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Twin Radio Galaxies: ब्लैक होल मर्जर और ब्रह्मांड के भविष्य की अनोखी झलक

Twin Radio Galaxies दुर्लभ सिस्टम हैं जहां दो एक्टिव ब्लैक-होल की जेट्स गैलेक्सी विकास, स्टार फॉर्मेशन और ब्लैक-होल मर्जर को समझने में मदद करती हैं.

This is an artist's depiction of a pair of active black holes at the heart of two merging galaxies. They are both surrounded by an accretion disk of hot gas.
ये एक कलाकार की बनाई हुई तस्वीर है, जिसमें दो गैलेक्सी आपस में मिल रही हैं और उनके बीच में दो एक्टिव ब्लैक होल हैं. दोनों ब्लैक होल के चारों तरफ गर्म गैस की एक चमकदार चक्राकार डिस्क (एक्रीशन डिस्क) बनी हुई है. (NASA, ESA, Joseph Olmsted (STScI))
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By Anubha Jain

Published : January 9, 2026 at 8:59 PM IST

8 Min Read
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बेंगलुरु: हमारा ब्रह्मांड अरबों गैलेक्सियां मौजूद हैं और उन्हीं में से एक गैलेक्सी का नाम मिल्की वे है, जिसमें हमारा सोलर सिस्टम और उस सोलर सिस्टम में हमारा ग्रह पृथ्वी मौजूद है. ब्रह्मांड में मौजूद अरबों गैलेक्सियों की एक खास बात है कि यह समय के साथ आपस में टकराती हैं और मिलती हैं. गैलेक्सियों की इन्हीं टकराव की वजह से ब्रह्मांड की बनावट और विकास तय होता है. ब्रह्मांड में मौजूद लगभग हर बड़ी गैलेक्सी के बीच में एक बेहद ताकतवर ब्लैक होल होता है, जिसे सुपरमैसिव ब्लैक होल कहा जाता है. इसका वजन हमारे सूरज से लाखों या करोड़ों गुना ज्यादा हो सकता है.

ऐसे में जब कोई ब्लैक होल आसपास की गैस और धूल को अपनी ओर खींचता है, तो उसके चारों तरफ एक घूमती हुई एक चकती बनती है, जिसे एक्रीशन डिस्क कहा जाता है. इसी प्रक्रिया के दौरान कुछ पदार्थ ब्लैक होल में गिरने की बजाय दो सीधी धाराओं के रूप में बाहर फेंक दिया जाता है. इन्हें जेट्स कहा जाता है. ये जेट्स इतनी ताकतवर होते हैं कि लाखों प्रकाश वर्ष (Light Years) तक फैल सकते हैं और रेडियो तरंगों में साफ दिखाई देते हैं.

जब दो ब्लैक होल एक साथ एक्टिव हों

जब दो गैलेक्सियां आपस में मिलती हैं, तो उनके बीच मौजूद ब्लैक होल भी धीरे-धीरे पास आते हैं. कई बार दोनों ब्लैक होल एक साथ एक्टिव हो जाते हैं और दोनों से जेट्स निकलने लगते हैं. ऐसे बेहद दुर्लभ सिस्टम को Twin Radio Galaxies (TRGs) कहा जाता है. TRGs इसलिए खास हैं क्योंकि ये वैज्ञानिकों को कई खास चीजों को समझने का मौका देते हैं. जैसे कि:

  • दो विशाल ब्लैक होल एक-दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं
  • उनकी जेट्स गैलेक्सी के गैस और सितारों को कैसे बदल देती हैं
  • और आखिर में ब्लैक होल मर्जर से पहले क्या-क्या होता है

भारत से हुई एक ऐतिहासिक खोज

अब तक पूरी दुनिया में सिर्फ तीन Twin Radio Galaxies ही खोजी गई हैं. साल 2022 में भारत के अपग्रेडेड जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (uGMRT) की मदद से एक नई Twin Radio Galaxy खोजी गई, जिसका नाम TRG J104454+354055 है. इस सिस्टम में मौजूद दोनों ब्लैक होल करीब 1 लाख प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं. दोनों से निकलने वाली जेट्स लगभग 3 लाख प्रकाश वर्ष तक फैली हुई हैं. इन जेट्स में सीधा रास्ता नहीं बल्कि घुमावदार और सर्पिल जैसी बनावट दिखती है.

