Explainer: स्मार्टफोन चिप क्या है और कैसे काम करता है? भारत में चिप क्रांति की पूरी कहानी
स्मार्टफोन का चिपसेट वास्तव में एक छोटा-सा चमत्कार है, जिसमें लाखों ट्रांजिस्टर एक साथ काम करके हमारे निर्देशों को पल भर में पूरा करते हैं.


Published : June 30, 2026 at 9:09 PM IST
हैदराबाद: आप इस वक्त जिस स्मार्टफोन या कंप्यूटर में इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं, उसके अंदर एक नाखून जितने छोटे टुकड़े बराबर की चीज़ ने पूरी दुनिया बदल दी है. इस छोटे से टुकड़े को चिप या चिपसेट कहते हैं. आपने कई बार चिप या चिपसेट के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं चिप क्या होता, कैसे काम करता है इसका इतिहास क्या है, भविष्य में चिप का विकास कितना और किस स्तर पर होने वाला है और भारत इस मामले में अभी कहां खड़ा है अगर आप ये सब नहीं जानते, तो आइए हम आपको ये सब बहुत ही आसान भाषा में समझाते हैं.
चिप क्या होता है?
चिप यानी इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit) एक बहुत छोटा सा सिलिकॉन का टुकड़ा होता है, जिस पर लाखों-करोड़ों बेहद छोटे इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे (Compenents) फिट किए जाते हैं. इन कंपोनेंट्स में ट्रांजिस्टर, रेसिस्टर और कैपेसिटर जैसे हिस्से शामिल होते हैं. पुराने जमाने में ये सभी कंपोनेंट्स यानी कलपुर्जे अलग-अलग होते थे और इन्हें तारों से आपस में जोड़ा जाता था, जिससे कारण डिवाइस बहुत बड़ा और भारी-भरकम बन जाता था.
चिप का कमाल यह है कि यह उन सारे अलग-अलग कंपोनेंट्स को एक ही छोटे टुकड़े पर समेट देता है. इसे ऐसे समझिए जैसे एक पूरा बड़ा बाजार, जिसमें हजारों दुकानें हैं, उसे सिकोड़कर एक माचिस की डिब्बी में फिट कर दिया जाए. कुछ ऐसे ही लाखों-करोड़ों बेहद छोटे कंपोनेंट्स को एक ही छोटे टुकड़े पर फिट कर दिया जाता है. यही चिप की असली ताकत होती है कि वो बहुत सारी जानकारियों और क्षमताओं को बहुत छोटी जगह में समेट देता है.
चिप कैसे काम करता है?
चिप के अंदर एक सबसे बुनियादी हिस्सा होता है, जिसे ट्रांजिस्टर कहते हैं. ट्रांजिस्टर एक तरह का बिजली का स्विच होता है, जो ऑन या ऑफ - दो स्थितियों में रहता है. यही ऑन और ऑफ की स्थिति कंप्यूटर की भाषा में 1 और 0 कहलाती है, जिसे बाइनरी कोड कहते हैं.

जब करोड़ों ट्रांजिस्टर मिलकर बेहद तेज़ी से ऑन-ऑफ होते हैं, तो वो मिलकर जटिल गणनाएं (कैलकुलेशन) कर पाते हैं. उदाहरण के लिए, जब आप कैलकुलेटर में 2+2 टाइप करते हैं, तो उस छोटे से कैलकुलेटर के अंदर मौजूद छोटी सी चिप के अंदर मौजूद ट्रांजिस्टर बिजली के सिग्नल को एक खास तरीके से आगे-पीछे घुमाते हैं और आखिर में आपकी कैलकुलेटर की स्क्रीन पर जवाब यानी 4 दिखा देता है. कैलकुलेटर की तरह ही स्मार्टफोन का चिप भी काम करता है, लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि स्मार्टफोन का चिप एक सेकंड में अरबों बार ऐसी कैलकुलेशन्स कर सकता है.
चिप के अंदर मुख्य रूप से कुछ हिस्से होते हैं:
- CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट): यह चिप का दिमाग होता है, जो सारे निर्देशों को प्रोसेस करता है.
- GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट): यह गेम्स, वीडियो और तस्वीरों को दिखाने का काम संभालता है.
- RAM और मेमोरी कंट्रोलर: यह डेटा को अस्थायी रूप से स्टोर करके तेज़ी से इस्तेमाल करने में मदद करता है.
- मॉडम: यह कॉल, इंटरनेट और नेटवर्क सिग्नल को संभालता है.
फोन में चिप कैसे काम करता है?
फोन या स्मार्टफोन में चिप होता है, ये तो सभी जानते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग ये नहीं जानते कि फोन में लगा चिप काम कैसे करता है. हालांकि, कई लोगों के मन में उस प्रोसेस को जानने की उत्सुक्ता होती है. दरअसल, स्मार्टफोन में जिस चिप का इस्तेमाल होता है, उसे SoC यानी सिस्टम ऑन चिप कहा जाता है. SoC में सिर्फ CPU ही नहीं, बल्कि GPU, मॉडम, कैमरा प्रोसेसर (ISP), AI इंजन (NPU) और कई अन्य हिस्से एक ही चिप पर मौजूद होते हैं. इसका मतलब है कि एक पूरा "मिनी कंप्यूटर" ही एक चिप के अंदर में समाया हुआ रहता है.

उदाहरण के तौर पर, जब आप अपने फोन में फोटो खींचते हैं, तो SoC के अंदर मौजूद ISP (इमेज सिग्नल प्रोसेसर) तस्वीर को बेहतर बनाने का काम करता है. ऐसे ही जब आप जब गेम खेलते हैं, तो GPU ग्राफिक्स का पूरा काम संभालता है. जब आप कॉल करते हैं तो फोन की चिप में मौजूद मॉडम नेटवर्क टावर से सिग्नल जोड़ता है. यह सब एक साथ, एक ही छोटी चिप के अंदर होता है.
लैपटॉप, टीवी जैसी अन्य डिवाइस में चिप कैसे काम करता है?
लैपटॉप में आमतौर पर CPU और GPU अलग-अलग चिप होते हैं (हालांकि, आजकल इंटेल (Intel) और एएमडी (AMD) के कुछ नए प्रोसेसर भी सब कुछ एक चिप में मिलाने लगे हैं, जैसे एप्प्ल का M-सीरीज चिप आदि. लैपटॉप का प्रोसेसर ज्यादा बड़े और जटिल काम जैसे बड़ी फाइलें एडिट करना, सॉफ्टवेयर चलाना संभालता है, इसलिए वह स्मार्टफोन चिप से आमतौर पर ज्यादा पावरफुल और ज्यादा बिजली खपत वाला होता है.
इसी तरह से स्मार्ट टीवी में भी एक SoC होता है, जो स्क्रीन पर तस्वीर दिखाने, साउंड प्रोसेस करने और स्मार्ट ऐप्स (जैसे यूट्यूब, नेटफ्लिक्स) चलाने का काम करता है. इसमें फर्क सिर्फ इतना है कि टीवी का चिप बैटरी बचाने की बजाय बेहतर पिक्चर क्वालिटी और स्मूद वीडियो प्रोसेसिंग पर ज्यादा फोकस करता है.
चिप की हिस्ट्री क्या है?
क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे पहला चिप कब और किसने बनाया? चिप यानी इंटीग्रेटेड सर्किट के आविष्कार का श्रेय दो इंजीनियर्स को जाता है. टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स में काम करने वाले इंजीनियर जैक किल्बी ने 12 सितंबर 1958 को अपनी कंपनी के मैनेजमेंट को एक प्रोटोटाइप दिखाया. इस प्रोटोटाइप में जर्मेनियम के एक टुकड़े पर एक ऑसिलोस्कोप लगाकर स्विच दबाया गया और फिर स्क्रीन पर लगातार साइन वेव दिखने लगी, जिससे यह साबित हुआ कि उनका इंटीग्रेटेड सर्किट काम कर रहा है. इसके लिए 6 फरवरी 1959 को "मिनिएचराइज्ड इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स" नाम से पेटेंट फाइल किया गया था.
