solar Ultraviolet Imaging Telescope ने सूर्य की सतह पर एक पावरफुल सोलर फ्लेयर की बेहद अनोखी तस्वीर कैप्चर की. यह तस्वीर सूरज के लोअर एटमॉस्फियर यानी फोटोस्फियर और क्रोमोस्फियर को समझने में वैज्ञानिकों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. यह भी इस साल में भारतीय स्पेस प्रोग्राम के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हुई.

Gaganyaan mission details
गगनयान मिशन की डिटेल्स (फोटो क्रेडिट: ISRO)

गगनयान: भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन

गगनयान प्रोग्राम भारत का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसके लिए करीब 20193 करोड़ रुपये का बजट अप्रूव किया गया है. इसका मकसद भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को लो अर्थ ऑर्बिट तक भेजना है. अब तक गगनयान मिशन में कई अहम टेक्नोलॉजिकल स्टेप्स पूरे हो चुके हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • ह्यूमन रेटेड LVM3 रॉकेट का डेवलपमेंट और ग्राउंड टेस्ट पूरा
  • क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रोपल्शन सिस्टम तैयार
  • क्रू एस्केप सिस्टम के पांच तरह के मोटर्स का सफल परीक्षण
  • क्रू ट्रेनिंग फैसिलिटी और कंट्रोल सेंटर की स्थापना

इसरो के मुताबिक 2025 की तीसरी तिमाही में दूसरा टेस्ट व्हीकल मिशन और चौथी तिमाही में पहला अनमैन्ड ऑर्बिटल फ्लाइट प्लान किया गया है.

भारत के स्पेस इकोसिस्टम में प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती हलचल

2025 भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए एक अहम मोड़ की तरह रहा. IN-SPACe के जरिए निजी कंपनियों को ISRO की लॉन्च फैसिलिटीज़, टेस्ट सेंटर्स और ट्रैकिंग सपोर्ट तक पहुंच मिली, जिससे सरकारी-निजी साझेदारी सिर्फ औपचारिक न रहकर कामकाजी बन पाई.

इस बदलते माहौल का सबसे साफ संकेत तब मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक मंच से Skyroot Aerospace के Vikram launch vehicle प्रोग्राम को हरी झंडी दिखाई. इसे भारत की निजी लॉन्च क्षमताओं पर बढ़ते भरोसे के रूप में देखा जा रहा है. साल भर Skyroot की टीम अपने ऑर्बिटल रॉकेट के हार्डवेयर को लॉन्च-रेडी बनाने पर लगातार काम करती रही.

उधर, Agnikul Cosmos भी अपनी रफ्तार में आगे बढ़ता नजर आया. कंपनी ने अपने Agnilet semi-cryogenic engine पर सुधार जारी रखा और श्रीहरिकोटा में खुद का लॉन्च पेडेस्टल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की, जो किसी भी भारतीय प्राइवेट स्पेस कंपनी के लिए अब तक का पहला ऐसा कदम था.

इन तमाम गतिविधियों ने यह साफ कर दिया कि भारत के स्पेस सेक्टर में ISRO की भूमिका धीरे-धीरे बदल रही है. अब वह सिर्फ मिशन चलाने वाली संस्था नहीं, बल्कि एक सक्षमकर्ता की भूमिका निभा रही है, जहां निजी कंपनियां अपने स्वतंत्र लॉन्च सिस्टम और ऑपरेशनल क्षमता खड़ी कर रही हैं. 2025 में दिखी यह प्रोग्रेस आने वाले सालों में भारत के स्पेस इकोसिस्टम की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है.

नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल और चंद्रयान 4

भविष्य की बात करें तो इसरो ने नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल पर भी काम तेज़ कर दिया है. यह रॉकेट री यूजेबल फर्स्ट स्टेज के साथ आएगा और लो अर्थ ऑर्बिट में 30000 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम होगा.

वहीं चंद्रयान 4 मिशन, चंद्रयान 3 की सफलता को आगे बढ़ाते हुए मून के साउथ पोल से सैंपल कलेक्शन पर फोकस करेगा. इसमें चार मॉड्यूल चांद की ऑर्बिट तक जाएंगे और दो लैंडर सतह पर उतरेंगे. यह मिशन भारत की लूनर टेक्नोलॉजी को एक नए लेवल पर ले जाने वाला है.

2025 ने साफ कर दिया कि भारत अब सिर्फ स्पेस में एंट्री लेने वाला देश नहीं रहा, बल्कि टेक्नोलॉजी लीडर बनने की राह पर है. सैटेलाइट डॉकिंग, इंटरनेशनल कोलैबोरेशन, हेवी लिफ्ट रॉकेट्स और ह्यूमन स्पेसफ्लाइट की मजबूत नींव, आने वाले दशक में भारत को स्पेस सुपरपावर बनाने की पूरी क्षमता रखती है.