Simulated Twin Radio Galaxies
सिम्युलेटेड ट्विन रेडियो आकाशगंगाएँ (Santanu Mondal)

यह खोज पूरी तरह प्लान्ड नहीं थी. वैज्ञानिक दरअसल X-शेप्ड रेडियो गैलेक्सीज़ का अध्ययन कर रहे थे. ये ऐसी गैलेक्सियां होती हैं जिनमें एक से ज्यादा जेट्स दिखाई देते हैं. इसी दौरान यह अनोखा सिस्टम सामने आया.

इस गैलेक्सी को समझने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिज़िक्स (IIA) के वैज्ञानिकों ने 3D हाइड्रोडायनामिकल सिमुलेशन किए. इन सिमुलेशनों में यह देखा गया कि दोनों ब्लैक होल की जेट्स -

  • एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं
  • आपस में मिलती नहीं हैं
  • और समय के साथ हेलिकल यानी कुंडली जैसी बनावट बना लेती हैं

ये सभी पैटर्न बिल्कुल वही थे, जो रेडियो टेलीस्कोप से देखे गए थे.

यह रिसर्च The Astrophysical Journal में प्रकाशित हुई है. इस अध्ययन का नेतृत्व Santanu Mondal और Ravi Joshi (IIA) ने किया. उनकी टीम में दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, चीन और भारत के वैज्ञानिक शामिल थे.

कैटेगिरीडिटेल्स
खोज कैसे हुईदुर्लभ X-शेप वाली रेडियो गैलेक्सी देखते समय अचानक ये मिल गई
खास बात क्या देखीuGMRT की मदद से एक गैलेक्सी मिली जिसमें दो अलग-अलग जेट्स और दो एक्टिव ब्लैक होल के केंद्र हैं
कंप्यूटर सिमुलेशन से क्या पता चला3D सिमुलेशन में दिखा कि दो अलग-अलग घूमते हुए जेट्स असल में देखी गई चीज से बिल्कुल मैच करते हैं
वैज्ञानिकों की टीमसांतनु मोंडल और रवि जोशी (भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान) ने लीड किया, साथ में साउथ अफ्रीका, अमेरिका और चीन के वैज्ञानिक थे
गुरुत्वाकर्षण तरंगों से कनेक्शनदो बड़े ब्लैक होल वाली ये सिस्टम गुरुत्वाकर्षण तरंगें पैदा करने के लिए बहुत अच्छा उदाहरण है
आगे क्या होगाइसी तरीके से आने वाली बड़ी टेलीस्कोप (जैसे SKA) से और ऐसी गैलेक्सी ढूंढी जा सकेंगी
बड़ा फायदा क्या हैब्लैक होल के आपस में मिलने और पूरी यूनिवर्स में गैलेक्सी के बदलने की समझ बहुत बढ़ जाएगी

जेट्स क्यों मुड़ती हैं.

वैज्ञानिकों ने पाया कि ब्लैक होल की जेट्स स्थिर नहीं होतीं. ये धीरे-धीरे दिशा बदलती रहती हैं. इस प्रक्रिया को प्रीसेशन कहा जाता है. इसे आप घूमते हुए लट्टू की हल्की डगमगाहट से समझ सकते हैं.

प्रीसेशन तब होता है जब -

  • दो ब्लैक होल एक-दूसरे के गुरुत्वाकर्षण से टकराते हैं
  • एक्रीशन डिस्क ब्लैक होल के घूर्णन अक्ष से टेढ़ी होती है

सिमुलेशन में पिछले 190 मिलियन सालों का जेट मूवमेंट देखा गया. साइड-टू-साइड हिलती हुई जेट्स तभी दिखीं जब प्रीसेशन को शामिल किया गया.

ETV Bharat से बातचीत में क्या बोले वैज्ञानिक

सांतनु मोंडल ने ETV Bharat से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान कहा कि ब्लैक होल जेट्स की दिशा समय के साथ बदलती है और इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि ब्लैक होल कैसे बनते हैं और अपने आसपास के वातावरण को कैसे प्रभावित करते हैं. उन्होंने बताया कि मिल्की वे में भी कभी ऐसी जेट्स रही होंगी.