इसके कुछ ही महीनों के बाद, फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर में काम करने वाले रॉबर्ट नॉयस ने स्वतंत्र रूप से मोनोलिथिक इंटीग्रेटेड सर्किट का आइडिया दिया, जो जीन हॉर्नी की विकसित की हुई प्लानर प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर आधारित था. किल्बी का चिप जर्मेनियम से बना था और उसमें बार से तार जोड़ने पड़ते थे, जबकि नॉयस ने सिलिकॉन को बेहतर विकल्प माना क्योंकि इसकी इलेक्ट्रिकल प्रॉपर्टीज बेहतर थीं और यह आसानी से उपलब्ध भी थी. उसके बाद 1959 में उन्होंने पहला प्रैक्टिकल सिलिकॉन माइक्रोचिप बनाया, जिसे बड़े पैमाने पर बनाना ज्यादा आसान और भरोसेमंद था.
उसके बाद से इन दोनों इंजीनियर्स यानी जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस को इंटीग्रेटेड सर्किट के सह-आविष्कारक के रूप में मान्यता मिली हुई है. इस अविष्कार के लिए जैक किल्बी को साल 2000 में नोबेल प्राइज से सम्मानित भी किया गया था. शुरुआती तौर में इन चिप्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से सैन्य उपकरणों, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और कैलकुलेटर जैसी चीजों में किया जाता था, लेकिन अब मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप, टीवी, घड़ी समेत कई डिवाइस में इस्तेमाल किया जाता है.
मोबाइल में सबसे पहला चिप कौनसा था?
मोबाइल फोन की दुनिया में चिप का सफर थोड़े अलग ढंग से शुरू हुआ था. 1958 में सोफी विल्सन और स्टीव फर्बर ने ब्रिटिश कंपनी एकॉर्न कंप्यूटर्स में पहला ARM प्रोसेसर (ARM1) बनाया था, जो RISC यानी रिड्यूस्ड इंस्ट्रक्शन सेट कंप्यूटिंग पर आधारित था. यह आर्किटेक्चर बहुत कम बिजली में ज्यादा काम कर सकता था, इसलिए आगे चलकर यह मोबाइल फोन के लिए सबसे उपयुक्त यानी सबसे अच्छा साबित हुआ.

मोबाइल फोन में पहली बार ARM प्रोसेसर का इस्तेमाल सन् 1997 में आए Nokia 6110 में हुआ था, ARM प्रोसेसर वाला पहला सेल फोन बना था. उसके बाद ARM प्रोसेसर मोबाइल फोन की दुनिया में छाए रहे और उनकी क्षमताएं समय के साथ-साथ बढ़ती गई और बेहतर होती गई.
स्मार्टफोन के मामले में, असली SoC यानी सिस्टम-ऑन-चिप का दौर 2000 के दशक के मध्य में शुरू हुआ था. 2003 में टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के OMAP 310 और OMAP 320 प्रोसेसर मोबाइल डिवाइस के लिए कमर्शियली उपलब्ध शुरुआती SoC के सॉल्यूशन रूप में गिने जाते थे. हालांकि, तब तक किसी एक चिप को आधिकारिक रूप से पहला मोबाइल SoC का दर्जा नहीं मिला था.
मोबाइल चिप के इस दौर में क्वालकॉम की भी बड़ी भूमिका रही है. 2005 में क्वालकॉम ने अपने MSM7500 चिप में दूसरा CPU जोड़ा, ताकि विंडोज मोबाइल जैसे थर्ड पार्टी ऑपरेटिंग सिस्टम चल सकें. इसमें एक CPU मॉडम का काम संभालता था और दूसरा एप्लिकेशन का काम करता था.
2007 में क्वालकॉम ने MSM8650 में पहला 1 गीगाहर्ट्ज़ ARM-बेस्ड CPU जोड़ा था. सैमसंग की बात करें तो कंपनी ने अपना पहला मोबाइल प्रोसेसर (S3C44B0) साल 2000 में पेश किया था, जो 66 मेगाहर्ट्ज़ पर चलता था.
स्मार्टफोन चिप का साल-दर-साल इवोल्यूशन
- 1997 - Nokia 6110 में पहली बार ARM प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया.
