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EV मैन्युफैक्चरिंग का भारत: Ather CEO बोले - सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ी नहीं, अपनी टेक्नोलॉजी पर कंट्रोल होना बहुत ज़रूरी है

तरुण मेहता के अनुसार, भारत का ईवी भविष्य केवल इलेक्ट्रिक वाहनों पर नहीं, बल्कि स्वदेशी विनिर्माण, मशीन टूल्स और तकनीकी संप्रभुता पर निर्भर है.

Why technology sovereignty is central to India’s EV manufacturing ambitions, explains Tarun Mehta
तरुण मेहता ने बताया कि भारत की EV मैन्युफैक्चरिंग की महत्वाकांक्षाओं के लिए टेक्नोलॉजी सॉवरेनिटी क्यों ज़रूरी है. (ETV Bharat)
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By Anubha Jain

Published : January 22, 2026 at 9:04 PM IST

6 Min Read
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बेंगलुरु: भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी (EV) सेक्टर काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है. एक वक्त था, जब ईवी से लगभग सभी अहम पार्ट्स - जैसे बैटरी पैक, मोटर, कंट्रोलर, पावर इलेक्ट्रोनिक्स और दूसरे जरूरी सब-सिस्टम्स को चीन या अन्य देशों से आयात किया जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. अब मेक इन इंडिया, पीएलआई स्किम्स और ग्लोबल सप्लाई चेन में बढ़ती अनिश्चितताओं के कारण लोकलाइजेशन अब सिर्फ लागत बचाने का तरीका नहीं, बल्कि भारत के लिए एक रणनीतिक जरूरत भी बन गया है.

पिछले एक दशक में भारतीय EV OEMs और सप्लायर्स ने डिजाइन, इंजीनियरिंग और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में बड़े स्तर पर निवेश किया है. इन निवेशों के कारण आज भारत न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम कर रहा है, बल्कि टेक्नोलॉजी संप्रभुता (Technology Sovereignty) की एक मजबूत नींव भी तैयार कर रहा है.

Ather Energy के CEO का बड़ा संदेश

बेंगलुरु में आयोजित IMTEX Forming 2026 के उद्घाटन सेशन में Ather Energy के को-फाउंडर और सीईओ तरुण मेहता ने भारत के EV इकोसिस्टम के विकास और स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग की अहमियत पर खुलकर बात की.

ईटीवी भारत को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "Ather के शुरुआती दिनों में भारत में लिथियम बैटरी बनाने वाली कंपनियां लगभग थीं ही नहीं. मोटर और मोटर कंट्रोलर जैसे अहम EV पार्ट्स बाहर से मंगाने पड़ते थे. आज वही कंपोनेंट्स इंडस्ट्री में लगभग कमोडिटी बन चुके हैं."

तरुण मेहता ने साफ कहा कि यह बदलाव किसी एक दिन में नहीं हुआ. "यह सब 10 साल से ज्यादा समय तक किए गए लगातार लोकलाइजेशन के प्रयासों का नतीजा है."

सप्लायर्स: EV ट्रांजिशन के असली हीरो

उन्होंने उन शुरुआती सप्लायर्स और पार्टनर्स को भी श्रेय दिया, जिन्होंने ईवी ट्रांजिशन पर भरोसा किया और समय रहते निवेश किया. उनके मुताबिक, खासतौर पर मेटल कंपोनेंट्स- कास्टिंग, फोर्जिंग और वेल्डेड असेंबली में भारत ने मजबूत पकड़ बनाई है. Ather के हाइब्रिड एल्यूमिनियम चेसिस का उदाहरण देते हुए तरुण मेहता ने बताया कि यह स्कूटर इंडस्ट्री में एक ग्लोबल फर्स्ट है.

उन्होंने बताया, "दुनिया में अभी तक किसी भी प्रोडक्शन स्कूटर में ऐसा चेसिस इस्तेमाल नहीं हुआ है. इसे भारत में ही डिजाइन, टूल और मैन्युफैक्चर किया गया है." हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ऐसा इनोवेशन सिर्फ डिजाइन से संभव नहीं होता. उन्होंने समझाते हुए बताया, "अगर हाई-प्रेशर डाई कास्टिंग जैसी मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटी नहीं होती, तो एल्यूमिनियम फ्रेम कभी भी बड़े पैमाने पर नहीं बन पाते."

एथर के सीईओ ने आगे बताया कि, आज एथर अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर भारत में हर महीने करीब 25,000 से 30,000 एल्यूमिनियम फ्रेम बना रही है. उनकी कंपनी का संदेश बिल्कुल साफ था कि, प्रोडक्ट इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग इनोवेशन एक-दूसरे से अलग नहीं हैं.

EV तो भविष्य है, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है

तरुण मेहता मानते हैं कि इलेक्ट्रिफिकेशन अब लगभग तय है, लेकिन यह सफर अभी शुरुआती दौर में ही है. उन्होंने एक बड़ी समस्या की ओर इशारा किया, जो भारत की मशीन टूल्स पर निर्भरता है.