रवि जोशी ने कहा कि रेडियो जेट्स बनाने वाले ब्लैक होल खुद ही बहुत दुर्लभ हैं. ऐसे में दो पास-पास एक्टिव ब्लैक होल मिलना बेहद खास खोज है. जेट्स की दिशा और झुकाव से गैलेक्सी के भविष्य के बारे में अहम जानकारी मिलती है.

Observed Twin Radio Galaxies
जुड़वां रेडियो आकाशगंगाओं को देखा गया (Ravi Joshi)

जेट्स गैलेक्सी को कैसे बदल देती हैं

ब्लैक होल की जेट्स बेहद ज्यादा ऊर्जा लेकर चलती हैं. सांतनु मोंडल ने बताया कि जब ये जेट्स गैस को गर्म कर देती हैं तो वह ठंडी नहीं हो पाती. ठंडी गैस से ही नए तारे बनते हैं. इस तरह जेट्स स्टार फॉर्मेशन को रोक देती हैं. रवि जोशी ने बताया कि जेट्स गैस को गैलेक्सी के केंद्र से बाहर भी धकेल देती हैं. गैस ही सितारों का ईंधन है. जब ईंधन खत्म होता है, तो गैलेक्सी धीरे-धीरे लाल और शांत हो जाती है.

मुख्य बातेंडिटेल्स
जेट की गतिब्लैक होल जेट्स स्थिर नहीं होतीं. प्रीसेशन के कारण धीरे-धीरे दिशा बदलती हैं.
प्रीसेसन का कारणदो ब्लैक होल के बीच गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से प्रीसेशन होता है.
सिमुलेशन से क्या पता चला190 मिलियन साल की सिमुलेशन में जेट्स का हिलना केवल प्रीसेशन के साथ ही समझ आया
दूरी का असरब्लैक होल लाखों प्रकाश वर्ष दूर होने पर भी प्रीसेशन असरदार रहता है.
एक्रीशन डिस्क का प्रभावजब डिस्क ब्लैक होल के घूर्णन से टेढ़ी होती है तो प्रीसेशन ज्यादा होता है.
जेट टिल्ट की शुरुआतगलत दिशा में बनी डिस्क या ब्लैक होल बनने की घटनाओं से जेट झुक सकती हैं.
गैलेक्सी में संकेतमिल्की वे में भी अतीत में ऐसी झुकी हुई जेट्स रही होंगी.
एक्टिव जेट्स की दुर्लभताएक एक्टिव ब्लैक होल दुर्लभ है. दो पास-पास एक्टिव ब्लैक होल और भी दुर्लभ हैं.
वैज्ञानिक महत्वजेट की दिशा से ब्लैक होल की ताकत और गैलेक्सी विकास समझ आता है.
गैस और तारों पर असरजेट्स गैस को गर्म कर देती हैं और तारे बनने से रोकती हैं.
तारे बनने पर रोकगर्म गैस ठंडी नहीं हो पाती, जिससे कम तारे बनते हैं.
गैस निकालनाजेट्स गैस को गैलेक्सी के केंद्र से बाहर धकेल देती हैं.
गैलेक्सी का विकासगैस खत्म होने पर नीली गैलेक्सी लाल और निष्क्रिय बन जाती है.

ग्रैविटेशनल वेव्स से भी जुड़ा है रिश्ता: दो विशाल ब्लैक होल जब पास आते हैं तो वे ग्रैविटेशनल वेव्स पैदा कर सकते हैं. ये स्पेस-टाइम में उठने वाली तरंगें होती हैं. TRGs ऐसे सिस्टम हैं जो भविष्य में इन तरंगों के मजबूत सोर्स बन सकते हैं.

भविष्य की रिसर्च का रास्ता: आने वाले समय में Square Kilometre Array (SKA) जैसे ताकतवर टेलीस्कोप और भी ज्यादा TRGs खोज सकते हैं. इससे वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि शुरुआती ब्रह्मांड में गैलेक्सियां कैसे बदलीं और ब्लैक होल ने उनकी भूमिका कैसे तय की. यह अध्ययन दिखाता है कि ब्लैक होल सिर्फ सब कुछ निगलने वाले पिंड नहीं हैं, बल्कि वो पूरे ब्रह्मांड की संरचना को आकार देने वाली ताकत हैं.

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