ASTC और Eenadu ग्रुप का बड़ा साइंस कॉन्क्लेव, विकसित भारत 2047 के रोडमैप पर होगी हुई चर्चा
हैदराबाद में ‘Lab to Society’ थीम पर राष्ट्रीय विज्ञान संचार सम्मेलन हुआ, जिसमें विकसित भारत-2047 के लिए विज्ञान को समाज से जोड़ने पर चर्चा हुई.


Published : January 8, 2026 at 4:21 PM IST
हैदराबाद: हैदराबाद में आज साइंस यानी विज्ञान, नीति और मीडिया की दुनिया से जुड़ी बड़ी हस्तियां एक-साथ एक मंच पर जुटी और भारत के विकसित भारत 2047 के मिशन पर एक गहन चर्चा हुई. इसके लिए हैदराबाद में एक बड़े साइंस कॉन्क्लेव यानी राष्ट्रीय विज्ञान संचार सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसकी थीम ‘Lab to Society: Role of Science Communication in Building Viksit Bharat 2047’ रखी गई. यह सम्मेलन आज यानी 8 जनवरी 2025, गुरुवार को हैदराबाद के बीएम बिरला साइंस सेंटर के भास्कर ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जहां विज्ञान को आम लोगों की ज़िंदगी से जोड़ने पर गंभीर मंथन हुआ.
पूरे दिनभर चलने वाले इस राष्ट्रीय साइंस कॉन्क्लेव का आयोजन अकादमी फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड कम्युनिकेशन ASTC और Eenadu ग्रुप, ETV, ETV भारत ने मिलकर किया. इसमें नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया NASI तेलंगाना चैप्टर ने भी सहयोग किया. इस सम्मेलन में देशभर से प्रमुख वैज्ञानिक, पॉलिसी मेकर, शिक्षाविद और मीडिया प्रोफेशनल्स शामिल हुए. इस सम्मेलन में चीफ गेस्ट के तौर पर भारत के 13वें और पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू भी शामिल हुए, जबकि इस सम्मेलन की थीमेटिक गेस्ट ऑफ ऑनर विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन रहीं.
चीफ गेस्ट के रूप में शामिल हुए भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि लैब में होने वाला शोध तभी सार्थक है, जब उसका फायदा समाज तक पहुंचे. इसके लिए शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है, उन्होंने विज्ञान संचार (Science Communications) को मजबूत करने के लिए ‘ASTC-Communications’ नाम की एक नई पत्रिका भी जारी की.
राष्ट्रीय विज्ञान संचार सम्मेलन गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने साइंस कम्यूनिकेशन यानी विज्ञान संचार की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि विज्ञान सिर्फ आंकड़ों, ग्राफ और रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए. इसकी असली चुनौती यह है कि आम लोग विज्ञान को समझें और उस पर भरोसा करें. उन्होंने कहा कि हमारे समाज में कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें विज्ञान से जुड़ी कई चीजें समझ में नहीं आती. ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें वैज्ञानिक चीजों के बारे में बार-बार समझाएं. उन्होंने साफ कहा कि विज्ञान को किसी भी तरह के राजनीतिक या पक्षपाती मकसद के लिए दबाया नहीं जाना चाहिए.
WHO की पूर्व चीफ साइंटिस्ट ने क्या कहा
डॉ. स्वामीनाथन ने कहा कि विज्ञान कूटनीति कुछ बुनियादी सच्चाइयों पर टिकी है. बीमारियां पासपोर्ट नहीं देखतीं और जलवायु परिवर्तन किसी सीमा को नहीं मानता. उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के दौरान फैली वैक्सीन से जुड़ी अफवाहों ने लोगों के मन में डर और अविश्वास पैदा किया. कुछ साजिशों में यहां तक कहा गया कि वैक्सीन से प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है, जिससे वैज्ञानिक प्रयासों को नुकसान पहुंचा.
उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि महामारी के समय यह मान लिया गया था कि तथ्य और आंकड़े सामने रखने से लोग अपने आप सही फैसले लेंगे, लेकिन इंसान सिर्फ डेटा के आधार पर नहीं, भरोसे के आधार पर निर्णय लेता है. यही वजह है कि जानकारी देना और सही तरीके से बातचीत करना, दोनों अलग बातें हैं. डॉ. स्वामीनाथन ने कहा कि अब समय आ गया है कि केवल ब्रॉडकास्ट करने के बजाय लोगों की बात सुनी जाए. जब लोग सवाल पूछते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि वे विज्ञान के विरोधी हैं. अक्सर वे बस समझना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षकों, युवाओं और स्थानीय समूहों को विज्ञान और स्वास्थ्य से जुड़े संदेशों को फैलाने वाले काम में शामिल करने की जरूरत है.
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और विज्ञान संचारकों को सम्मानित भी किया गया. इनमें डॉ. डी बालसुब्रमण्यम, डॉ. बीजी सिद्धार्थ और वरिष्ठ विज्ञान पत्रकार पल्लव बागला शामिल हैं. इसके साथ ही ‘विज्ञान श्री’ पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिकों को भी मंच पर विशेष रूप से सम्मान दिया गया. यह सम्मेलन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में विज्ञान को समाज से जोड़ने की एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है.

