SMOPS 2026: गगनयान मिशन की तैयारी तेज, ISRO चेयरमैन ने बताया नया अपडेट
गगनयान मिशन भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नई दिशा तय करेगा, जहां तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग की भूमिका बेहद अहम होगी.


By Anubha Jain
Published : April 8, 2026 at 8:59 PM IST
बेंगलुरु: बेंगलुरु में आयोजित स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस (SMOPS 2026) सम्मेलन के दौरान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) के चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन ने ईटीवी भारत से बातचीत में गगनयान मिशन की प्रगति को लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप इसरो लगातार आगे बढ़ रहा है और पहले ह्यूमन-स्पेस मिशन से पहले तीन मानव रहित मिशन भेजे जाएंगे.
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल पहले अनक्रूड मिशन पर काम जारी है और टाइमलाइन का ऐलान सही समय पर किया जाएगा. वी. नारायण ने बताया कि मानव अंतरिक्ष मिशन बेहद मुश्किल होते हैं, जिनमें मिशन ऑपरेशन्स की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है.
उन्होंने कहा, "लॉन्च व्हीकल को ह्यूमन-रेट करना, क्रू एस्केप सिस्टम तैयार करना, सिक्योर एनवायरमेंट कंट्रोल सिस्टम बनाना और इंसानों को मशीन और सॉफ्टवेयर के साथ जोड़ना बड़ी चुनौतियां हैं."
उन्होंने गगनयान को एक राष्ट्रीय कार्यक्रम बताते हुए कहा कि इसमें कई एजेंसियां और प्रयोगशालाएं शामिल हैं. उन्होंने यह भी बताया कि गगनयान मिशन के लिए IADT-02 टेस्ट और जरूरी प्रोक्योरमेंट का काम तेजी से चल रहा है. इसके अलावा क्रू सदस्यों की मदद के लिए SAKHI नाम का एक डिजिटल असिस्टेंट विकसित किया जा रहा है, जो हेल्थ की निगरानी के साथ-साथ रीयल-टाइम टेक्निकल सपोर्ट भी देगा.

उन्होंने गगनयान को एक राष्ट्रीय कार्यक्रम बताते हुए कहा कि इसमें कई एजेंसियां और प्रयोगशालाएं शामिल हैं. वी. नारायणन ने मिशन ऑपरेशंस को लंबे समय का कमिटमेंट बताया. उन्होंने कहा कि यह 15 साल या उससे भी ज्यादा समय तक चलने वाला काम है, जैसा कि मार्स ऑर्बिटर मिशन और चंद्रयान-3 में देखा गया.
काफी एडवांस्ड बना इसरो
सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम 1962 से शुरू होकर अब एक एडवांस्ड सिस्टम में बदल चुका है. उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और क्लाउड आधारित ग्राउंड सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी अब मिशन ऑपरेशंस का अहम हिस्सा बन चुकी हैं. उन्होंने चंद्रयान, आदित्य-एल1 और अपकमिंग स्पेस डॉकिंग मिशनों का जिक्र करते हुए कॉलेबरेशन्स और इनोवेशन्स की जरूरत पर जोर दिया.
पूर्व ISRO चेयरमैन और पद्मश्री से सम्मानित किरण कुमार ने भी ईटीवी भारत से बातचीत में मानव अंतरिक्ष मिशनों की कठिनाईयों पर बात की. उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे अंतरिक्ष गतिविधियां बढ़ रही हैं, मिशनों का संचालन और ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है." उन्होंने यह भी कहा कि स्पेस प्रोग्राम में इंसानों का जीवन शामिल होने पर उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है, जिसके लिए सिस्टम में अतिरिक्त सुरक्षा और बैकअप जरूरी होते हैं.

किरण कुमार ने SAKHI डिजिटल असिस्टेंट और निरंतर सिमुलेशंस, सिस्टम अपग्रेडेशन तथा लर्निंग की जरूरत पर भी जोर दिया. किरण कुमार ने आगे कहा कि अंतरिक्ष में मानव उपस्थिति का विस्तार सिर्फ खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता के भविष्य और पृथ्वी की बेहतर समझ के लिए भी आवश्यक है. उन्होंने कहा, "अमेरिका और भारत जैसे देशों के बीच सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान बेहद जरूरी है, ताकि सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके."
सम्मेलन में स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA) पर भी चर्चा हुई. सेलेस्ट्रैक (USA) के टी.एस. केल्सो ने कहा कि अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे और निष्क्रिय सैटेलाइट्स के कारण जोखिम लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि कई बार सैटेलाइट्स का ट्रैक खो जाता है, खासकर जब वो अपनी कक्षा (Orbit) बदलते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में मेगा-कॉन्स्टेलेशन के कारण यह चुनौती और बढ़ेगी.
उन्होंने आगे कहा, "सैटेलाइट की साइज, मास, मैन्यूवरेबिलिटी और स्टैंडर्डाइज्ड डेटा फॉर्मेट की कमी के कारण टकराव का खतरा बढ़ जाता है. बेहतर टेक्नोलॉजी, तेज डेटा अपडेट और वैश्विक सहयोग ही इसका समाधान है."
लिहाजा, SMOPS 2026 सम्मेलन ने इतना तो क्लियर कर दिया है कि भारत का स्पेस प्रोग्राम काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन ह्यूमन स्पेस मिशन्स के लिए टेक्निकल कठिनाईयों और सुरक्षा की चुनौतियों से निपटना ही इसरो की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