- 2000 - Samsung ने अपना पहला मोबाइल प्रोसेसर S3C44B0 लॉन्च किया.
- 2003 - टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के OMAP सीरीज प्रोसेसर बाजार में आए, जो शुरुआती मोबाइल SoC में गिने जाते हैं.
- 2005 - Qualcomm ने MSM7500 में डुअल-CPU डिजाइन अपनाया यानी मॉडम और ऐप्लिकेशन प्रोसेसिंग अलग-अलग हुई.
- 2007 - Qualcomm ने MSM8650 में पहला 1GHz ARM-बेस्ड CPU जोड़ा. इसी साल पहला आईफोन (iPhone) भी लॉन्च हुआ था, जिसने टचस्क्रीन स्मार्टफोन के लिए तेज़ चिप की जरूरत को बढ़ा दिया था.
- 2010 - Samsung ने S5PC110 चिपसेट के साथ अपनी एक्सीनॉस (Exynos) ब्रांडिंग शुरू की.
- 2013 - MediaTek पहली कंपनी बनी, जिसने आठ सीपीयू कोर वाला ऑक्टा-कोर मोबाइल SoC बनाने की घोषणा की. इसी दौर में क्वालकॉम का Snapdragon 800 सीरीज मार्केट लीडर बन गया था.
- 2015 - फरवरी 2015 में क्वालकॉम ने स्टैंडअलोन मॉडम प्रोडक्ट्स को भी स्नैपड्रैगन नाम के तहत ब्रांड करना शुरू किया.
- 2016 - क्वालकॉम ने Snapdragon 820 लॉन्च किया, जो इन-हाउस डिज़ाइन किए गए Kryo कोर वाला 64-बिट क्वाड-कोर प्रोसेसर था.
- 2017 - Huawei ने Kirin 970 चिप लॉन्च किया, जिसमें पहली बार डेडिकेटेड न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट (NPU) जोड़ी गई यानी यहां से ही ऑन-डिवाइस एआई प्रोसेसिंग का दौर शुरू हुआ था.
- 2020 - दिसंबर 2020 में क्वालकॉम ने Snapdragon 888 लॉन्च किया, जो ARM के कॉर्टेक्स-X सीरीज आर्किटेक्चर वाला पहला क्वालकॉम SoC था.
- 2021 - 2021 यानी कोरोना वायरस काल के बाद Snapdragon 8 Gen Series, MediaTek Dimensity सीरीज और एप्पल का A-सीरीज, M सीरीज चिप एआई फीचर्स, बेहतर कैमरा प्रोसेसिंग और गेमिंग परफॉर्मेंस पर फोकस करने लगे.
- 2026 - आज के जमाने में क्वालकॉम के Snapdragon 8 Elite Gen 5 जैसे नए चिप्स SVE और SME जैसे एडवांस्ड सपोर्ट जुड़ चुके हैं.
स्मार्टफोन चिप इवोल्यूशन का भविष्य
स्मार्टफोन चिप की हिस्ट्री और प्रजेंट देखने के बाद सवाल उठता है कि इसका फ्यूचर क्या होगा? दरअसल, आने वाले सालों के लिए स्मार्टफोन चिप की दिशा कुछ साफ संकेत दे रही है. चिप निर्माता अब सिर्फ स्पीड बढ़ाने पर नहीं, बल्कि कम बिजली से ज्यादा काम करने यानी एनर्जी एफिशिएंसी और ऑन-डिवाइस एआई पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. आगे चलकर इन क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
- छोटी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस: अब चिप 3 नैनोमीटर और उससे भी छोटी प्रोसेस पर बनने लगे हैं, जिससे एक ही चिप पर ज्यादा ट्रांजिस्टर फिट हो पा रहे हैं और बिजली की खपत कम हो रही है.
- ज्यादा पावरफुल NPU: भविष्य में चिप में एआई टास्क जैसे रियल-टाइम लैंग्वेज ट्रांसलेशन, फोटो एडिटिंग और जनरेटिव एआई फीचर सीधे फोन में ही आने लगेंगे. यहां पर सीधे फोन में आने का मतलब है कि तब इन सभी फीचर्स को इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन की भी जरूरत नहीं होगी.