उन्होंने कहा, "ऑटोमोटिव कास्टिंग, प्लास्टिक और बैटरी असेंबली में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर मशीनें विदेशी कंपनियां या फिर उनकी भारतीय सब्सिडियरी बनाती है. इसके अलावा बैटरी वेल्डिंग मशीन, इंडस्ट्रियल रोबोट, गियर ग्राइंडिंग मशीन, मैग्नेट के लिए डायमंड ग्राइंडिंग व्हील, CMM और मैटेरियल एनालिसिस इक्विपमेंट जैसी टेक्नोलॉजी आज भी भारत के बाहर से आती है." ऐसे में हम मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी को ब्लैक बॉक्स की तरह नहीं देख सकते. इस क्षेत्र में असली ताकत तब आएगी, जब हम खुद मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी के मालिक बनेंगे."

भविष्य की टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर

उन्होंने बताया कि, बैटरी सेल, नियोडिमियम मैग्नेट, एक्टुएटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसी टेक्नोलॉजी सीधे एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस पर निर्भर करती हैं. हालांकि, ईवी में मूविंग पार्ट्स कम होते हैं, लेकिन टॉलरेंस, सरफेस फिनिश और मटीरियल क्वालिटी की जरूरत कहीं ज्यादा होती है.

प्रिसिजन स्टैम्पिंग, हाइड्रोफॉर्मिंग, फाइन ब्लैंकिंग, डीप ड्रॉइंग और श्रिंक फिटिंग जैसी तकनीकें अब बेहद जरूरी होती जा रही हैं. लिथियम-आयन बैटरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक डीप-ड्रॉन सेल कैन, जिस बैटरी की लागत का 1% से भी कम होता है, उसका ग्लोबल मार्केट कई अरब डॉलर का है. लेकिन इसे GW स्केल पर बनाने के लिए बेहद खास मशीनों और टाइट टॉलरेंस की जरूरत होती है, जो आज भारत में लगभग नहीं हैं.

भारत को क्यों चाहिए मजबूत मशीन-बिल्डिंग इकोसिस्टम

तरुण मेहता ने कहा कि भारतीय टूल इंडस्ट्री में अब वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्ट्स बनने लगे हैं. अगर R&D में सही निवेश हो, तो भारत भी ग्लोबल लेवल की मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी बना सकता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ मशीन खरीदना काफी नहीं है. हमें R&D, न्यू प्रोडक्ट डेवलपमेंट और स्पेयर कैपेसिटी के लिए भी संसाधन देने होंगे. उनके मुताबिक, जब किसी देश में टेक्नोलॉजी डेवलपर, मशीन बिल्डर और प्रोडक्ट कंपनी यानी एक ऑल-इन-वन इकोसिस्टम बनता है, तो लागत घटती है, परफॉर्मेंस बढ़ती है और देश ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाता है.

ऑटोमोबाइल के बाहर भी बड़े मौके

एथर सीईओ का मानना है कि अब तक मशीन टूल इंडस्ट्री का सबसे बड़ा ग्राहक ऑटो सेक्टर रहा है, लेकिन भविष्य में तस्वीर बदल सकती है. उन्होंने कहा, "एनर्जी स्टोरेज और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन आने वाले समय में बड़े डिमांड ड्राइवर बनेंगे." उन्होंने बताया, रोबोटिक्स और EV में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी लगभग एक जैसी है, जिससे नए सेक्टर्स में भी बड़े मौके खुलते हैं.

टेक्नोलॉजी संप्रभुता और सप्लाई चेन की मजबूती क्यों जरूरी

ईटीवी भारत से खास बातचीत के दौरान तरुण मेहता ने कहा, "ग्लोबल अस्थिरता ने एक बात साफ कर दी है कि टेक्नोलॉजी संप्रभुता बेहद जरूरी है, खासकर टूलिंग इस संप्रभुता का सबसे अहम हिस्सा है. सप्लायर्स को भारत में सिर्फ प्रोडक्शन ही नहीं, बल्कि डिजाइन और इंजीनियरिंग भी लानी होगी. IMTEX जैसे प्लेटफॉर्म OEMs, सप्लायर्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों को एक साथ लाने में अहम भूमिका निभाते हैं."

Ather का आगे का प्लान: हर सेगमेंट में बेहतर अनुभव

तरुण मेहता मानते हैं कि आने वाले समय में EV इनोवेशन का सबसे बड़ा ड्राइवर सॉफ्टवेयर होगा. उनके मुताबिक, आज कस्टमर एक्सपीरियंस में जो अपग्रेड दिख रहा है, उसका बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर से आ रहा है. उन्होंने बजट मॉडल्स और ब्रांड पहचान को लेकर कहा, "हम 'अपग्रेडिंग इंडिया' के लिए प्रोडक्ट बनाते हैं. हमने स्पोर्ट्स स्कूटर से शुरुआत की, Rizta के साथ फैमिली स्कूटर में आए और अब EL प्लेटफॉर्म से कई नए सेगमेंट्स में जाएंगे." उनके मुताबिक, हर सेगमेंट में बेहतर अनुभव देना ही Ather की असली पहचान है.