- बैटरी लाइफ बेहतर होगी: भविष्य में चिप डिज़ाइन में सुधार करने के बाद फोन हैवी यूज़ करने के बाद और चार्ज किए बिना भी ज्यादा देर तक टिक पाएंगे.
- फोल्डेबल और नए फॉर्म फैक्टर के लिए खास चिप: फोल्डेबल फोन और नए डिवाइस फॉर्मेट के हिसाब से कस्टम चिप डिज़ाइन सामने आ सकते हैं.
- सैटेलाइट कनेक्टिविटी: भविष्य के मॉडम चिप में सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होने की क्षमता एक आम बात हो सकती है. इससे लोग उन क्षेत्रों से भी कनेक्ट हो पाएंगे, जहां नेटवर्क नहीं है.
फ्यूचर चिप्स में होने वाले इन सुधारों से आने वाले स्मार्टफोन में बेहतर कैमरा प्रोसेसिंग, तेज़ गेमिंग, लंबी बैटरी लाइफ और स्मार्ट AI असिस्टेंट जैसे फीचर्स आम हो जाएंगे, जो आज प्रीमियम फोन तक सीमित हैं.
AI के लिए फोन में चिप का रोल और महत्व
आजकल हर नया स्मार्टफोन "AI Phone" के नाम और महत्वता से बेचा जा रहा है और इसके पीछे सबसे बड़ी भूमिका चिप के अंदर मौजूद NPU (न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट) की है, जिसकी शुरुआत सबसे पहले चीन की स्मार्टफोन कंपनी Huawei ने की थी, जैसा कि हमने आपको ऊपर भी बताया था. NPU एक खास तरह का हिस्सा है, जो खासतौर पर AI और मशीन लर्निंग से जुड़े कैलकुलेशन के लिए डिजाइन किया गया है.

NPU एक ऐसी चीज़ है, जिसकी मदद से आप किसी फोटो से बैकग्राउंड हटा पाते हैं, अपनी आवाज़ को टेक्स्ट में बदल पाते हैं या आपके फोन का कैमरा अपने-आप सीन को पहचानकर अपनी सेटिंग्स बदल देता है.
NPU की मदद से ये सभी काम फोन के अंदर ही हो जाते हैं और इसके लिए इंटरनेट पर कोई डेटा भेजने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे काम भी तेज होता है और यूज़र्स की प्राइवेसी भी बनी रहती है, क्योंकि आपका डेटा क्लाउड पर नहीं आता.
जैसे-जैसे जनरेटिव एआई फीचर (जैसे फोटो एडिटिंग में AI मैजिक इरेज़र, रियल-टाइम ट्रांसलेशन, AI राइटिंग असिस्टेंट) फोन में आम होते जा रहे हैं, चिप निर्माताओं के लिए NPU की ताकत बढ़ाना ही प्रोसेसर डिज़ाइन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनती जा रही है.
भारत में चिप को लेकर क्या हो रहा है?
भारत पिछले कुछ सालों में सेमीकंडक्टर यानी चिप मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़े कदम उठा रहा है. आपने भी पिछले कुछ महीनों या सालों से चिप मैन्युफैक्चरिंग के बारे में कई न्यूज़ सुनी या पढ़ी होंगी. भारत सरकार ने 2021 में करीब 10 अरब डॉलर के सेमीकंडक्टर इंसेंटिव प्रोग्राम की शुरुआत की थी, जिसके तहत सरकार चिप प्रोजेक्ट लगाने की लागत का करीब 50% तक समर्थन देने को तैयार हुई. इस फैसले के बाद कई बड़ी कंपनियों ने भारत में निवेश करना शुरू किया.
जून 2026 तक की स्थिति के अनुसार, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 12 प्रोजेक्ट और SPECS स्कीम के तहत एक प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है, यानी कुल 13 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट भारत में चालू या निर्माणाधीन हैं. इनमें से कुछ अहम प्रोजेक्ट्स की डिटेल्स नीचे लिखी हैं:
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और PSMC: यह फैब्रिकेशन प्लांट गुजरात के धोलेरा में है, जो करीब 10.9 अरब डॉलर की लागत से बन रहा है. इस प्लान्ट से 2026 के अंत तक में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है. मई 2026 में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने डच कंपनी ASML के साथ पार्टनरशिर की थी, ताकि धोलेरा के 300-मिमी वेफर फैब्रिकेशन प्लांट के लिए एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी और इक्विपमेंट मिल सके.
टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (TSAT): असम के मोरीगांव में करीब 3.3 अरब डॉलर की असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग यूनिट तैयार हो रही है.
माइक्रोन टेक्नोलॉजी: गुजरात के साणंद में असेंबली और टेस्ट प्लांट, जो पहले ही कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर चुका है.
CG पावर, काइन्स टेक्नोलॉजी, फॉक्सकॉन-HCL जॉइंट वेंचर: इन कंपनियों के भी अलग-अलग प्रोजेक्ट गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब और ओडिशा में चल रहे हैं.
मई 2026 में राजस्थान के भिवाड़ी में सहस्र सेमीकंडक्टर्स द्वारा संचालित पहला ATMP/OSAT प्लांट शुरू हुआ, जो ISM योजना से बाहर SPECS स्कीम के तहत बनने वाली पहली सेमीकंडक्टर यूनिट है.
इन सभी चिप इन्वेस्टमेंट्स के वित्तिय आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 तक पांच सेमीकंडक्टर कंपनियों ने मिलकर कुल 15,799 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया था और सरकार को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 तक यह आंकड़ा 31,299 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा, जो 1,64,291 करोड़ रुपये के कुल निवेश का करीब 20 प्रतिशत है.

भविष्य में क्या होने वाला है?
सरकार अब सिर्फ चिप फैक्ट्री लगाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहती. केंद्र सरकार इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण (ISM 2.0) को 5 साल से बढ़ाकर 12 साल तक ले जाने की योजना बना रही है, जिसके लिए करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी हो रही है. इस स्टेप में सरकार सिर्फ चिप फैक्ट्री नहीं, बल्कि कच्चे माल, स्पेशियलिटी केमिकल्स, गैसों, पैकेजिंग और सप्लाई चेन जैसे पूरे इकोसिस्टम को मजबूत बनाना चाहती है.
इसके अलावा, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार चिप डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का एक नया फंड लॉन्च करने का प्लान भी तैयार कर रही है, जिसे अमेरिका के 52 अरब डॉलर के CHIPS एंड साइंस एक्ट और चीन की बड़ी सरकारी निवेश योजनाओं की तर्ज पर देखा जा रहा है.
लक्ष्य की बात करें तो फिलहाल, भारत कम मुश्किल यानी लो-एंड और मिड-रेंज चिप्स प्रोडक्शन से शुरुआत कर रहा है, लेकिन सरकार का लक्ष्य धीरे-धीरे एडवांस्ड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी की ओर कदम बढ़ाना है. केंद्र सरकार ने साल 2032 तक भारत को ताइवान, साउथ कोरिया और अमेरिका जैसे दुनिया के बड़े और प्रमुख चिप बनाने वाले देशों के बराबर वाला इकोसिस्टम बनाने का लक्ष्य तय किया है.
इसके साथ ही इस इंडस्ट्री से 2026 तक करीब 10 लाख रोजगार पैदा होने का भी अनुमान लगाया जा रहा है. इसके अलावा माइंडग्रोव, सिग्नलचिप, सांख्य लैब्स जैसे 50 से ज्यादा सेमीकंडक्टर स्टार्टअप AI और ऑटोमोटिव चिप इनोवेशन का काम कर रहे हैं.
लिहाजा, कुल मिलाकर देखा जाए तो चिप सिर्फ एक छोटा सा हार्डवेयर का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरी डिजिटल दुनिया की नींव है. 1958 में एक छोटी लैबोरटी में जन्मा यह आइडिया आज हर इंसान के जेब में मौजूद स्मार्टफोन को सुपरकंप्यूटर जितनी ताकत दे रहा है और भारत भी अब इस वैश्विक चिप क्रांति में अपनी जगह बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है.

